एक अध्ययन के अनुसार चीन में प्रवासी पक्षियों के अवैध शिकार के कारण
उनके विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है. इस अध्ययन का शीर्षक है ग्लोबल कोलेप्स इन ए
सुपरबनडेंट माइग्रेटरी बर्ड एंड इल्लीगल ट्रैपिंग इन चाइना.
अध्ययन के अनुसार वर्ष 1980 से लेकर अब तक सॉंगबर्ड येलो ब्रेस्टेड बन्टिंग पक्षी की संख्या में 90 प्रतिशत की कमी आ चुकी है.
यह अध्ययन जीव विज्ञान संरक्षण के लिए जारी पत्रिका कंज़रवेशन बायोलॉजी में प्रकाशित किया गया. अध्ययन के अनुसार पक्षियों की संख्या में वर्ष 1980 से 2013 के बीच भारी गिरावट दर्ज की गयी. पक्षियों का प्रतिशत पहले 94.7 था जो अब घटकर 84.3 हो गया.
अध्ययन के अनुसार वर्ष 1980 से लेकर अब तक सॉंगबर्ड येलो ब्रेस्टेड बन्टिंग पक्षी की संख्या में 90 प्रतिशत की कमी आ चुकी है.
यह अध्ययन जीव विज्ञान संरक्षण के लिए जारी पत्रिका कंज़रवेशन बायोलॉजी में प्रकाशित किया गया. अध्ययन के अनुसार पक्षियों की संख्या में वर्ष 1980 से 2013 के बीच भारी गिरावट दर्ज की गयी. पक्षियों का प्रतिशत पहले 94.7 था जो अब घटकर 84.3 हो गया.
शोधकर्ताओं के अनुसार जनसंख्या में गिरावट का कारण चीनी लोगों द्वारा इन पक्षियों का भोजन के लिए शिकार किया जाना है. नतीजतन अब यह पक्षी विलुप्त होने के कगार पर हैं.
प्रत्येक वर्ष इन पक्षियों का लाखों की संख्या में शिकार किया जाता है जिसके कारण इनकी जनसंख्या में भारी गिरावट आई है. इसे राइस बर्ड भी कहा जाता है. वर्ष 1997 में इन पक्षियों के शिकार पर सरकार ने रोक लगा दी थी.
येलो ब्रेस्टेड बन्टिंग
यह एम्बेरिज़ा औरिओला प्रजाति के पक्षियों की श्रेणी में आते हैं.
इनका प्रजनन फ़िनलैंड, बेलारूस, पश्चिमी यूक्रेन, जापान, कजाखस्तान, चीन और मंगोलिया में पाया जाता है. इसकी सबसे अधिक संख्या साइबेरिया में पायी जाती है लेकिन 1990 के आरंभ से इसकी संख्या में गिरावट देखी गयी है.
वर्ष 2004 में प्रकृति संरक्षण अंतर्राष्ट्रीय संघ (आईयूसीएन) ने इसे सबसे कम ध्यान दिए जाने वाले पक्षी के रूप में दर्ज किया. वर्ष 2004 में इसे चिंताजनक पक्षी का दर्जा दिया गया किन्तु अगली सूची में इसे लुप्तप्राय पक्षी की श्रेणी में रखा गया.
वर्ष 2012 तथा 2013 में किये गए सर्वेक्षणों के अनुसार यह पक्षी साइबेरिया के त्युमेन प्रांत से पूरी तरह विलुप्त पाया गया.
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