महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और वयोवृद्ध कांग्रेसी नेता अब्दुल
रहमान अंतुले का गुर्दे की गंभीर बीमारी के बाद 02 दिसंबर 2014
को निधन हो गया. वे 85 वर्ष के थे.
अब्दुल रहमान अंतुले
• 09 फरवरी 1929 को जन्मे अंतुले अपने युवावस्था से ही कांग्रेस के लिए सक्रिए रहे और जिला स्तर के कार्यकर्ता से वे एमपीसीसी महा सचिव के पद पर पहुंचे, बाद में वे अखिल भारतीय कांग्रेस समिति में शामिल हुए.
• अंतुले महाराष्ट्र के पहले और एकमात्र मुस्लिम मुख्यमंत्री थे. वे 1980 से 1982 तक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे. हालांकि, मुख्यमंत्री का उनका कार्यकाल सीमेंट घोटाले की वजह से छोटा रहा और इसी घोटाले के कारण उन्हें इस्तीफा भी देने को मजबूर होना पड़ा था.
• साल 1985 में वे एक बार फिर राज्य विधानसभा के लिए चुने गए और कोलाबा जिसे बाद में रायगढ़ के नाम से जाना गया, से, 9वीं लोकसभा के लिए चुने जाने तक वे ( 1989 तक) वहीं बने रहे.
• जून 1995 से मई 1996 तक, वे स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के केंद्रीय मंत्री रहे और फरवरी से मई 1996 तक उन्हें जलसंसाधन का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था.
• साल 1996 में वे 11वीं लोकसभा में फिर से निर्वाचित हुए और 2004 में 14वीं लोकसभा में निर्वाचित हुए.
• वे मनमोहन सिंह के यूपीए–1 सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री भी थे.
• उन्होंने 2009 में आखिरी चुनाव लड़ा था जिसमें वे शिवसेना से हार गए औऱ फिर सक्रिए राजनीति से किनारा कर लिया.
• 09 फरवरी 1929 को जन्मे अंतुले अपने युवावस्था से ही कांग्रेस के लिए सक्रिए रहे और जिला स्तर के कार्यकर्ता से वे एमपीसीसी महा सचिव के पद पर पहुंचे, बाद में वे अखिल भारतीय कांग्रेस समिति में शामिल हुए.
• अंतुले महाराष्ट्र के पहले और एकमात्र मुस्लिम मुख्यमंत्री थे. वे 1980 से 1982 तक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे. हालांकि, मुख्यमंत्री का उनका कार्यकाल सीमेंट घोटाले की वजह से छोटा रहा और इसी घोटाले के कारण उन्हें इस्तीफा भी देने को मजबूर होना पड़ा था.
• साल 1985 में वे एक बार फिर राज्य विधानसभा के लिए चुने गए और कोलाबा जिसे बाद में रायगढ़ के नाम से जाना गया, से, 9वीं लोकसभा के लिए चुने जाने तक वे ( 1989 तक) वहीं बने रहे.
• जून 1995 से मई 1996 तक, वे स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के केंद्रीय मंत्री रहे और फरवरी से मई 1996 तक उन्हें जलसंसाधन का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था.
• साल 1996 में वे 11वीं लोकसभा में फिर से निर्वाचित हुए और 2004 में 14वीं लोकसभा में निर्वाचित हुए.
• वे मनमोहन सिंह के यूपीए–1 सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री भी थे.
• उन्होंने 2009 में आखिरी चुनाव लड़ा था जिसमें वे शिवसेना से हार गए औऱ फिर सक्रिए राजनीति से किनारा कर लिया.
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