केंद्र सरकार ने 1 सितंबर 2015 को कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस-95) में योगदान स्वरुप वर्ष 2015-16 के लिए 2000 करोड़ रूपए जारी किये.
इसके अतिरिक्त 250 करोड़ रूपए की सहायता राशि भी दी गयी ताकि ईपीएस-95 के सभी उपभोक्ताओं को 1000 रूपए की पेंशन दी जा सके.
यह अतिरिक्त सहायता राशि इसलिए भी आवश्यक थी क्योंकि केंद्र सरकार ने सितंबर 2015 में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) को यह निर्देश दिया कि वह प्रत्येक पेंशन प्राप्तकर्ता को न्यूनतम 1000 रूपए की पेंशन दे.
कर्मचारी पेंशन योजना
यह योजना 16 नवम्बर 1995 को प्रभाव में आयी तथा इसे कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम,1952 के तहत आरंभ किया गया.
यह उन सभी फैक्टरियों तथा संस्थानों पर लागू होती है जिन पर कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम,1952 लागू होता है.
केंद्र सरकार तथा नियोक्ता 1.16 प्रतिशत योगदान देते हैं जबकि सदस्य की मासिक आय का 8.33 प्रतिशत इसमें शामिल होता है.
इसके अतिरिक्त 250 करोड़ रूपए की सहायता राशि भी दी गयी ताकि ईपीएस-95 के सभी उपभोक्ताओं को 1000 रूपए की पेंशन दी जा सके.
यह अतिरिक्त सहायता राशि इसलिए भी आवश्यक थी क्योंकि केंद्र सरकार ने सितंबर 2015 में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) को यह निर्देश दिया कि वह प्रत्येक पेंशन प्राप्तकर्ता को न्यूनतम 1000 रूपए की पेंशन दे.
कर्मचारी पेंशन योजना
यह योजना 16 नवम्बर 1995 को प्रभाव में आयी तथा इसे कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम,1952 के तहत आरंभ किया गया.
यह उन सभी फैक्टरियों तथा संस्थानों पर लागू होती है जिन पर कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम,1952 लागू होता है.
केंद्र सरकार तथा नियोक्ता 1.16 प्रतिशत योगदान देते हैं जबकि सदस्य की मासिक आय का 8.33 प्रतिशत इसमें शामिल होता है.
इस योजना के अनुसार, सेवानिवृत्ति, विकलांगता, उत्तरजीवी, विधवावस्था अथवा उत्तराधिकारी को पेंशन दी जाती है. पेंशन की राशि कर्मचारी की मासिक आय पर निर्भर है.
यह विकलांगता पर न्यूनतम पेंशन प्रदान करता है तथा यह तत्कालीन पारिवारिक पेंशन योजना, 1971 के प्रतिभागियों को पिछले सेवा लाभ भी प्रदान करता है.
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