केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने 1 फरवरी 2016 को हॉस्पिटल सर्विसेज कंसल्टेंसी कारपोरेशन लिमिटेड (एचएससीसी) को मिनिरत्न श्रेणी-I प्रदान की. यह उपाधि इसके सीएमडी ज्ञानेश पांडे को निर्माण भवन, नई दिल्ली में प्रदान की गयी.
इसे उत्कृष्ट प्रदर्शन में निरंतरता एवं पिछले पांच वर्ष में अर्जित किये गये लाभ के कारण यह उपाधि प्रदान की गयी. इसका चयन भारी उद्योग और सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय के तहत सार्वजनिक उद्यम विभाग द्वारा किया जाता है.
एचएससीसी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित सार्वजानिक उपक्रम है. लगातार लाभ कमाने के कारण इसे वर्ष 2002 में मिनिरत्न श्रेणी-II प्रदान की गयी थी.
इसे उत्कृष्ट प्रदर्शन में निरंतरता एवं पिछले पांच वर्ष में अर्जित किये गये लाभ के कारण यह उपाधि प्रदान की गयी. इसका चयन भारी उद्योग और सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय के तहत सार्वजनिक उद्यम विभाग द्वारा किया जाता है.
एचएससीसी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित सार्वजानिक उपक्रम है. लगातार लाभ कमाने के कारण इसे वर्ष 2002 में मिनिरत्न श्रेणी-II प्रदान की गयी थी.
मिनिरत्न श्रेणी
जिन उद्यमों ने पिछले तीन वर्षों में लगातार लाभ अर्जित किया हो एवं उनके पास अगले वित्तीय वर्षों के लिए प्रचुर धनराशि मौजूद हो वे मिनिरत्न श्रेणी के लिए आवेदन कर सकते हैं.
यह दो श्रेणियों में विभक्त है – श्रेणी I एवं II.
मिनिरत्न श्रेणी-I
आवेदन करने वाले उद्यम ने लगातार तीन वर्ष तक लाभ अर्जित किया हो अथवा पिछले तीन वर्षों में एक वर्ष 30 करोड़ रुपये का लाभ कमाया हो.
यह कंपनी अपने कुल मूल्य तक अथवा 500 करोड़ रुपये मूल्य तक निवेश कर सकते हैं जिसके लिए किसी सरकारी अनुमति की आश्यकता नहीं है.
जिन उद्यमों ने पिछले तीन वर्षों में लगातार लाभ अर्जित किया हो एवं उनके पास अगले वित्तीय वर्षों के लिए प्रचुर धनराशि मौजूद हो वे मिनिरत्न श्रेणी के लिए आवेदन कर सकते हैं.
यह दो श्रेणियों में विभक्त है – श्रेणी I एवं II.
मिनिरत्न श्रेणी-I
आवेदन करने वाले उद्यम ने लगातार तीन वर्ष तक लाभ अर्जित किया हो अथवा पिछले तीन वर्षों में एक वर्ष 30 करोड़ रुपये का लाभ कमाया हो.
यह कंपनी अपने कुल मूल्य तक अथवा 500 करोड़ रुपये मूल्य तक निवेश कर सकते हैं जिसके लिए किसी सरकारी अनुमति की आश्यकता नहीं है.
मिनिरत्न श्रेणी-II
कंपनी ने लगातार तीन वर्षों तक लाभ अर्जित किया हो एवं उसके पास प्रचुर धनराशि मौजूद हो.
यह कंपनी 300 करोड़ रूपये अथवा अपने कुल मूल्य के 50 प्रतिशत के बराबर बिना सरकारी अनुमति के निवेश कर सकती है.
कंपनी ने लगातार तीन वर्षों तक लाभ अर्जित किया हो एवं उसके पास प्रचुर धनराशि मौजूद हो.
यह कंपनी 300 करोड़ रूपये अथवा अपने कुल मूल्य के 50 प्रतिशत के बराबर बिना सरकारी अनुमति के निवेश कर सकती है.
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