वैज्ञानिकों ने ऑस्ट्रेलियाई हम्पबैक डॉल्फिन जिसका
वैज्ञानिक नाम सौसा साहुलेन्सिस रखा गया है, वाली नई प्रजाति की
पहचान की है. ऑस्ट्रेलियाई हम्पबैक डॉल्फिन पश्चिमी अफ्रीका के तट से लेकर
ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी तट के इलाके में पाई जाने वाली तटीय सेटासीन का एक व्यापक
समूह है.
इस अध्ययन के लेखक क्लाइमेनी एंटरप्राइजेज के थॉमस ए.
जेफरसन और वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन सोसायटी के हावर्ड सी. रोसनबम है. डब्ल्यूसीएस का
अध्ययन 1 अगस्त 2014 को मैरीन
मैमल साइंट जरनल के ऑनलाइन संस्करण पर प्रकाशित किया गया था.
वैज्ञानिक नाम– सौसा साहुलेन्सिस,
साहुल शेल्फ से बना है. साहुल सेल्फ उत्तरी ऑस्ट्रेलिया और दक्षिणी
न्यू गिनी के बीच का पानी के भीतर का शेल्फ है जहां ऑस्ट्रेलियाई हम्पबैक डॉल्फिन
पाई जाती हैं.
पाई गई प्रजाती हम्पबैक डॉल्फिन की चार मान्यता प्राप्त
प्रजातियों में से एक है. अन्य तीन संबंधित प्रजातियां हैं–
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अटलांटिक हम्पबैक डॉल्फिन (सौसा
टियूस्जी)
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इंडो–पेसेफिक हम्पबैक
डॉल्फिन (सौसा सिनेसिस) जो दक्षिण – पूर्वी एशिया और चीन के
तट पर पाई जाती हैं.
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इंडियन ओशियन हम्पबैक डॉल्फिन (सौसा
पल्मबीया)
ऑस्ट्रेलियाई हम्पबैक डॉल्फिन के
लक्षण
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यह ग्रे रंग की होती है और इसकी पीठ
पर केप पैटर्न होता है. यह नई प्रजाति अपनी निकटम संबंधित प्रजातियों से अलग दिखती
है. इंडो– पेसेफिक हम्पबैक गुलाबी आभा लिए सफेद रंग
की होती है जबकि नई प्रजाति विशिष्ट काले केप के साथ गहरे ग्रे रंग की है. इस
डॉल्फिन के नीचला पृष्ठीय पंख (लोअर डोरसल फिन) भी है.
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ऑस्ट्रेलियाई हम्पबैक डॉल्फिन का
फिलहाल कोई अनुमानित आबादी नहीं है लेकिन एक अनुमान के मुताबिक इस प्रजाति की कुछ
हजार डॉल्फिन्स ही अस्तित्व में हैं.
पाई गई नई प्रजाति पर विलुप्त होने का खतरा पहले से ही मंडरा रहा है. यह प्रजाति आईयूसीएन की रेड लिस्ट में विलुप्त होने के करीब वाली श्रेणी में सूचीबद्ध हो चुकी है.
पाई गई नई प्रजाति पर विलुप्त होने का खतरा पहले से ही मंडरा रहा है. यह प्रजाति आईयूसीएन की रेड लिस्ट में विलुप्त होने के करीब वाली श्रेणी में सूचीबद्ध हो चुकी है.
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हम्पबैक प्रजातियों को मछली पकड़ने, जहाजों से टकराने, पोतों की टक्कर और तटीय विकास से
खतरा है.
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हम्पबैक डॉल्फिनों और अन्य तटीय
डॉल्फिनों और उनके सबसे महत्वपूर्ण आवासों को बचाने के प्रयास इनके अस्तित्व के
लिए बहुत जरूरी हैं.
अध्ययन
नए अध्ययन ने समुद्री स्तनधारियों के श्रेणी विभाजन में उलझे एक समूह की जांच की. इसमें फिलहाल मान्यता प्राप्त चार हम्पबैक डॉल्फिन प्रजातियों के बाहरी और कंकाल मापों, रंगों, आणविक आनुवंशिकी और भौगोलिक वितरण का इस्तेमाल कर विस्तृत समीक्षा और विवरण दिया गया है.
नए अध्ययन ने समुद्री स्तनधारियों के श्रेणी विभाजन में उलझे एक समूह की जांच की. इसमें फिलहाल मान्यता प्राप्त चार हम्पबैक डॉल्फिन प्रजातियों के बाहरी और कंकाल मापों, रंगों, आणविक आनुवंशिकी और भौगोलिक वितरण का इस्तेमाल कर विस्तृत समीक्षा और विवरण दिया गया है.
आनुवंशिक और आकृति विज्ञान गुणों का इस्तेमाल कर– उत्तरी ऑस्ट्रेलिया और न्यू गिनी के द्वीप के पानी में अनोखे हम्पबैक
डॉल्फिन प्रजातियों की खोज करने वाले अध्ययनों पर यह नया अध्ययन अगला कदम है.
इस अध्ययन की एक और दिलचस्प पहलू था समुद्री प्रजातियों के
लिए बाधा के तौर पर वालेस लाइन और इंडो– पेसेफिक और
ऑस्ट्रेलियाई हम्पबैक डॉल्फिनों के बीच की खाई जिसके इससे अधिक गहरे होने की
उम्मीद है.
वालेस लाइन मलय द्वीपसमूह के जीवन की विस्तार से जांच करने
वाले पहले प्रकृतिवादियों में से एक अल्फ्रेड रसेल वालेस ने दिया था. इस रेखा के
पश्चिम में पाए जाने वाले ज्यातर स्थलीय पशु प्रजातियां एशियाई मूल की हैं और
पूर्व की तरफ पशु प्रजातियां ज्यादातर ऑस्ट्रेलियाई मूल की है.
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