केंद्रीय मंत्रिमण्डल ने
भूमि अधिग्रहण अध्यादेश पुनः जारी करने की सिफारिश की. यह निर्णय प्रधानमंत्री
नरेन्द्र् मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में 31 मार्च 2015 को लिया गया. इस अध्या्देश में वे नौ
संशोधन शामिल किये गए हैं जो मार्च 2015 में लोक सभा में
पारित विधेयक का हिस्सा थे. पहले से जारी अध्यादेश की अवधि 5 अप्रैल 2015 तक है.
इसके बाद अब मंत्रिमण्डल
की सिफारिश राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पास स्वीकृति के लिए भेजी जाएगी जिससे यह
अध्यादेश लागू हो सके.
संसदीय मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने 27 मार्च 2015 को राज्यसभा के मौजूदा सत्र का सत्रावसान करने की सिफारिश की. राष्ट्रपति ने संसदीय मामलों से सम्बद्ध मंत्रिमण्डल की समिति की सिफारिश पर 28 मार्च 2015 को सदन का सत्रावसान कर दिया था.
संविधान के अनुसार कोई अध्यादेश जारी करने के लिए संसद के कम से कम एक सदन का सत्रावसान जरूरी है.
संसद का बजट सत्र 23 फरवरी 2015 को शुरू हुआ था और अब संसद में एक महीने का अवकाश चल रहा है.
यह अध्यादेश जारी होने पर मोदी सरकार द्वारा जारी किया जाने वाला 11वां अध्यादेश होगा.
विदित हो कि भूमि अर्जन, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता अधिकार (संशोधन) विधेयक लोकसभा में पारित हो चुका है. जबकि यह विधेयक राज्यसभा में विचाराधीन है जहां सरकार अल्पमत में है.
दिसंबर 2014 में जारी अध्यादेश के स्थान पर इस विधेयक को लाया गया था. अध्यादेश के प्रभावी बने रहने के लिए इसे 5 अप्रैल 2015 तक संसद की मंजूरी आवश्यक थी.
संसदीय मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने 27 मार्च 2015 को राज्यसभा के मौजूदा सत्र का सत्रावसान करने की सिफारिश की. राष्ट्रपति ने संसदीय मामलों से सम्बद्ध मंत्रिमण्डल की समिति की सिफारिश पर 28 मार्च 2015 को सदन का सत्रावसान कर दिया था.
संविधान के अनुसार कोई अध्यादेश जारी करने के लिए संसद के कम से कम एक सदन का सत्रावसान जरूरी है.
संसद का बजट सत्र 23 फरवरी 2015 को शुरू हुआ था और अब संसद में एक महीने का अवकाश चल रहा है.
यह अध्यादेश जारी होने पर मोदी सरकार द्वारा जारी किया जाने वाला 11वां अध्यादेश होगा.
विदित हो कि भूमि अर्जन, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता अधिकार (संशोधन) विधेयक लोकसभा में पारित हो चुका है. जबकि यह विधेयक राज्यसभा में विचाराधीन है जहां सरकार अल्पमत में है.
दिसंबर 2014 में जारी अध्यादेश के स्थान पर इस विधेयक को लाया गया था. अध्यादेश के प्रभावी बने रहने के लिए इसे 5 अप्रैल 2015 तक संसद की मंजूरी आवश्यक थी.
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