इज़रायल सरकार ने 14 जून 2015 को उन कैदियों को जबरन खाना खिलाने के बिल को मंजूरी दी जिनका जीवन भूख
हड़ताल के कारण खतरे में है. विधेयक का नाम “भूख हड़ताल के
कारण हानि रोकने के लिए कानून” है.
इस प्रस्ताव को कानून बनने से पहले इजराइली पार्लियामेंट नेसेट में प्रस्तुत किया जायेगा.
इस प्रस्ताव को कानून बनने से पहले इजराइली पार्लियामेंट नेसेट में प्रस्तुत किया जायेगा.
इज़रायल मेडिकल एसोसिएशन ने इस बिल का विरोध किया है तथा स्थानीय डॉक्टरों से आग्रह किया है कि इसके अस्तित्व में आने के बाद जबरन खिलाने में शामिल न हों. एसोसिएशन ने इसे यातना का ही एक रूप माना है.
वर्तमान इज़रायली कानून के तहत किसी भी मरीज की मर्ज़ी के खिलाफ उसका इलाज नहीं किया जा सकता लेकिन कोई नैतिक समिति इस मामले में भाग ले सकती है.
पृष्ठभूमि
यह प्रस्ताव जून 2014 में उस समय मंजूर किया गया था जब फिलीस्तीनी कैदियों की बड़े पैमाने पर भूख हड़ताल कर दी थी तथा इसमें 80 कैदियों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था. इस पर विचार-विमर्श शुरू होने से पूर्व ही नेसेट भंग हो गयी तथा इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका.
इज़रायल की जेलों में भूख हड़ताल करने वाले कैदियों में अधिकतर फिलीस्तीनी हैं जिसमें उन्हें बिना किसी जुर्म के कैद में रखा गया है. इज़रायल के अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में 5000 फिलीस्तीनी कैदियों को जेलों में रखा गया है जिसमें से 4 कैदियों ने कुछ भी खाने से मना कर दिया है.
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