दिल्ली उच्च न्यायलय (एचसी) ने 03 सितम्बर 2015 को संघ सरकार को निर्देश दिया कि सभी अर्द्ध-सैनिक बलों के वर्ग-क अधिकारियों को संगठित सेवाओं के (अधिकारियों के) तौर पर समझा जाए.
यह निर्देश न्यायधीश कैलाश गंभीर और न्यायधीश नजमी वजीरी की खंडपीठ द्वारा सेवारत और सेवानिवृत्त अधिकारियों द्वारा दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दिया गया.
इस निर्णय से केन्द्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) के केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) आदि सहित विभिन्न अर्द्ध-सैनिक बलों से सम्बंधित लगभग 10000 अधिकारियों को लाभ होगा.
संगठित वर्ग क अधिकारियों का हिस्सा होने के नाते, वर्ष 2006 से गैर-कार्यात्मक उन्नयन (एनएफयू) जैसे वित्तीय लाभों सहित वे कई अतिरिक्त लाभ प्राप्त करने के हकदार होंगे
इस निर्णय से केन्द्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) के केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) आदि सहित विभिन्न अर्द्ध-सैनिक बलों से सम्बंधित लगभग 10000 अधिकारियों को लाभ होगा.
संगठित वर्ग क अधिकारियों का हिस्सा होने के नाते, वर्ष 2006 से गैर-कार्यात्मक उन्नयन (एनएफयू) जैसे वित्तीय लाभों सहित वे कई अतिरिक्त लाभ प्राप्त करने के हकदार होंगे
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