कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (कॉनकॉर) को 23 जुलाई 2014 को भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यम
मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक उपक्रम विभाग ने नवरत्न का दर्जा दिया. नवरत्न का
दर्जा हासिल करने वाला कॉनकॉर 17वां केंद्रीय सार्वजनिक
क्षेत्र उपक्रम (सीपीएसई) है.
कॉनकॉर देश के एग्जिम (निर्यात और आयात) एवं घरेलू और
वाणिज्य के लिए मल्टी–मॉडल लॉजिस्टिक सपोर्ट मुहैया कराता है.
नवरत्न का दर्जा मिल जाने के बाद कंपनी को 1000 करोड़ रुपये या एक परियोजना में अपनी कुल निवल मूल्य का 15% लगाने या पूरे वर्ष में अपने कुल निवल मूल्य के 30% तक का निवेश के लिए सरकार की इजाजत लेने की जरूरत नहीं होगी.
नवरत्न का दर्जा मिल जाने के बाद कंपनी को 1000 करोड़ रुपये या एक परियोजना में अपनी कुल निवल मूल्य का 15% लगाने या पूरे वर्ष में अपने कुल निवल मूल्य के 30% तक का निवेश के लिए सरकार की इजाजत लेने की जरूरत नहीं होगी.
इसके अलावा यह नवरत्न कंपनियों के बोर्ड में शामिल होगा
और इसे (i) पूंजीगत व्यय, (ii)भारत या विदेश में संयुक्त उपक्रम/ सहायक कंपनियों, (iii) मानव संसाधन विकास (iv) संगठनात्मक पुनर्गठन और (v)
घरेलू पूंजी बाजारों और अंतरराष्ट्रीय
बाजारों से ऋण लेने की भी इजाजत होगी.
नवरत्न का दर्जा देने के प्रमुख मापदंड
• एक केंद्रीय सार्वजननिक क्षेत्र का उद्यम (सीपीएसई) अनुसूची–ए और मिनिरत्न श्रेणी–I की कंपनी हो.
• सीपीएसई के पास पिछले पांच वर्षों में कम–से–कम तीन वर्षों का उत्कृष्ट या बहुत अच्छा समझौता ज्ञापन (एमओयू) रेटिंग होना चाहिए.
• पहचान किए गए छह दक्षता मानकों में पिछले तीन वर्षों के दौरान अपने प्रदर्शन के आधार पर सीपीएसई को 100 अंकों में से समग्र 60 या उससे अधिक अंक मिलने चाहिए.
• एक केंद्रीय सार्वजननिक क्षेत्र का उद्यम (सीपीएसई) अनुसूची–ए और मिनिरत्न श्रेणी–I की कंपनी हो.
• सीपीएसई के पास पिछले पांच वर्षों में कम–से–कम तीन वर्षों का उत्कृष्ट या बहुत अच्छा समझौता ज्ञापन (एमओयू) रेटिंग होना चाहिए.
• पहचान किए गए छह दक्षता मानकों में पिछले तीन वर्षों के दौरान अपने प्रदर्शन के आधार पर सीपीएसई को 100 अंकों में से समग्र 60 या उससे अधिक अंक मिलने चाहिए.
कॉनकॉर के बारे में
कॉनकॉर का गठन वर्ष 1988 में
कंपनी अधिनियम 1956 के तहत किया गया था और इसने वर्ष 1989
से भारतीय रेल के मौजूदा सात आईसीडी (इनलैंड कनटेनर डीपो) से काम
करना शुरु कर दिया था. यह 62 आईसीडी या भारत में सूखे
बंदरगाहों के सबसे बड़े नेटवर्क के साथ बाजार में अग्रणी है.
वर्तमान में इसके अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएम़ी) अनिल कुमार गुप्ता हैं.
वर्तमान में इसके अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएम़ी) अनिल कुमार गुप्ता हैं.
नवरत्न के बारे में
वास्तव में नवरत्न का खिताब भारत सरकार द्वारा वर्ष 1997 में 9 सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (पीएसई) "सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां जिनके पास तुलनात्मक रुप से लाभ है", को दिया गया था, ताकि वैश्विक दिग्गज बनने के उनके प्रयासों को समर्थन देने और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने के लिए उन्हें अधिक स्वायत्ता दी जा सके.
वास्तव में नवरत्न का खिताब भारत सरकार द्वारा वर्ष 1997 में 9 सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (पीएसई) "सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां जिनके पास तुलनात्मक रुप से लाभ है", को दिया गया था, ताकि वैश्विक दिग्गज बनने के उनके प्रयासों को समर्थन देने और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने के लिए उन्हें अधिक स्वायत्ता दी जा सके.
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