प्रसिद्ध विद्वान और जेएनयू के प्रोफेसर मैथियास शमूएल सुंद्रा
पांडियन का दिल के दौरे की वजह से 10 नवंबर 2014
को 57 वर्ष की आयु में निधन हो गया. वह जवाहर
लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में "स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज सेंटर ऑर
हिस्टारिकल स्टडीज" के साथ काम कर रहे थे.
मैथियास शमूएल सुंद्रा पांडियन के बारे में
• मैथियास शमूएल सुंद्रा पांडियन ने वर्ष 1987 में मद्रास विश्वविद्यालय से अपनी पीएचडी पूरी की.
• जेएनयू में आने से पहले वह वर्ष 1989 से वर्ष 2009 तक चेन्नई के मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलेपमेंट स्टडीज (एमआईडी) में एसोसिएट प्रोफेसर थे.
• पांडियन ने द्रविड़ आंदोलन, दक्षिण भारतीय राजनीति, सिनेमा, जाति, पहचान और कई अन्य सामाजिक प्रासंगिक मुद्दों पर बड़े पैमाने पर लिखा.
• पांडियन ने राष्ट्रीय समाचार पत्रों और कई वर्षों तक इकॉनामिक एंड पॉलिटीकल वीकली में लिखा.
• पांडियन को तमिलनाडु और विशेष रूप से द्रविड़ राजनीति पर उनके तीक्ष्ण लेख के लिए जाना जाता था.
• मैथियास शमूएल सुंद्रा पांडियन ने वर्ष 1987 में मद्रास विश्वविद्यालय से अपनी पीएचडी पूरी की.
• जेएनयू में आने से पहले वह वर्ष 1989 से वर्ष 2009 तक चेन्नई के मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलेपमेंट स्टडीज (एमआईडी) में एसोसिएट प्रोफेसर थे.
• पांडियन ने द्रविड़ आंदोलन, दक्षिण भारतीय राजनीति, सिनेमा, जाति, पहचान और कई अन्य सामाजिक प्रासंगिक मुद्दों पर बड़े पैमाने पर लिखा.
• पांडियन ने राष्ट्रीय समाचार पत्रों और कई वर्षों तक इकॉनामिक एंड पॉलिटीकल वीकली में लिखा.
• पांडियन को तमिलनाडु और विशेष रूप से द्रविड़ राजनीति पर उनके तीक्ष्ण लेख के लिए जाना जाता था.
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