केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफ) ने 3 फरवरी 2016 को उत्तराखंड में जंगली सुअर को एक वर्ष के लिए हिंसक पशु घोषित कर दिया.
वाइल्ड लाइफ (सुरक्षा) एक्ट,1972 की धारा 62 के तहत केंद्र सरकार के पास यह शक्ति निहित है. इसी के तहत जंगली सुअर (सस स्क्रोफा) को हिंसक पशु घोषित किया गया.
इस दौरान उत्तराखंड के 13 जिलों (79 में से 71 उप क्षेत्र) में पशुओं को हिंसक बताया गया.
वाइल्ड लाइफ (सुरक्षा) एक्ट,1972 की धारा 62 के तहत केंद्र सरकार के पास यह शक्ति निहित है. इसी के तहत जंगली सुअर (सस स्क्रोफा) को हिंसक पशु घोषित किया गया.
इस दौरान उत्तराखंड के 13 जिलों (79 में से 71 उप क्षेत्र) में पशुओं को हिंसक बताया गया.
हिंसक पशु श्रेणी
• इसके द्वारा राज्य के अधिकारियों को वन्य जीव प्रावधानों के तहत अधिसूचित जानवरों को मारने की अनुमति होगी.
• वन्य जीव अधिकारी, पुलिस अथवा अन्य अधिकारिक व्यक्ति जिसे लाइसेंस रिवाल्वर दिया गया है, वे जानवर को मार सकते हैं.
• वन विभाग हथियार अथवा गोलियां खरीदने के लिए 50 प्रतिशत फण्ड मुहैया कराएगा. बाकी का 50 प्रतिशत भाग उपयोगकर्ता द्वारा सुअर को मारे जाने का वीडियो सबूत दिखाए जाने पर दिया जायेगा.
• मारे गये सुअर को वन्यजीव प्रावधानों के तहत जला दिया जायेगा. इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी वन विभाग को सौंपी जाएगी.
पृष्ठभूमि
उत्तराखंड सरकार ने बड़े पैमाने पर सुअर द्वारा कृषि, वन एवं जनजीवन को हानि पहुंचाए जाने के बाद यह कदम उठाया. वन विभाग ने जुलाई 2015 में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को जंगली सुअर एवं नील गाय को हिंसक पशु घोषित करने के लिए अनुरोध किया था. लेकिन मंत्रालय ने केवल जंगली सुअर को हिंसक घोषित किये जाने की अनुमति प्रदान की.
• इसके द्वारा राज्य के अधिकारियों को वन्य जीव प्रावधानों के तहत अधिसूचित जानवरों को मारने की अनुमति होगी.
• वन्य जीव अधिकारी, पुलिस अथवा अन्य अधिकारिक व्यक्ति जिसे लाइसेंस रिवाल्वर दिया गया है, वे जानवर को मार सकते हैं.
• वन विभाग हथियार अथवा गोलियां खरीदने के लिए 50 प्रतिशत फण्ड मुहैया कराएगा. बाकी का 50 प्रतिशत भाग उपयोगकर्ता द्वारा सुअर को मारे जाने का वीडियो सबूत दिखाए जाने पर दिया जायेगा.
• मारे गये सुअर को वन्यजीव प्रावधानों के तहत जला दिया जायेगा. इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी वन विभाग को सौंपी जाएगी.
पृष्ठभूमि
उत्तराखंड सरकार ने बड़े पैमाने पर सुअर द्वारा कृषि, वन एवं जनजीवन को हानि पहुंचाए जाने के बाद यह कदम उठाया. वन विभाग ने जुलाई 2015 में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को जंगली सुअर एवं नील गाय को हिंसक पशु घोषित करने के लिए अनुरोध किया था. लेकिन मंत्रालय ने केवल जंगली सुअर को हिंसक घोषित किये जाने की अनुमति प्रदान की.
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