केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 30 जनवरी 2014
को मानसिक बीमारी से पीड़ित लोगों को सशक्त करने के लिए और उनके
अधिकारों की रक्षा करने के लिए एक उद्देश्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य देखभाल विधेयक
में संशोधन को मंजूरी प्रदान की. मानसिक स्वास्थ्य देखभाल विधेयक 2013 को अगस्त 2013 में राज्यसभा में पेश किया गया था.
राज्य सभा की कुछ संशोधनों की सिफारिश के साथ इसे संसद की स्थायी समिति के पास भेज
दिया गया था.
नये बिल में आत्महत्या को कम करने और सभी के लिए सस्ती मानसिक
स्वास्थ्य देखभाल सेवांओं का सही उपयोग करने का प्रवाधान है. यह भारत में पहली बार
है कि एक अधिनियम जिसमें आत्महत्या के कृत्यों को कम करने के द्वारा मानसिक
स्वास्थ्य की स्थिति को जोड़ने के का प्रयास किये जा रहे बिल को राज्यसभा में पेश
किया गया और कैबिनेट द्वारा मंजूरी दी गई है.
विधेयक के अनुसार जो लोग मानसिक स्वास्थ्य आत्महत्या के
से पीड़ित हैं उन्हें मानसिक रूप से बीमार माना जायेगा इसलिए अधिनियम को भारतीय
दंड संहिता की धारा 309 के प्रावधानों से मुक्त रखा जाएगा.
भारत के विकलांग व्यक्तियों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन पुष्टि के
बाद इस विधेयक ने देश में मानसिक स्वास्थ्य कानून में अंतर को पूरा कर दिया है
जिसकी आवश्यकता दुनिया भर में प्रचलित कानूनों में बदलाव की जरुरतमंद लोगों के लिए
हैं. सम्मेलन में 1 अक्टूबर 2007 को
भारत द्वारा हस्ताक्षर किए गये और यह 3 मई 2008 से अस्तित्व में आया था.
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