केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश
(एफडीआई) को 26% से बढ़ाकर 49% करने
की मंजूरी 6 अगस्त 2014 को दी.
रक्षा क्षेत्र में एफडीआई को सिर्फ इसी शर्त के साथ बढ़ाया गया है कि रक्षा उपकरणों के निर्माण के संयुक्त उपक्रमों का नियंत्रण भारतीयों के पास ही रहेगा.
रक्षा क्षेत्र में एफडीआई को सिर्फ इसी शर्त के साथ बढ़ाया गया है कि रक्षा उपकरणों के निर्माण के संयुक्त उपक्रमों का नियंत्रण भारतीयों के पास ही रहेगा.
फिलहाल, घरेलू रक्षा क्षेत्र अपने सैन्य
हार्डवेयर का 70% आयात करता है. यह कदम घरेलू उद्योग को
बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है.
रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश मंजूरी मार्ग के द्वारा किया जाना है. निवेश की मंजूरी विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) द्वारा दी जाएगी.
हालांकि 49% का कैप रक्षा क्षेत्र के लिए आम नियम हो जाएगा लेकिन अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के साथ किए जाने वाले निवेश में 100 % विदेशी स्वामित्व की इजाजत होगी. इस प्रकार के प्रस्तावों को सुरक्षा पर मंत्रिमंडल समिति (सीसीएस) से मंजूरी लेनी होगी.
रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश मंजूरी मार्ग के द्वारा किया जाना है. निवेश की मंजूरी विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) द्वारा दी जाएगी.
हालांकि 49% का कैप रक्षा क्षेत्र के लिए आम नियम हो जाएगा लेकिन अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के साथ किए जाने वाले निवेश में 100 % विदेशी स्वामित्व की इजाजत होगी. इस प्रकार के प्रस्तावों को सुरक्षा पर मंत्रिमंडल समिति (सीसीएस) से मंजूरी लेनी होगी.
49%
विदेशी हिस्सेदारी वाली कंपनियों में, 51% की
हिस्सेदार अब एक से अधिक भारतीय कंपनियां बन सकेंगीं, वर्तमान
नियम के मुताबिक इस 51% की हिस्सेदार अनिवार्य रूप से अकेली
भारतीय इकाई होती थी और वही पूरे 51% की मालिक होती थी,
सरकार के इस कदम से रक्षा क्षेत्र में घरेलू व्यवसायियों को आने का
प्रोत्साहन मिलेगा.
वर्ष 2001 में रक्षा क्षेत्र में एफडीआई को मंजूरी दी गई थी औऱ तब से अब तक सिर्फ 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर का एफडीआई भारत में आया है.
वर्ष 2001 में रक्षा क्षेत्र में एफडीआई को मंजूरी दी गई थी औऱ तब से अब तक सिर्फ 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर का एफडीआई भारत में आया है.
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