भारत और जापान के मध्य संयुक्त अनुसंधान प्रयासों के लिए सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए-(15-SEP-2013) C.A

| Sunday, September 15, 2013
भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा जैव-प्रौद्योगिकी विभाग और जापान के रिकेन ने संयुक्त अनुसंधान प्रयासों के लिए सहमति ज्ञापन पर 14 सितंबर 2013 को हस्ताक्षर किए. 

इस सहमति के अनुसार जैव प्रौद्योगिकी, जीवन विज्ञान और पदार्थ विज्ञान (सिस्टम बायोलॉजी सहित जीनोम संबंधी अनुसंधान, सुरक्षा एवं आपसी हित के अन्य क्षेत्रों के लिए बायोइन्फोर्मेटिक्स औजारों, डिटेक्शन औजारों (अर्थात स्पेक्टोस्कोपी) के विकास सहित कंप्यूटेशनल विज्ञान) के क्षेत्र में संयुक्त रूप से अनुसंधान किया जाएगा.

सहमति ज्ञापन पर रिकेन के अध्यक्ष प्रोफेसर नोयोरी और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सचिव डॉ. टी. रामासामी और जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के सचिव डॉ. के. विजय राघवन ने हस्ताक्षर किए. इसे औपचारिक रूप से रिकेन-डीबीटी एवं डीएसटी संयुक्त अनुसंधान गतिविधियों के रूप में प्रारंभ किया जाएगा.

इस अवसर पर भारत में जापान के राजदूत श्री ताकेशी यागी ने कहा कि दोनों प्रमुख एशियाई देशों के बीच जीवविज्ञान, जीवन विज्ञान और पदार्थ विज्ञान के क्षेत्र में आपसी सहयोग महत्वपूर्ण घटना है और इसे अधिक मजबूत बनाया जाना चाहिए.

लाभ 
दोनों देशों के बीच इस सहयोग से इन क्षेत्रों में आदान-प्रदान सुगम होगा और इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा. इस सहमति से भारत में कृषि एवं फार्मास्यूटिकल उद्योगों के लिए नवाचारों और तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग के नए युग की शुरुआत होगी. इससे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के महत्व को मान्यता मिलेगी और नए आविष्कार के मार्ग खुलेंगे.
भारत और जापान के बीच सहयोग का लंबा इतिहास है और दोनों एशियाई अनुसंधान एवं नवाचार के मामले में अग्रणी स्थान रखते हैं.




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