8 अक्टूबर 2016 वायुसेना दिवस है. भारतीय वायुसेना ने अपनी 84 वीं वर्षगांठ मनायी. भारतीय वायुसेना दिवस पर गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर परेड के साथ साथ लड़ाकू विमान, ट्रांसपोर्ट विमान और हेलीकॉप्टर ने फ्लाइ पास्ट में भाग लिया. कार्यक्रम में पहली बार फ्लाई-पास्ट में स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस भी शामिल होगा.
भारतीय वायुसेना का कार्यक्रम-
भारतीय वायुसेना का कार्यक्रम-
- वायुसेना दिवस पर भारतीय वायुसेना के कार्यक्रम का शुभारम्भ आकाश गंगा टीम के स्काई ड्राइवर द्वारा तिरंगे की रंगों वाला पैराशूट के साथ की गयी. इसे लेकर स्काई ड्राइवर आसमान में उड़ते दिखायी दिए.
- लड़ाकू विमानों ने करतब दिखाए. फ्लाई पास्ट में सुखोई और तेजस के अलावा मिराज, जगुआर और मिग लड़ाकू विमान ने भी आसमान में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया. दुनिया का सबसे बड़ा और शक्तिशाली मिलेट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, सी-17 ग्लोबमास्टर और एवक्स विमान और हेलीकॉप्टर की ताकत भी कार्यक्रम में शामिल हुआ.
- कार्यक्रम में सेना के तीनों प्रमुखों समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही अन्य देशों के सेना प्रमुख भी शामिल होते हैं.
- क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर भारतीय वायुसेना में मानद ग्रुप कैप्टन हैं.
- सचिन को यह सम्मान 2010 में दिया गया.
भारतीय वायु सेना के बारे में प्रमुख तथ्य-
- भारतीय वायु सेना की स्थापना आठ अक्टूबर 1932 को हुई. वर्तमान में यह दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायुसेना है.
- इससे ऊपर चीन की वायुसेना है.
- भारतीय वायु सेना का ध्येय वाक्य 'नभ: स्पृशं दीप्तम, यानी गर्व के साथ आकाश को छूना है.
- नीला, आसमानी नीला और सफेद इसके रंग हैं.
- एविएशन से जुड़ी मुख्य वेबसाइट फ्लाइट ग्लोबल ने दिसंबर 2015 में भारतीय वायु सेना को चौथी सबसे ताकतवर वायुसेना बताया.
- इस सूची में पाकिस्तान की एयर फोर्स का नाम नहीं है.
- भारतीय वायु सेना के पास 3 बीराइव, ए-50 फॉल्कन, एईडब्ल्यू एंड सी (एयरबॉर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल) एयरक्राफ्ट, 700 कॉम्बेट जेट्स, सात मिड एयर रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट्स, टैंकर एयरक्राफ्ट्स, 133 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट्स, 158 ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट्स, 155 यूटिलिटी हेलीकॉप्टर्स और करीब 200 यूएवीज हैं.
- सुखोई 30एमकेआई भारतीय वायु सेना का प्राइमरी फाइटर जेट है. इस फाइटर जेट को यूरोफाइटर टायफून, डसॉल्ट राफेल और अमेरिका के बेस्ट एफ सीरिज के फाइटर जेट्स के साथ रखा जाता है.
- सितंबर 2009 में भारतीय वायु सेना ने विशेष ऑपरेशनल यूनिट गरुड़ कमांडो की स्थापना की. जिसे आज गरुड़ कमांडो फोर्स के नाम से जाना जाता है.
- 1500 पर्सनल वाली गरुड़ कमांडो फोर्स दुश्मनों के द्वारा छुपा कर रखे गए हथियारों की खोज, रेस्क्यू ऑपरेशन में अग्रिम मोर्चे पर काम करना, दुश्मनों के मिसाइल और रडार पर नजर रखना जैसे कामों को अंजाम देती है.
पृष्ठभूमि-
- चार बायप्लेन और सिर्फ पांच पायलट्स के साथ आरम्भ हुआ वायुसेना का सफर 1,70,000 पर्सनल तक जा पहुंचा है.
- उस समय आईएएफ ब्रिटेन की रॉयल एयर फोर्स के सहायक के तौर पर तैयार की गयी थी.
- भारतीय वायु सेना एक्ट 1932 के तहत इसे रॉयल एयर फोर्स के साथ जोड़ा गया था. यहां से रॉयल एयर फोर्स की यूनिफॉर्म और बाकी चीजों को अपनाया गया.
- भारतीय वायु सेना के वर्ष 1932 में अस्तित्व में आने के बाद एक अप्रैल 1933 को आईएएफ की पहली स्क्वाड्रन नंबर वन तैयार हुई. इस स्क्वाड्रन में चार बायप्लेन और सिर्फ पांच पायलट्स थे.
- उस समय आईएएफ के पायलट्स को रॉयल एयरफोर्स के कमांडिंग ऑफिसर फ्लाइट लेफ्टिनेंट सेसिल बाशियर लीड कर रहे थे.
- वर्ष 1945 में सेकेंड वर्ल्ड वॉर में इसके योगदान की वजह से इसके साथ 'रॉयल' शब्द जोड़ा गया.
- पहले कमांडर इन चीफ एयर मार्शल सर थॉमस वाकर इल्महर्स्ट इंडियन एयर फोर्स के पहले कमांडर-इन-चीफ थे.
- 15 अगस्त 1947 से लेकर 21 फरवरी 1950 तक उनका कार्यकाल रहा.
- पहले प्रमुख एयर मार्शल सुब्रतो मुखर्जी इंडियन एयर फोर्स के पहले भारतीय चीफ थे.
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