फिल्म अभिनेता और निर्देशक मनोज कुमार को वर्ष 2015 के दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किये जाने की घोषणा 4 मार्च 2016 को की गई.
इस वर्ष की पांच सदस्यीय जूरी में शामिल लता मंगेशकर, आशा भोसले, सलीम खान, नितिन मुकेश और अनूप जलोटा ने सर्वसम्मति से मनोज कुमार को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार देने की सिफारिश की.
दादा साहेब फाल्के पुरस्कार पाने वाले मनोज कुमार 47वें अभिनेता हैं. वर्ष 2014 में यह सम्मान शशि कपूर को दिया गया.
मनोज कुमार के बारे में
• मनोज कुमार का जन्म जुलाई 1937 में अविभाजित भारत के एबटाबाद में हुआ था. दिल्ली के हिन्दू कॉलेज से स्नातक होने के बाद उन्होंने फिल्मों में प्रवेश करने का निर्णय लिया.
• मनोज कुमार एक जाने-माने कलाकार और निर्देशक रहे हैं. उनकी फिल्म ‘हरियाली और रास्ता’, ‘वो कौन थी’,’हिमालय की गोद में’, ‘दो बदन’, ‘उपकार’, ‘पत्थमर के सनम’, ‘नील कमल’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’ और ‘क्रांति’ जैसी फिल्मों के लिए याद किया जाता है.
• ‘उपकार’ फिल्म के लिए मनोज कुमार को राष्ट्री्य फिल्म पुरस्कार प्रदान किया गया था. भारत सरकार ने 1992 में उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया था.
• उन्होंने देशभक्ति की विषय वस्तु वाली फिल्मों में काम करने और निर्देशित करने के लिए भी प्रसिद्धि प्राप्त की.
• वर्ष 1960 में उन्हें ‘कांच की गुडि़या’ नामक फिल्म में पहली बार शीर्ष भूमिका निभाने का मौका मिला.
• उनकी ‘दो बदन’ नामक फिल्म को राज खोसला के निर्देशन, मनोज कुमार के अभिनय और रवि के संगीत तथा शकील बंदायूनी के अमर गीतों के लिए याद किया जाता है.
• 1965 में शहीद फिल्म से उनकी देशभक्ति के हीरो की छवि बनी.
• 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने उन्हें जय जवान, जय किसान नामक नारे पर आधारित फिल्मे बनाने के लिए कहा. इस पर उन्होंने ‘उपकार’ नाम से यादगार फिल्म बनाई.
• इससे पहले दिलीप कुमार, शशि कपूर, ए.गोपाल कृष्णन, सोमित्र चटर्जी, सत्यजीत रे, मृणाल सेन जैसी हस्तियों को भी दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से नवाजा जा चुका है.
• मनोज कुमार का जन्म जुलाई 1937 में अविभाजित भारत के एबटाबाद में हुआ था. दिल्ली के हिन्दू कॉलेज से स्नातक होने के बाद उन्होंने फिल्मों में प्रवेश करने का निर्णय लिया.
• मनोज कुमार एक जाने-माने कलाकार और निर्देशक रहे हैं. उनकी फिल्म ‘हरियाली और रास्ता’, ‘वो कौन थी’,’हिमालय की गोद में’, ‘दो बदन’, ‘उपकार’, ‘पत्थमर के सनम’, ‘नील कमल’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’ और ‘क्रांति’ जैसी फिल्मों के लिए याद किया जाता है.
• ‘उपकार’ फिल्म के लिए मनोज कुमार को राष्ट्री्य फिल्म पुरस्कार प्रदान किया गया था. भारत सरकार ने 1992 में उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया था.
• उन्होंने देशभक्ति की विषय वस्तु वाली फिल्मों में काम करने और निर्देशित करने के लिए भी प्रसिद्धि प्राप्त की.
• वर्ष 1960 में उन्हें ‘कांच की गुडि़या’ नामक फिल्म में पहली बार शीर्ष भूमिका निभाने का मौका मिला.
• उनकी ‘दो बदन’ नामक फिल्म को राज खोसला के निर्देशन, मनोज कुमार के अभिनय और रवि के संगीत तथा शकील बंदायूनी के अमर गीतों के लिए याद किया जाता है.
• 1965 में शहीद फिल्म से उनकी देशभक्ति के हीरो की छवि बनी.
• 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने उन्हें जय जवान, जय किसान नामक नारे पर आधारित फिल्मे बनाने के लिए कहा. इस पर उन्होंने ‘उपकार’ नाम से यादगार फिल्म बनाई.
• इससे पहले दिलीप कुमार, शशि कपूर, ए.गोपाल कृष्णन, सोमित्र चटर्जी, सत्यजीत रे, मृणाल सेन जैसी हस्तियों को भी दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से नवाजा जा चुका है.
दादा साहेब फाल्के पुरस्कार
इस पुरस्कार का प्रारंम्भ दादा साहेब फाल्के के जन्म शताब्दी वर्ष 1969 से हुआ. दादा साहेब फाल्के पुरस्कार सूचना प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए दिया जाने वाला एक वार्षिक पुरस्कार है.
इस पुरस्कार का प्रारंम्भ दादा साहेब फाल्के के जन्म शताब्दी वर्ष 1969 से हुआ. दादा साहेब फाल्के पुरस्कार सूचना प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए दिया जाने वाला एक वार्षिक पुरस्कार है.
सरकार द्वारा यह पुरस्कार इस उद्देश्य के लिए गठित प्रख्यात हस्तियों की समिति की सिफारिशों के आधार पर दिया जाता है. पुरस्कार के तहत एक स्वर्ण कमल, 10 लाख रुपये का नकद राशि और एक शॉल प्रदान किया जाता है. वर्ष 2012 का दादा साहेब फाल्के पुरस्कार अभिनेता प्राण व वर्ष 2013 का दादा साहेब फाल्के पुरस्कार गीतकार गुलजार को दिया गया.
0 comments:
Post a Comment