भारतीय नौसेना राजेन्द्र चोल के राज्याभिषेक का 1000वीं वर्षगांठ मनाएगी-(05-NOV-2014) C.A

| Wednesday, November 5, 2014
भारतीय नौसेना ने प्राचीन राजा राजेन्द्र चोल के राज्याभिषेक की 1000वीं वर्षगांठ मनाने की घोषणा 3 नवंबर 2014 को की.

तमिलनाडु के राज्यपाल के रोसैय्या ने चेन्नई पोर्ट ट्रस्ट के प्रांगण से नागापट्टनम के लिए एक जहाज को रवाना किया. यह चोल के नौसेना की उपलब्धियों का प्रतीक होगा. नागापट्टनम को राजेंद्र चोल के नौसेना के एक नौसैनिक अड्डों में से माना जाता रहा है.
इस समारोह के लिए भारतीय नौसेना ने नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन और तमिलनाडु सरकार के साथ समझौता किया है. 

समारोह के हिस्से के रूप में आईएनएस सुदर्शनी को चेन्नई से लाया जा रहा है औऱ उसकी यात्रा नागापट्टनम में समाप्त होगी.
 
आईएनएस सुदर्शनी भारतीय नौसेना की नौकायन एवं प्रशिक्षण जहाज है. यह दुनिया भर की जलयात्रा के बाद वापस कोच्चि की राह पर है. एक राजा के समारोह में परिभ्रमण जहाज को सिर्फ इसलिए शामिल किया गया है कि उस प्रचीन काल में भी राजा की नौसेना सीमाओं के परे थी. 
 
तमिलनाडु नौकायन संघ और रॉयल मद्रास याच क्लब की नौकाएं चेन्नई बंदरगाह से बाहर आईएनएस सुदर्शनी का अनुरक्षण करेंगी जबकि स्थानीय कुलीन और गणमान्य व्यक्ति नागापट्टनम बंदरगाह पर उसके आगमन की अगुवाई करेंगे.
राजेंद्र चोल 
राजेंद्र चोल को एक महानतम शासक औऱ भारत के तमिल चोल साम्राज्य के सैन्य नेता के रूप में माना जाता है. उन्होंने 1014 ई. में अपने पिता से चोल साम्राज्य की कमान अपने हाथों में ली थी.

उसके शासनकाल में, उन्होंने पहले से ही बहुत बड़े चोल साम्राज्य का विस्तार उत्तर में गंगा के किनारे और समुद्र के पार तक किया था. राजेंद्र की सीमा तटीय बर्मा, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह, लक्ष्यद्वीप, मालदीव तक थी औऱ उन्होंने श्रीविजय और पेगू द्वीप के राजाओं पर अपने जहाजों के बेड़े से विजय प्राप्त की थी. 

उन्होंने बंगाल और बिहार के पाल राजा महिपाल को हराया था और अपनी जीत की स्मृति में उन्होंने एक नई राजधानी गंगाईकोंडा चोलपुरम की स्थापना की थी. उसके शासनकाल में चोल एशिया के सबसे शक्तिशाली राजवंशों में से एक बन गया था.
 
राजेंद्र चोल के सफल आक्रमणों का कई मध्ययुगीन तमिल कवियों  ने गुणगान किया है. कवि जयमकोडन ने अपने ग्रंथ उला के कलिंगाट्टूपप्रनी और ओट्टाक्कूओथार में उनका यशोगान किया है. उन्हें गंगाईकोंडन (वह जो उत्तर भारत में गंगा नदी को अपनाया) और कंडारमकोंडन ( मलेशिया में जिसने केदाह को प्राप्त किया) का खिताब भी मिला था.



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