एक भारतीय-अमेरिकी इंजीनियर अब्राहम पन्निकोट्टू ने 7 मार्च 2014 को अमेरिकी सेना के लिए जीरो प्रेशर टायर
विकसित करने की घोषणा की. ये जीरो प्रेशर टायर सड़क
किनारे के बमों या गनफायर से कटने-फटने होने के बाद भी चलते रहेंगे. नए एईजी जीरो
प्रेशर टायर पंक्चर होने के बाद 300 मील तक न्यूनतम 50
एमपीएच की गति बनाए रखेंगे.
जीरो प्रेशर टायर भारी-भरकम सामान लाने-ले जाने का काम बेहतर तरीके
से करते हैं और सैनिकों को खतरनाक रास्तों से तेजी से ले जा सकते हैं. हालाँकि
अमेरिकी सैनिक वाहनों के टायर अभी रन-फ्लैट इन्सर्ट्स से लैस हैं, पर रक्षा विभाग उन्हें जीरो प्रेशर टायरों के रूप में अपग्रेड करना चाहता
था.
अब्राहम पन्निकोट्टू अपनी टीम के साथ अक्रोन, ओहियो स्थित अमेरिकन इंजीनियरिंग ग्रुप (एईजी) के साथ काम रहे है. अमेरिकी
रक्षा विभाग ने उनकी टीम को जीरो प्रेशर टायर विकसित करने के लिए 10 लाख अमेरिकी डॉलर का अनुदान दिया है.
एईजी प्रोटोटाइप ऐसी प्रौद्योगिकी विकसित कर रही है, जो ओवरहीटिंग सहन कर सकती है और जिसमें टायर फ्लेक्सिबिलिटी है.
अंततोगत्वा इस प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल समस्त भूभागों के वाहनों के
साथ-साथ खनन और निर्माण वाहनों के लिए भी किया जा सकेगा.
वर्ष 2006 में पेंटागन ने
पन्निकोट्टू और उनकी टीम को स्ट्राइकर आर्मर्ड वाहनों हेतु वायुरहित टायर डिजाइन
करने के लिए सम्मानित किया था. यह पुरस्कार उन्हें सैनिकों के लिए नवोन्मेष लाने
का उदाहरण प्रस्तुत करने वाले अपवादात्मक निष्पादन के लिए दिया गया था. कंपनी के
पास जीरो टायर्स टेक्नोलॉजी के लिए पेटेंट्स लंबित हैं.
अब्राहम के पास सरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (सूरत, गुजरात) से मेकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री है. बाद में उन्होंने अक्रोन
विश्वविद्यालय से पॉलीमर साइंस में स्नातक अध्ययन पूरा किया. उन्होंने रबर के
इंजीनियरिंग अनुप्रयोगों पर कई शोध-लेख लिखे हैं.
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