सर्वोच्च न्यायालय ने गिर के शेरों के स्थानांतरित कर उन्हें मध्य
प्रदेश के कूनो पालपुल वन्यजीव अभयारण्य में भेजने संबंधी गुजरात सरकार की याचिका
को 15 अगस्त 2014 को
खारिज कर दिया. गुजरात सरकार ने एशियाई शेरों के वैकल्पिक घर के तौर पर प्रस्तावित
कूनो पालपुर वन्यजीव अभयारण्य में गिर के शेरों के स्थानांतरण के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती दी थी. केंद्र सरकार का यह फैसला
महामारी के जोखिम से शेरों को बचाने के लिए किया गया था, क्योंकि
शेर गुजरात के कुछ सीमित क्षेत्र में ही फैले हुए हैं.
इससे पहले अप्रैल 2013 में, सर्वोच्च न्यायालय ने स्थांतरण के पक्ष में फैसला सुनाया था और 12 सदस्यों वाली विशेषज्ञ समिति को निर्देश दिया था कि वे इस फैसले को छह माह
के भीतर कार्यान्वित करें. हालांकि फरवरी 2014 में, इस फैसले के खिलाफ एक उपचारात्मक याचिका दायर की थी.
गिर के एशियाई शेरों के बारे में
गिर के एशियाई शेर का वैज्ञानिक नाम 'पैंथेरा लियो परसिका' है और ये सिर्फ गुजरात के गिर राष्ट्रीय उद्यान में ही पाए जाते हैं. ये शेर एशियाई शेरों के आखिरी जीवित आबादी हैं, जो गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में शुष्क पर्णपाती वन औऱ खुले में रहते हैं. एशियाई शेर बहुत ही सामाजिक पशु हैं, जो झुंड में रहते हैं जिसे 'प्राइड्स' कहा जाता है और इनके बच्चे अंधे पैदा होते हैं. ये आईयूसीएन रेड डाटा बुक में लुप्तप्राय प्रजाति की सूची में शामिल हैं.
गिर के एशियाई शेरों के बारे में
गिर के एशियाई शेर का वैज्ञानिक नाम 'पैंथेरा लियो परसिका' है और ये सिर्फ गुजरात के गिर राष्ट्रीय उद्यान में ही पाए जाते हैं. ये शेर एशियाई शेरों के आखिरी जीवित आबादी हैं, जो गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में शुष्क पर्णपाती वन औऱ खुले में रहते हैं. एशियाई शेर बहुत ही सामाजिक पशु हैं, जो झुंड में रहते हैं जिसे 'प्राइड्स' कहा जाता है और इनके बच्चे अंधे पैदा होते हैं. ये आईयूसीएन रेड डाटा बुक में लुप्तप्राय प्रजाति की सूची में शामिल हैं.
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