प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 अगस्त 2014
को लेह-श्रीनगर (जम्मू और कश्मीर) ट्रांसमिशन लाइन का उद्घाटन किया.
इस लाइन के जरिए लद्दाख क्षेत्र देश के उत्तरी ग्रिड से जुड़ जाएगा, जिससे लेह और करगिल में बिजली की किल्लत दूर होगी.
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर 44 मेगावाट
की चूटक और 45 मेगावाट वाली निमू-बाजगो पनबिजली परियोजना की
भी नींव रखी. चूटक पनबिजली परियोजना कारगिल और निमू-बाजगो पनबिजली परियोजना जम्मू
और कश्मीर के लेह जिले में स्थित है. इन परियोजनाओं को उद्देश्य लद्दाख क्षेत्र
में बिजली की आपूर्ति करना है. 45 मेगावाट का निमू-बाजगो
पनबिजली परियोजना सिंधु नदी की क्षमता का दोहन करने वाली नदी परियोजना है. यह
परियोजना उर्जा की 239 मिलियन इकाई पैदा करने के लिए डिजाइन
की गई है. लगात में वृद्धि, सांविधिक शुल्क की वजह से
परियोजना पर अनुमानित 611 करोड़ रुपये की लागत में संशोधन कर
इसे 985 करोड़ रुपये कर दिया गया.
विदित हो कि प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर लेह-लद्दाख के
विकास के तीन ‘पी’- प्रकाश,
पर्यावरण और पर्यटन का नारा दिया. राज्य के विकास पर जोर देते हुए
प्रधानमंत्री ने, 'जम्मू-कश्मीर में केसर का उत्पादन बढ़ाने
हेतु 'सैफ्फ्रॉन क्रांति' लाने की बात
कही.
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