श्रमिकों के अधिकारों एवं उनके मानवाधिकारों के प्रति जन-जागरूकता
फैलाने के उद्देश्य से 1 मई 2014 को पूरे
विश्व में ‘विश्व श्रमिक दिवस’ (world labour day) मनाया गया. इस दिवस को मई दिवस, मजदूर दिवस आदि
नामों से भी जाना जाता है.
पृष्ठभूमि
मई माह के पहले दिन अर्थात 1 मई को विश्व के लगभग सभी देशों में श्रमिक दिवस मनाया जाता है. श्रमिकों
के काम के घंटों को कम करने और उन्हें अधिकार दिलाने के लिए अमेरिका में 18वीं शताब्दी में एक मुहिम की शुरूआत हुई. धीरे-धीरे यह मुहिम एक आंदोलन
में परिवर्तित हो गई. अमरीका में श्रमिक दिवस पहली बार मजदूर हड़ताल के रूप में 1
मई 1886 को मनाई गई. भारत में इसे पहली बार 15
जून 1923 को मनाया गया. इसके अलावा कई
राष्ट्रों और संस्कृतियों में यह दिवस पारंपरिक बसंत महोत्सव के तौर पर भी मनाया
जाता है और इस दिन सार्वजनिक अवकाश रखने का भी प्रावधान है.
वर्तमान में विश्व के लगभग सभी देशों में श्रमिक दिवस मनाया जाता है. भले ही अलग-अलग राष्ट्रों में इस दिन को मनाने का तरीका भिन्न है, लेकिन इसका एकमात्र उद्देश्य मजदूरों को मुख्य धारा में बनाए रखना और उनके अधिकारों के प्रति समाज को और स्वयं उन्हें जागरुक करना है.
वर्तमान में विश्व के लगभग सभी देशों में श्रमिक दिवस मनाया जाता है. भले ही अलग-अलग राष्ट्रों में इस दिन को मनाने का तरीका भिन्न है, लेकिन इसका एकमात्र उद्देश्य मजदूरों को मुख्य धारा में बनाए रखना और उनके अधिकारों के प्रति समाज को और स्वयं उन्हें जागरुक करना है.
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