राष्ट्रीय वार्षिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एएचएस) का दूसरा अपडेट 6 मार्च 2014 को जारी किया गया. एएचएस विश्व में सबसे
बड़ा जनसांख्यिकीय सर्वेक्षण है और नमूना पंजीकरण प्रणाली से ढाई गुना बड़ा है.
सर्वेक्षण सशक्तीकृत कार्य दल वाले आठ राज्यों में आयोजित किया गया, जिनके नाम हैं बिहार, झारखंड, उत्तर
प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश,
छत्तीसगढ़, ओडिशा और राजस्थान. इन राज्यों में
देश की कुल जनसंख्या का लगभग 48 प्रतिशत शामिल है.
ये राज्य अपने अपेक्षाकृत उच्चतर प्रजनन और मृत्यु
संकेतकों की दृष्टि से उच्च फोकस वाले राज्य हैं.
सर्वेक्षण का उद्देश्य बेंचमार्क संकेतकों के माध्यम से
नजदीकी अंतरालों पर राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) सहित सरकार के
विभिन्न स्वास्थ्यगत हस्तक्षेपों के निष्पादन और परिणाम पर नजर रखना है.
सर्वेक्षण की मुख्य बातें
सर्वेक्षण की मुख्य बातें
अशोधित जन्म-दर (सीबीआर)
: सीबीआर, जो प्रति 1000 जनसंख्या
पर जीवित जन्मों की माप है
• बागेश्वर, उत्तराखंड में 14.7 की न्यूनतम अशोधित जन्म-दर
(सीबीआर) और श्रावस्ती, उत्तर प्रदेश में 40.9 की अधिकतम सीबीआर सूचित की गई.
• जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में सीबीआर शहरी क्षेत्रों की तुलना में सामान्यत: उच्चतर है.
• इसके अतिरिक्त, जिलों में मृत्य-दर तदनुरूपी शहरी मृत्य-दर से अत्यधिक उच्चतर है.
• पुरुष मृत्यु-दरों की तुलना में निम्न महिला मृत्यु-दर भी देखी गई है.
• जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में सीबीआर शहरी क्षेत्रों की तुलना में सामान्यत: उच्चतर है.
• इसके अतिरिक्त, जिलों में मृत्य-दर तदनुरूपी शहरी मृत्य-दर से अत्यधिक उच्चतर है.
• पुरुष मृत्यु-दरों की तुलना में निम्न महिला मृत्यु-दर भी देखी गई है.
शिशु मृत्यु-दर (आईएमआर)
: आईएमआर प्रति 1000 जीवित
जन्मों पर शिशु-मृत्युओं (आयु एक वर्ष से कम) की संख्या बताती है.
•
आईएमआर रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड में 19
पर न्यूनतम है, जबकि श्रावस्ती, उत्तर प्रदेश में वह 103 पर अधिकतम थी.
• पूर्वी सिंहभूम और धनबाद (झारखंड) तथा चमौली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा (उत्तराखंड) नामक छह जिले 2015 तक 28 की आईएमआर हासिल करने का संयुक्त राष्ट्र सहस्राब्दी लक्ष्य (एमडीजी) - 4 पहले ही प्राप्त कर चुके हैं.
• बोकारो और रांची (झारखंड) तथा बागेश्वर और नैनीताल (उत्तराखंड) यह लक्ष्य प्राप्त करने के काफी नजदीक हैं.
नवजात मृत्य-दर (एनएनएमआर) : एनएनएमआर प्रति 1000 जीवित जन्मों पर शिशु-मृत्युओं (आयु 29 दिन से कम) की संख्या का मापन करती है.
• रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड में 11 की न्यूनतम एनएनएमआर है, जबकि बलांगीर, ओडिशा ने 75 की अधिकतम एनएनएमआर दर्शाई.
• प्रत्येक 10 शिशु-मृत्युओं में से 6-7 नवजात-मृत्युएँ हैं. जिलों में ग्रामीण एनएनएमआर शहरों की तुलना में अत्यधिक उच्च है.
5 से नीचे मृत्यु-दर (यूएमआर) : यू5एमआर प्रति 1000 जीवित जन्मों पर अपने पांचवें जन्म से पहले मर जाने वाले बच्चों की संख्या सूचित करती है.
• पूर्वी सिंहभूम और धनबाद (झारखंड) तथा चमौली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा (उत्तराखंड) नामक छह जिले 2015 तक 28 की आईएमआर हासिल करने का संयुक्त राष्ट्र सहस्राब्दी लक्ष्य (एमडीजी) - 4 पहले ही प्राप्त कर चुके हैं.
