भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार ने तुर्की और ओमान के अभिलेखागारों से समझौता किया-(07-JAN-2014) C.A

| Tuesday, January 7, 2014
भारतीय के राष्ट्रीय अभिलेखागार ने तुर्की के राज्य अभिलेखागार और ओमान के राष्ट्रीय प्रलेख और अभिलेख प्राधिकरण के साथ समझौता किया. यह समझौता अंकारा और मस्कट में आयोजित बैठकों की एक श्रृंखला के बाद किया गया. 

भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार के महानिदेशक वी श्रीनिवास ने 2 जनवरी 2014 को तुर्की के राज्य अभिलेखागार के महानिदेशक उगुर उनल से इस्तांबुल में मुलाकात की. वे 31 दिसंबर 2013 को मस्कट में ओमान के राष्ट्रीय प्रलेख और अभिलेख प्राधिकरण के अध्यक्ष हामद मोहम्मद अल धावियानी से मिले.

भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी के 7 अक्तूबर 2013 को अंकारा-दौरे के दौरान भारत और तुर्की के बीच अभिलेखागारों में सहयोग की एक संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे. तुर्की में भारत की राजदूत सुष्मिता गांगुली थॉमस और तुर्की के प्रथम उप-अभिलेखागार मंत्री एम. अब्दुल्लाह कैनबेक भी इस अवसर पर अंकारा-स्थित तुर्की के राज्य अभिलेखागार में उपस्थित थे. संधि पर हिंदी और तुर्की दो भाषाओँ में हस्ताक्षर कर उसका आदान-प्रदान किया गया.   

यह हस्ताक्षरित संधि भारतीय के राष्ट्रीय अभिलेखागार को 12 मिलियन दस्तावेजों वाले प्राचीन ओटोमन अभिलेखागार-प्रलेखों में पहुँच की अनुमति देती है. दोनों पक्षों ने अभिलेखागारों के क्षेत्र में सहयोग के लाभ स्वीकार किए और आगामी वर्षों में गहन सहयोग की आवश्यकता पर सहमति जताई. दोनों पक्ष भविष्य में मजबूत संस्थाओं और उन्नत अभिलेख-प्रबंधन प्रथाओं के विकास के लिए सहयोग करने पर सहमति बनीं.

भारत और तुर्की भावी सहयोग के लिए निम्नलिखित विषयों पर क्रियान्वयन को लेकर सहमत बनीं:-

आपसी हितों की अभिलेखीय सामग्री की पहचान: भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार ने अपने यहाँ 5 दिन की अवधि के लिए तुर्की के राज्य अभिलेखागार के अभिलेखपालों के एक प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी करने पर सहमति व्यक्त की है. यह मेजबानी तुर्की के राज्य अभिलेखागार की रुचि के दस्तावेजों की पहचान करने के लिए की जाएगी. तुर्की के राज्य अभिलेखागार ने भी आपसी रुचि के क्षेत्रों की पहचान के लिए अपने यहाँ उपलब्ध संदर्भ-सामग्री का कैटलॉग उपलब्ध कराने के लिए सहमति दी है. 

भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार में ओटोमन अभिलेखागार-प्रलेखों की प्रदर्शनी: भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार ने 2014 में आपसी सुविधा के समय पर नई दिल्ली में तुर्की के राज्य अभिलेखों की एक हफ्ते की प्रदर्शनी की मेजबानी करने के लिए सहमति दी है. इस बात के लिए भी सहमति व्यक्त की गई कि तुर्की के राज्य अभिलेखागार का एक अग्रिम दल लॉजिस्टिक व्यवस्थाओं के लिए भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार में प्रतिनियुक्त किया जा सकेगा.   

प्रशिक्षण-कार्यक्रमों में सहयोग: भारत का राष्ट्रीय अभिलेखागार एक तकनीकी सहायता कार्यक्रम के जरिये प्रशिक्षण-कार्यक्रमों के विकास में तुर्की के राज्य अभिलेखागार के साथ सहयोग निर्मित करने पर सहमत हुआ. 

प्रलेखों का डिजिटाइजेशन : भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार ने तुर्की के राज्य अभिलेखागार के साथ डिजिटल कॉपीज के आदान-प्रदान में सहयोग के संभावित क्षेत्रों की तलाश करने और इस संबंध में अनुभव बाँटने पर सहमति व्यक्त की. 

ओमान सल्तनत के हामद मोहम्मद अल धावियानी और वी श्रीनिवास के बीच हुई बैठक में ओमान में भारत के राजदूत जेएस मुकुल ने भी सहभागिता की.

दोनों पक्षों ने सहयोग के निम्निलिखित क्षेत्रों की पहचान की है:-

भारत का राष्ट्रीय अभिलेखागार भारतीय पक्ष से एकत्र किए जाने वाले अभिलेखीय दस्तावेजों हेतु उपयुक्त संदर्भ मीडिया तैयार करने के लिए नई दिल्ली में ओमानी अभिलेखपालों के एक प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी करेगा.  

ओमान का राष्ट्रीय प्रलेख और अभिलेख प्राधिकरण नई दिल्ली में ओमानी और ओटोमन अभिलेखीय प्रलेखों की एक प्रदर्शनी आयोजित करने के साथ-साथ एक सेमिनार भी आयोजित करेगा, जिसमें दोनों पक्षों के अरबी विद्वान चर्चाओं में भाग लेंगे.  

दोनों संस्थाओं के बीच प्रशिक्षण-कार्यक्रमों के विकास के लिए एक तकनीकी सहायता कार्यक्रम विकसित किया जाएगा. 

दोनों पक्ष अभिलेखीय प्रलेखों के डिजिटाइजेशन में सहयोग की संभावनाओं का पता लगाएँगे.    

दोनों पक्ष दोनों देशों में अभिलेखीय प्रलेखों के विकास के लिए अभिलेखपालों के आदान-प्रदान पर सहमत हुए. 

भारत का राष्ट्रीय अभिलेखागार भारत में पुर्तगाली इतिहास से जुड़े राज्य अभिलेखागारों और सहायता प्राप्त संस्थानों के साथ अंत:क्रिया में सहायता करेगा.   

राष्ट्रीय प्रलेख और अभिलेख प्राधिकरण में अंतरराष्ट्रीय अभिलेख अनुभाग स्थापित करने के लिए ओमान अभी तक भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार में ऐतिहासिक महत्त्व के 73000 दस्तावेजों तक पैठ बना चुका है. 

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