ऑस्ट्रेलिया के पूर्व न्यायाधीश माइकल हडसन मैकह्यु को सर्वोच्च न्यायालय ने मध्यस्थ नियुक्त किया-(04-MAY-2013) C.A

| Sunday, May 4, 2014
सर्वोच्च न्यायालय ने 29 अप्रैल 2014 को केजी बेसिन पर केंद्र सरकार और मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के बीच विवाद को सुलझाने के लिए तीसरे मध्यस्थ के रूप में आस्ट्रेलियाई उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश माइकल हडसन मैकह्यु को नियुक्त किया.
इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और लेफ्टिनेंट गवर्नर जेम्स स्पीगलमैन को ट्रिब्यूनल का चेयरमैन नियुक्त किया था। मगर उनके नाम पर विवाद होने के बाद 2 अप्रैल 2014 को कोर्ट ने अपना फैसला वापस ले लिया था तथा मैकह्यु को मध्यस्थ न्यायाधिकरण के अध्यक्ष के रूप में नामित किया गया.
केंद्र सरकार ने जेम्स स्पीगलमैन के नाम पर यह कहते हुए आपत्ति जताई थी कि वह (न्यायमूर्ति स्पीगलमैन) आरआईएल की ओर से सौंपे गए मध्यस्थकारों की सूची में शीर्ष पर हैं अतः उन्हें मध्यस्थकार नहीं बनाया जाना चाहिए. इसके बाद उनका नाम वापस ले लिया गया.
मध्यस्थ न्यायाधिकरण के अध्यक्ष के रूप में स्वतंत्र मध्यस्थ की नियुक्ति के मुद्दे पर 31 मार्च 2014 को न्यायमूर्ति निज्जर द्वारा निर्णय दिया गया. न्यायाधिकरण के अन्य दो सदस्य भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एस पी भरुचा और न्यायमूर्ति वीएन खरे हैं.
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) और केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों क्रमशः न्यायमूर्ति एस पी भरुचा और न्यायमूर्ति वीएन खरे को अपना-अपना मध्यस्थ नामित किया है.
अध्यक्ष के रूप में एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ की नियुक्ति का निर्णय सर्वोच्च न्यायालय ने द्वारा लिया गया था. इस मध्यस्थ न्यायाधिकरण की नियुक्ति रिलायंस और सरकार के मध्य मौजूद केजी बेसिन में देश के प्रमुख प्राकृतिक गैस क्षेत्र के विकास के लिए लागत की पुनर्प्राप्ति के मुद्दे पर विवाद के अधिनिर्णय के लिए की गयी हैं.


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