लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को 3 अक्टूबर 2014 को तीन– सदस्यीय
सीआईसी चयन समिति में शामिल किया गया. इस समिति मुख्य कार्य मुख्य सूचना आयुक्त
(सीआईसी) का चयन करना है.
समिति के अन्य दो सदस्य-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (अध्यक्ष) और
केंद्रीय वित्त एवं रक्षा मंत्री अरुण जेटली हैं.
खरगे को लोकसभा में अकेली सबसे बड़ी पार्टी के नेता होने के नाते और नेता विपक्ष की स्थिति पर अस्पष्टता के कारण चुना गया है.
अब तक 22 अगस्त 2014 से सीआईसी की नियुक्ति रुकी हुई थी क्योंकि लोकसभा में नेता विपक्ष की स्थित साफ नहीं हो पाई थी. इस उद्देश्य के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने जून 2014 में लोकसभा सचिवालय से स्पष्टीकरण मांगा था.
अक्टूबर 2014 में पीएमओ ने डीओपीटी को इस पद के लिए विज्ञापन जारी करने का निर्देश दिया था. यह फैसला लोकेश बत्रा के आरटीआई आवेदन के जवाब में सार्वजनिक किया गया था.
नेता विपक्ष की जरूरत क्यों पड़ती है?
सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के अनुसार सीआईसी का चयन तीन– सदस्यीय पैनल के द्वारा किया जाता है. जिसमें प्रधानमंत्री – जो कि समिति के अध्यक्ष होता है, लोकसभा में नेता विपक्ष और प्रधानमंत्री द्वारा मनोनीत एक केंद्रीय मंत्री होता है.
शंकाओं को दूर करने के लिए, अधिनियम में यह कहा गया कि अगर लोकसभा में नेता विपक्ष की स्थिति स्पष्ट न हो तो केंद्र में बनी सरकार के विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी के किसी नेता को नेता विपक्ष माना जा सकता है.
खरगे को लोकसभा में अकेली सबसे बड़ी पार्टी के नेता होने के नाते और नेता विपक्ष की स्थिति पर अस्पष्टता के कारण चुना गया है.
अब तक 22 अगस्त 2014 से सीआईसी की नियुक्ति रुकी हुई थी क्योंकि लोकसभा में नेता विपक्ष की स्थित साफ नहीं हो पाई थी. इस उद्देश्य के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने जून 2014 में लोकसभा सचिवालय से स्पष्टीकरण मांगा था.
अक्टूबर 2014 में पीएमओ ने डीओपीटी को इस पद के लिए विज्ञापन जारी करने का निर्देश दिया था. यह फैसला लोकेश बत्रा के आरटीआई आवेदन के जवाब में सार्वजनिक किया गया था.
नेता विपक्ष की जरूरत क्यों पड़ती है?
सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के अनुसार सीआईसी का चयन तीन– सदस्यीय पैनल के द्वारा किया जाता है. जिसमें प्रधानमंत्री – जो कि समिति के अध्यक्ष होता है, लोकसभा में नेता विपक्ष और प्रधानमंत्री द्वारा मनोनीत एक केंद्रीय मंत्री होता है.
शंकाओं को दूर करने के लिए, अधिनियम में यह कहा गया कि अगर लोकसभा में नेता विपक्ष की स्थिति स्पष्ट न हो तो केंद्र में बनी सरकार के विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी के किसी नेता को नेता विपक्ष माना जा सकता है.
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