फ़्रांस के शोधकर्ताओं द्वारा फरवरी 2016 में किये गये एक अध्ययन में पाया कि मच्छर जनित ज़िका से मस्तिष्क सम्बन्धी विकार गुइलैन बार्र सिंड्रोम (जीबीएस) नामक विकार उत्पन्न हो सकता है.
यह एक विपरीत परिस्थिति है जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली मस्तिष्क को आघात पहुंचाती है तथा इससे टांगों व बाजू में दिक्कत हो सकती है. यह समस्या चिकनगुनिया एवं डेंगू के दौरान भी हो सकती है क्योंकि इन सभी रोगों में एडिस मच्छर द्वारा काटे जाने पर ही समस्या उत्पन्न होती है.
यह एक विपरीत परिस्थिति है जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली मस्तिष्क को आघात पहुंचाती है तथा इससे टांगों व बाजू में दिक्कत हो सकती है. यह समस्या चिकनगुनिया एवं डेंगू के दौरान भी हो सकती है क्योंकि इन सभी रोगों में एडिस मच्छर द्वारा काटे जाने पर ही समस्या उत्पन्न होती है.
प्रमुख बिंदु
• यह अध्ययन ज़िका वायरस से पीड़ित रह चुके 42 लोगों के रक्त का नमूना लेकर किया गया.
• यह पाया गया कि ज़िका वायरस के संपर्क में आने के छह दिन बाद पीड़ित व्यक्ति के मस्तिष्क में इसका प्रभाव दिखना आरंभ हो जाता है.
• ज़िका वायरस द्वारा गुइलैन बार्र बनने के जैविक तंत्र की खोज की जानी अभी बाकी है.
इससे पहले फरवरी 2016 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने ज़िका वायरस एवं गुइलैन बार्र सिंड्रोम के चलते लैटिन अमेरिका में आपातकाल घोषित किया. यह पाया गया कि ज़िका वायरस के फैलने पर जीबीएस की संख्या में 20 गुना बढ़ोतरी दर्ज की गयी.
• यह पाया गया कि ज़िका वायरस के संपर्क में आने के छह दिन बाद पीड़ित व्यक्ति के मस्तिष्क में इसका प्रभाव दिखना आरंभ हो जाता है.
• ज़िका वायरस द्वारा गुइलैन बार्र बनने के जैविक तंत्र की खोज की जानी अभी बाकी है.
इससे पहले फरवरी 2016 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने ज़िका वायरस एवं गुइलैन बार्र सिंड्रोम के चलते लैटिन अमेरिका में आपातकाल घोषित किया. यह पाया गया कि ज़िका वायरस के फैलने पर जीबीएस की संख्या में 20 गुना बढ़ोतरी दर्ज की गयी.
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