राष्ट्रीय एकता परिषद की 16वीं बैठक नई दिल्ली में आयोजित करने का निर्णय-(15-SEP-2013) C.A

| Sunday, September 15, 2013
राष्ट्रीय एकता परिषद (एनआइसी) की 16वीं बैठक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित करने का निर्णय लिया गया. यह बैठक 23 सितंबर 2013 को नई दिल्ली में किया जाना है.

राष्ट्रीय एकता परिषद 
राष्ट्रीय एकता परिषद (एनआइसी) का गठन तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू के तहत राष्ट्रीय एकता सम्मेलन के उपरांत वर्ष 1961 में किया गया था. इसका उद्देश्य साम्प्रदायिकता, जातिवाद, क्षेत्रवाद, भाषावाद और संकीर्णता की बुराइयों से निपटना था. एनआइसी की पहली बैठक वर्ष 1962 में हुई थी.  एनआइसी ने वर्ष 1968 में हुई बैठक में विविधता में एकता, धर्मों की आजादी, धर्मनिरपेक्षता, बराबरी, सामाजिक-आर्थिक एवं राजनीतिक न्याय और सभी समुदायों में भाइचारे को अपने उद्देश्य घोषित किए थे.

परिषद इस बात पर बल देती है कि साम्प्रदायिक एवं अन्य विभाजनकारी विवादों के छिटपुट रूप से उभरने के बावजूद अधिसंख्य आम आदमी और औरतें अपने धर्म पर विचार किए बिना शांति और भाईचारे के साथ रहते हैं तथा हिंसा और गड़बड़ी में कोई दिलचस्पी नहीं लेते हैं. परिषद इस बात पर बल देना चाहती है कि यह कार्य अकेले सरकार का नहीं है हालांकि एकता को प्रोत्साहन देने वाली ताकतों को मजबूत करने में और परिषद की सिफारिशों के तेजी से और प्रभावशाली ढंग से कार्यान्वयन में सरकारों को प्रमुख भूमिका निभानी है. यह कार्य सभी नागरिकों-राजनीतिज्ञों, शिक्षाविदों, कलाकारों, लेखकों, शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों, बुद्धिजीवियों, व्यवसायियों और ट्रेड यूनियनों के नेताओं का सामूहिक उत्तरदायित्व है. यह परिषद भाषा, धर्म, नस्ल या संस्कृतियों पर विचार किए बिना राष्ट्रीय एकता और भाइचारे को प्रोत्साहित करने के इस महान और तात्कालिक कार्य से जुड़ने के लिए सभी भारतीयों को आमंत्रित करती है.

राष्ट्रीय एकता परिषद (एनआइसी) की 15वीं बैठक 10 सितंबर 2011 को हुई थी. इस बैठक में 148 सदस्य शामिल हुए थे.  15वीं बैठक का एजेंडा इस प्रकार था:- 
साम्प्रदायिक भाइचारा - साम्प्रदायिकता और साम्प्रदायिक हिंसा पर लगाम कसने के उपाय, साम्प्रदायिक हिंसा विधेयक का दृष्टिोण, साम्प्रदायिक भाइचारे को प्रोत्साहन. 
भेदभाव - खासतौर से अल्पसंख्यकों और अनुसूचित जनजातियों के विरुद्ध, ऐसे भेदभाव के उन्मूलन के उपाय.
नागरिक अशांति - राज्य और पुलिस को नागरिक अशांति से कैसे निपटना चाहिए. 
धर्म एवं जाति के नाम पर युवाओं को उग्र करना - ऐसे उग्रवाद से कैसे निपटा जाए.




0 comments:

Post a Comment