• बोकारो और रांची (झारखंड) तथा बागेश्वर और नैनीताल (उत्तराखंड) यह लक्ष्य प्राप्त करने के काफी नजदीक हैं.
नवजात मृत्य-दर (एनएनएमआर) : एनएनएमआर प्रति 1000 जीवित जन्मों पर शिशु-मृत्युओं (आयु 29 दिन से कम) की संख्या का मापन करती है.
• रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड में 11 की न्यूनतम एनएनएमआर है, जबकि बलांगीर, ओडिशा ने 75 की अधिकतम एनएनएमआर दर्शाई.
• प्रत्येक 10 शिशु-मृत्युओं में से 6-7 नवजात-मृत्युएँ हैं. जिलों में ग्रामीण एनएनएमआर शहरों की तुलना में अत्यधिक उच्च है.
5 से नीचे मृत्यु-दर (यूएमआर) : यू5एमआर प्रति 1000 जीवित जन्मों पर अपने पांचवें जन्म से पहले मर जाने वाले बच्चों की संख्या सूचित करती है.
• पिथौरागढ़, उत्तराखंड ने 24 की न्यूनतम यू5एमआर दर्ज की, जबकि 145 की
अधिकतम यू5एमआर ओडिशा के कंधमाल जिले में दर्ज की गई. जिलों
में लडकियाँ लड़कों की तुलना में अधिक संख्या में 5 वर्ष की
आयु तक पहुँचने से पहले मर जाती हैं.
• कुल 7 जिलों अर्थात पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, रुद्रप्रयाग, चमौली, नैनीताल और बागेश्वर (उत्तराखंड) तथा पूर्वी सिंहभूम (झारखंड) 2015 तक 42 का संयुक्त राष्ट्र सहस्राब्दी लक्ष्य (एमडीजी) - 4 पहले ही प्राप्त कर चुके हैं.
• अन्य 10 जिले अर्थात धनबाद, बोकारो, कोडरमा, हजारीबाग और गिरिडीह (झारखंड) तथा कोटा (राजस्थान) और चंपावत, ऊधम सिंह नगर, देहरादून और उत्तरकाशी (उत्तराखंड) यह लक्ष्य प्राप्त करने के काफी नजदीक हैं.
• कुल 7 जिलों अर्थात पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, रुद्रप्रयाग, चमौली, नैनीताल और बागेश्वर (उत्तराखंड) तथा पूर्वी सिंहभूम (झारखंड) 2015 तक 42 का संयुक्त राष्ट्र सहस्राब्दी लक्ष्य (एमडीजी) - 4 पहले ही प्राप्त कर चुके हैं.
• अन्य 10 जिले अर्थात धनबाद, बोकारो, कोडरमा, हजारीबाग और गिरिडीह (झारखंड) तथा कोटा (राजस्थान) और चंपावत, ऊधम सिंह नगर, देहरादून और उत्तरकाशी (उत्तराखंड) यह लक्ष्य प्राप्त करने के काफी नजदीक हैं.
मातृ मृत्यु-दर (एमएमआर)
: एमएमआर ने प्रति 100000 जीवित
जन्मों पर मातृ-मृत्युओं के अनुपात का मापन किया.
• 183 की न्यूनतम एमएमआर कुमाऊँ मुख्यालय, उत्तराखंड में और 451 की अधिकतम एमएमआर फैजाबाद मंडल, उत्तर प्रदेश में सूचित की गई.
जन्म पर लिंग-अनुपात (एसआरबी) : एसआरबी ने प्रति 1000 पुरुष जीवित जन्मों पर महिला जीवित जन्मों की संख्या का मापन किया.
• न्यूनतम 764 पिथौरागढ़, उत्तराखंड में और अधिकतम 1030 उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में दर्ज की गई.
• 183 की न्यूनतम एमएमआर कुमाऊँ मुख्यालय, उत्तराखंड में और 451 की अधिकतम एमएमआर फैजाबाद मंडल, उत्तर प्रदेश में सूचित की गई.
जन्म पर लिंग-अनुपात (एसआरबी) : एसआरबी ने प्रति 1000 पुरुष जीवित जन्मों पर महिला जीवित जन्मों की संख्या का मापन किया.
• न्यूनतम 764 पिथौरागढ़, उत्तराखंड में और अधिकतम 1030 उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में दर्ज की गई.
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