रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 7 फरवरी 2014 को घोषित किया कि वह झारखंड और छत्तीसगढ़
सहित नक्सल-प्रभावित राज्यों में माओवादियों का पता लगाने के लिए मानवरहित हवाई
वाहनों के विकास की प्रक्रिया में है. इन वाहनों का प्रयोग जंगलों तक में
माओवादियों की स्थिति जानने के लिए केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) द्वारा
किया जाना है.
डीआरडीओ के अनुसार, ऐसे पहले वाहनों की परिचालन-क्षमता का प्रदर्शन कुछ महीनों के भीतर किया जाएगा. यह जानकारी डीआरडीओ के मुखिया अविनाश चंदर द्वारा नई दिल्ली में डिफेंस एक्सपो-2014 के आयोजन के अवसर दी गई.
मानवरहित प्रणालियाँ और अत्याधुनिक सामरिक मशीनें 9 फरवरी 2014 को समाप्त इस एक्सपो का मुख्य आकर्षण रहीं. यह प्रदर्शनी नई दिल्ली स्थित प्रगति मैदान में 6 फरवरी 2014 को शुरू हुई थी. यह रक्षा मंत्रालय की 8वीं जमीनी, समुद्री और आंतरिक स्वदेशी सुरक्षा प्रणाली प्रदर्शनी थी.
रक्षा प्रदर्शनी संगठन (डीईओ)
डीआरडीओ के अनुसार, ऐसे पहले वाहनों की परिचालन-क्षमता का प्रदर्शन कुछ महीनों के भीतर किया जाएगा. यह जानकारी डीआरडीओ के मुखिया अविनाश चंदर द्वारा नई दिल्ली में डिफेंस एक्सपो-2014 के आयोजन के अवसर दी गई.
मानवरहित प्रणालियाँ और अत्याधुनिक सामरिक मशीनें 9 फरवरी 2014 को समाप्त इस एक्सपो का मुख्य आकर्षण रहीं. यह प्रदर्शनी नई दिल्ली स्थित प्रगति मैदान में 6 फरवरी 2014 को शुरू हुई थी. यह रक्षा मंत्रालय की 8वीं जमीनी, समुद्री और आंतरिक स्वदेशी सुरक्षा प्रणाली प्रदर्शनी थी.
रक्षा प्रदर्शनी संगठन (डीईओ)
डीईओ की स्थापना 1981 में रक्षा
मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग के एक अंग के रूप में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र
उपक्रमों, डीआरडीओ और आयुध निर्माणी बोर्ड की संभावनाओं के
उन्नयन और निर्यात के लिए एक नोडल एजेंसी के रूप में की गई थी.
अपनी स्थापना के बाद से इसने रक्षा मंत्रालय की ओर से निर्यात संवर्धन गतिविधियों में योगदान किया है. यह भारत में एयरो इंडिया और डिफेक्सो इंडिया जैसी दो प्रमुख प्रदर्शनियों के आयोजन के लिए नोडल और समन्वयकर्ता एजेंसी है, जिनकी पिछले समय में अच्छी ग्रोथ रही है.
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ)
अपनी स्थापना के बाद से इसने रक्षा मंत्रालय की ओर से निर्यात संवर्धन गतिविधियों में योगदान किया है. यह भारत में एयरो इंडिया और डिफेक्सो इंडिया जैसी दो प्रमुख प्रदर्शनियों के आयोजन के लिए नोडल और समन्वयकर्ता एजेंसी है, जिनकी पिछले समय में अच्छी ग्रोथ रही है.
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ)
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) रक्षा मंत्रालय के
रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग के अधीन कार्य करता है. यह रक्षा-प्रणालियों में
आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में कार्य करता है और तीन सेवाओं द्वारा निर्धारित
स्पष्ट जरूरतों और गुणवत्तापरक आवश्यकताओं के अनुसरण में विश्वस्तरीय
हथियार-प्रणालियों के उत्पादन की ओर अग्रसर करने वाले डिजाइन और विकास का काम हाथ
में लेता है.
डीआरडीओ सैन्य प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहा है, जिनमें वैमानिकी, युद्ध-सामग्री, सामरिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग सिस्टम्स, मिसाइलें, नौसैनिक प्रणालियाँ, उन्नत कंप्यूटिंग, अनुरूपण (सिम्यूलेशन) और जीवनविज्ञान शामिल हैं.
डीआरडीओ पुरस्कार
डीआरडीओ सैन्य प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहा है, जिनमें वैमानिकी, युद्ध-सामग्री, सामरिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग सिस्टम्स, मिसाइलें, नौसैनिक प्रणालियाँ, उन्नत कंप्यूटिंग, अनुरूपण (सिम्यूलेशन) और जीवनविज्ञान शामिल हैं.
डीआरडीओ पुरस्कार
वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और
डीआरडीओ के साझेदारों को राष्ट्रीय सुरक्षा के कार्य में योगदान करने हेतु प्रेरित
करने के लिए डीआरडीओ पुरस्कारों की योजना वर्तमान रूप में 1999 में शुरू की गई थी. योजना में कुल 17 पुरस्कार शामिल
हैं, जिनमें से 4 पुरस्कार संबंधित लेबोरेटरीज/प्रतिष्ठानों
के निदेशकों द्वारा अपने वैज्ञानिकों और तकनीकी, प्रशासनिक
तथा संबद्ध संवर्गों के अन्य सहायक स्टाफ को उनके उत्कृष्ट योगदान की मान्यता के
तौर पर प्रदान किए जाते हैं.
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