भारत ने 31 अक्टूबर 2014 को
संयुक्त राष्ट् के उस मसौदा प्रस्ताव के प्रावधानों के खिलाफ वोट किया जिसमें भारत
समेत उन सभी देशों जो परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) में शामिल नहीं हैं, को उसके गैर–परमाणु हथियार देश बनाए जाने की बात
कही. भारत ने उन प्रावधानों को भी मानने से इनकार कर दिया जिसमें परमाणु
निरस्त्रीकरण और परमाणु अप्रसार की स्थिति प्राप्त करने के लिए एनपीटी के मौलिक
भूमिका पर जोर दिया गया और भारत, इस्राइल और पाकिस्तान को
एनपीटी को तुरंत मान लेने और गैर–परमाणु हथियार देश बनने को
कहा गया था एवं अपने सभी परमाणु हथियार आईएईए सुरक्षा उपायों के अधीन करने को कहा
था.
हालांकि, भारत ने एक संधि पर निरस्त्रीकरण सम्मेलन
जिसमें परमाणु हथियारों के लिए विखंडनीय सामग्री के उत्पादन पर प्रतिबंध लगाने के
लिए तत्काल वार्ता प्रारंभ करने की बात कही गई, के प्रावधान
पर हुए मतदान में हिस्सा नहीं लिया. साथ ही भारत ने उस प्रावधान पर भी वोट नहीं
किया जिसमें एक असेंबली होने की बात थी जो आईएईए के सुरक्षा उपायों के
सार्वभौमीकरण के महत्व पर जोर देती और वैसे देशों को उसमें शामिल करती जो अभी तक
इससे दूर हैं और ऐसे समझौतों को लागू करवाती.
भारत का पक्ष
भारत ने प्रावधान को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि एक गैर–परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र के रूप में एनपीटी को मानने का कोई सवाल ही नहीं उठता. परमाणु हथियार भारत केआंतरिक सुरक्षा का हिस्सा है और गैर–भेदभावपूर्ण एवं वैश्विक परमाणु निरस्त्रीकरण होने तक बने रहेंगे.
भारत ने कहा कि वह अभी भी विश्व में परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है और वह दुनिया, निरीक्षणीय और भेदभाव रहित परमाणु–निरस्त्रीकरण के लिए समयबद्ध कार्यक्रम का समर्थन जारी रखेगा.
संयुक्त राष्ट्र के एनपीटी पर मसौदा प्रस्ताव के प्रावधानों को खारिज करने वाले अन्य देश
प्रावधान कहता है कि देश बतौर गैर–परमाणु हथियार राज्य के रूप में एनपीटी को मान लें. इसे कोरिया औऱ इस्राइल ने भी स्वीकार करने से मना कर दिया लेकिन फिर भी इसके पक्ष में 164 देश हैं. एनपीटी की मूल भूमिका पर जोर देने वाले इस प्रावधान का जिसमें वैश्विक परमाणु सुविधाओं को आईएईए सुरक्षा उपायों के तहत रखने की बात कही गई है, को मानने से इस्राइल, अमेरिका और पाकिस्तान ने भी इनकार कर दिया. हालांकि इसके पक्ष में 163 वोट डाले गए.
अन्य प्रवाधान जिसमें निररस्त्रीकरण सम्मेलन में तात्काल वार्ता प्रारंभ करने की बात थी, को रिकॉर्ड 166 वोट मिले, जबकि दो ने इसके खिलाफ वोट किया और भारत, ईरान, इस्राइल, डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिब्लिक ऑफ कोरिया ने इस मतदान में हिस्सा नहीं लिया.
परमाणु अप्रसार संधि पर संयुक्त राष्ट्र मसौदा प्रस्ताव
मसौदा संकल्प जिसका शीर्षक था टूवॉर्डस ए न्यूक्लियर वेपन–फ्री वर्ल्डः एक्सलरेटिंग द इंप्लीमेंटेशन ऑफ न्यूक्लीयर डिसआर्मामेंट कमिटमेंट्स, को निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों को हल करने वाली पहली समिति ने 193 –सदस्यों के संयुक्त राष्ट्र महासभा के समक्ष प्रस्तुत किया.
इस मसौदा प्रस्ताव को कुल 166 देशों ने स्वीकार किया औऱ सात देशों, कोरिया, फ्रांस, भारत, इस्राइल, रूसी संघ, यूके और अमेरिका इसके खिलाफ थे.
भारत का पक्ष
भारत ने प्रावधान को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि एक गैर–परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र के रूप में एनपीटी को मानने का कोई सवाल ही नहीं उठता. परमाणु हथियार भारत केआंतरिक सुरक्षा का हिस्सा है और गैर–भेदभावपूर्ण एवं वैश्विक परमाणु निरस्त्रीकरण होने तक बने रहेंगे.
भारत ने कहा कि वह अभी भी विश्व में परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है और वह दुनिया, निरीक्षणीय और भेदभाव रहित परमाणु–निरस्त्रीकरण के लिए समयबद्ध कार्यक्रम का समर्थन जारी रखेगा.
संयुक्त राष्ट्र के एनपीटी पर मसौदा प्रस्ताव के प्रावधानों को खारिज करने वाले अन्य देश
प्रावधान कहता है कि देश बतौर गैर–परमाणु हथियार राज्य के रूप में एनपीटी को मान लें. इसे कोरिया औऱ इस्राइल ने भी स्वीकार करने से मना कर दिया लेकिन फिर भी इसके पक्ष में 164 देश हैं. एनपीटी की मूल भूमिका पर जोर देने वाले इस प्रावधान का जिसमें वैश्विक परमाणु सुविधाओं को आईएईए सुरक्षा उपायों के तहत रखने की बात कही गई है, को मानने से इस्राइल, अमेरिका और पाकिस्तान ने भी इनकार कर दिया. हालांकि इसके पक्ष में 163 वोट डाले गए.
अन्य प्रवाधान जिसमें निररस्त्रीकरण सम्मेलन में तात्काल वार्ता प्रारंभ करने की बात थी, को रिकॉर्ड 166 वोट मिले, जबकि दो ने इसके खिलाफ वोट किया और भारत, ईरान, इस्राइल, डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिब्लिक ऑफ कोरिया ने इस मतदान में हिस्सा नहीं लिया.
परमाणु अप्रसार संधि पर संयुक्त राष्ट्र मसौदा प्रस्ताव
मसौदा संकल्प जिसका शीर्षक था टूवॉर्डस ए न्यूक्लियर वेपन–फ्री वर्ल्डः एक्सलरेटिंग द इंप्लीमेंटेशन ऑफ न्यूक्लीयर डिसआर्मामेंट कमिटमेंट्स, को निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों को हल करने वाली पहली समिति ने 193 –सदस्यों के संयुक्त राष्ट्र महासभा के समक्ष प्रस्तुत किया.
इस मसौदा प्रस्ताव को कुल 166 देशों ने स्वीकार किया औऱ सात देशों, कोरिया, फ्रांस, भारत, इस्राइल, रूसी संघ, यूके और अमेरिका इसके खिलाफ थे.
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