केयर्न इंडिया एवं वेदांता के निदेशक मंडल ने 14 जून 2015 को दोनों कंपनियों के विलय को मंजूरी
प्रदान की. दोनों कंपनियों की मुंबई में हुई बोर्ड की
बैठक में इस आशय से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी गई.
उद्योगपति अनिल अग्रवाल के समूह ने कर्ज में कटौती के मकसद से नकदी संपन्न केयर्न इंडिया के विलय को स्वीकार किया. शेयर अदला-बदली के जरिये 2.3 अरब अमेरिकी डॉलर के इस सौदे से देश की सबसे बड़ी विविध प्राकृतिक संसाधनों वाली कंपनी अस्तित्व में आएगी. देश की सबसे बड़ी निजी तेल उत्पादक कंपनी केयर्न इंडिया के शेयरधारकों को एक शेयर पर एक अतिरिक्त शेयर का लाभ मिलेगा. साथ ही 10 रुपये के अंकित मूल्य वाला वेदांता का 7.5 फीसद रीडीमेबल प्रिफरेंस शेयर भी मिलेगा.
विदित हो कि वेदांता पर 77,752 करोड़ रुपये का कर्ज है. इसके उलट केयर्न इंडिया के पास 16,867 करोड़ रुपये की नकदी है. विलय के बाद लंदन में सूचीबद्ध मूल कंपनी वेदांत रिसोर्सेज पीएलसी की वेदांत लिमिटेड में होल्डिंग 62.9 फीसद से घटकर 50.1 फीसद हो जाएगी. वेदांता के सीईओ टॉम अलबनीज ने कहा कि यह कॉरपोरेट स्ट्रक्चर को आसान बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है. वेदांता को पहले ‘सेसा स्टरलाइट’ के नाम से जाना जाता था.
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