मॉरीशस ने 27 मई 2014 को भारत
के साथ स्वचालित कर सूचना विनिमय करने का निर्णय किया. इस निर्णय की घोषणा मॉरिशस
के प्रधानमंत्री नवीन रामगुलाम ने भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात
के बाद की.
नवीन रामगुलाम भारत के 15 वें प्रधानमंत्री
नरेन्द्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए आये थे.
मॉरीशस द्वारा यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि पिछले
कुछ महीनों में मॉरीशस से भारत में होने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में कर वंचना
विरोधी नियमों (गार-जनरल एंटी अवाइडेंस रूल्सव) के प्रभावों के डर और कर परिहार
संधि (टैक्स अवायडेंस ट्रीटी) पर संभावित पुनर्वाता के कारण कमी आने लगी थी.
भारत– मॉरीशस दोहरे कराधान
परिहार समझौते (डीटीएए) को संशोधित किया जा रहा है इसकी प्रयोजन मॉरीशस से भारत में फंड्स की राउंड– ट्रिपिंग
बताई जा रही है जबकि मॉरीशस ऐसे दुरुपयोग से संबंधित किसी प्रकार के सबूत न होने
की बात कहता है.
स्वचालित कर सूचना विनिमय
स्वचालित कर सूचना विनिमय में मूल देश से निवास देश में
बड़े पैमाने पर करदाताओं की सूचना का आय की विभिन्न् श्रेणियों के लिए व्यवस्थित
और आवधिक आदान– प्रदान होता है. आय की श्रेणियों में
लाभांश, ब्याज, रॉयल्टी, वेतन, पेंशन आदि शामिल हैं.
यह गैर अनुपालना जहां एक निवेश रिटर्न या अंतर्निहित
पूंजी राशि पर कर वंचना हुई हैं यहां तक कि वहाँ भी जहां कर प्रशासन को पूर्व में
गैर– अनुपालन की कोई जानकारी नहीं हो, इस बारें में भी समय से सूचना दे सकते हैं
स्वचालित कर सूचना विनिमय करने के प्रस्ताव को आर्थिक
सहयोग और विकास (ओईसीडी) के लिए संगठन द्वारा दिया गया था. यह सितंबर 2013
में जी -20 के नेताओं द्वारा पूर्णतया समर्थित
किया गया.
13 फरवरी 2014 को ओईसीडी ने वित्तीय लेखा सूचना के स्वचालित विनिमय के लिए मानक जारी किए थे, जो अपने वित्तीय संस्थानों से जानकारी प्राप्त करने के लिए और स्वचालित रूप से एक वार्षिक आधार पर क्षेत्राधिकारों के साथ उस जानकारी का विनिमय करने के बारें में बताता हैं.
13 फरवरी 2014 को ओईसीडी ने वित्तीय लेखा सूचना के स्वचालित विनिमय के लिए मानक जारी किए थे, जो अपने वित्तीय संस्थानों से जानकारी प्राप्त करने के लिए और स्वचालित रूप से एक वार्षिक आधार पर क्षेत्राधिकारों के साथ उस जानकारी का विनिमय करने के बारें में बताता हैं.
6 मई 2014 को भारत और
स्विट्जरलैंड समेत 47 देशों ने कर मामलों में स्वचालित सूचना
विनिमय की घोषणा का समर्थन किया था
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