पाकिस्तान
की लाहौर पुलिस के अनुसार ब्रिटिश पुलिस अधिकारी ‘जॉन
सांडर्स’ की हत्या के मामले में दर्ज प्राथमिकी (एफआइआर) में
भगत सिंह का नाम नहीं था.
इससे
संबंधित एक रिपोर्ट लाहौर पुलिस ने लाहौर के अनारकली थाने के एफआइआर रिकार्ड के
आधार पर मई 2014 के प्रथम सप्ताह में लाहौर उच्च
न्यायालय में प्रस्तुत किया.
उर्दू में लिखी प्राथमिकी अनारकली थाने में 17 दिसंबर 1928 को अपराहन 4.30 बजे दो अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज की गई थी. अनारकली थाने का ही एक पुलिस अधिकारी मामले में शिकायतकर्ता था.
शिकायतकर्ता सह प्रत्यक्षदर्शी पुलिस अधिकारी ने एफआइआर में कहा है कि, ‘जिस व्यक्ति का उसने पीछा किया वो 5 फुट 5 इंच लंबा था, हिंदू चेहरा, छोटी मूंछें और दुबली पतली और मजबूत काया थी. वो सफेद रंग का पायजामा और भूरे रंग की कमीज और काले रंग की छोटी क्रिस्टी जैसी टोपी पहने था.यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 120 और 109 के तहत दर्ज किया गया था.
विदित हो कि भगत सिंह को निर्दोष साबित करने की मुहिम के तहत भगत सिंह मेमोरियल फाउन्डेशन (पाकिस्तान) के अध्यक्ष इम्तियाज राशिद कुरैशी ने लाहौर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है, जिसमें न्यायालय द्वारा भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के खिलाफ तत्कालीन एसएसपी जॉन पी सैंडर्स की हत्या के मामले में दर्ज प्राथमिकी की सत्यापित प्रति लाहौर पुलिस से मांगी गई थी. इसी हत्या कांड मामले में भगत सिंह को मौत की सजा सुनाई गई थी और महज 23 साल की उम्र में वर्ष 1931 में उन्हें लाहौर के शादमान चौक पर फांसी दी गई थी.
उर्दू में लिखी प्राथमिकी अनारकली थाने में 17 दिसंबर 1928 को अपराहन 4.30 बजे दो अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज की गई थी. अनारकली थाने का ही एक पुलिस अधिकारी मामले में शिकायतकर्ता था.
शिकायतकर्ता सह प्रत्यक्षदर्शी पुलिस अधिकारी ने एफआइआर में कहा है कि, ‘जिस व्यक्ति का उसने पीछा किया वो 5 फुट 5 इंच लंबा था, हिंदू चेहरा, छोटी मूंछें और दुबली पतली और मजबूत काया थी. वो सफेद रंग का पायजामा और भूरे रंग की कमीज और काले रंग की छोटी क्रिस्टी जैसी टोपी पहने था.यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 120 और 109 के तहत दर्ज किया गया था.
विदित हो कि भगत सिंह को निर्दोष साबित करने की मुहिम के तहत भगत सिंह मेमोरियल फाउन्डेशन (पाकिस्तान) के अध्यक्ष इम्तियाज राशिद कुरैशी ने लाहौर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है, जिसमें न्यायालय द्वारा भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के खिलाफ तत्कालीन एसएसपी जॉन पी सैंडर्स की हत्या के मामले में दर्ज प्राथमिकी की सत्यापित प्रति लाहौर पुलिस से मांगी गई थी. इसी हत्या कांड मामले में भगत सिंह को मौत की सजा सुनाई गई थी और महज 23 साल की उम्र में वर्ष 1931 में उन्हें लाहौर के शादमान चौक पर फांसी दी गई थी.
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