केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने राष्ट्रीय तिलहन और पाम ऑयल से
संबंधित राष्ट्रीय मिशन के कार्यान्वयन के लिए दिशानिर्देश और विस्तृत कार्यक्रम
की घोषणा 31 जनवरी 2014
को की. इस योजना का उद्देश्य परंपरागत और वृक्षज तेलहनों का उत्पादन
बढ़ाना है. इस मिशन को लागू करने की नीति में सिंचाई सुविधाएं बढ़ाना, खेती का क्षेत्रफल 26 से बढ़ाकर 36 प्रतिशत करना और विभिन्न किस्म की फसलों को बढ़ावा देना शामिल है. 12वीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत सरकार ने इस मिशन के लिए 3,507 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं.
इस योजना के कार्यान्वयन की रणनीति में निम्नलिखित बातें शामिल हैं
• बीज प्रतिस्थापन अनुपात बढ़ाना
• तिलहन के अंतर्गत सिंचाई का दायरा 26 से 36 प्रतिशत करना.
• अल्प उपज वाली धान्य फसलों से तिलहन फसलों में क्षेत्र का विविधीकरण और अनाजों, गन्ने और दालों के साथ फसल चक्र के अनुसार तिलहनों की फसल उगाना (इंटरक्रॉपिंग).
• धान और आलू की खेती के बाद परती भूमि का इस्तेमाल.
योजना के अंतर्गत समस्त हितधारकों की सक्रिय संलग्नता कार्यान्वित की जाएगी. इसकी 75 प्रतिशत लागत केंद्र द्वारा और 25 प्रतिशत राज्यों द्वारा वहां की जाएगी. यह सुनिश्चित करने के लिए कि मिशन के लाभ उचित समय पर लाभार्थियों तक पहुँचें, निधि के प्रवाह की कड़ाई से निगरानी की जाएगी.
इस योजना के कार्यान्वयन की रणनीति में निम्नलिखित बातें शामिल हैं
• बीज प्रतिस्थापन अनुपात बढ़ाना
• तिलहन के अंतर्गत सिंचाई का दायरा 26 से 36 प्रतिशत करना.
• अल्प उपज वाली धान्य फसलों से तिलहन फसलों में क्षेत्र का विविधीकरण और अनाजों, गन्ने और दालों के साथ फसल चक्र के अनुसार तिलहनों की फसल उगाना (इंटरक्रॉपिंग).
• धान और आलू की खेती के बाद परती भूमि का इस्तेमाल.
योजना के अंतर्गत समस्त हितधारकों की सक्रिय संलग्नता कार्यान्वित की जाएगी. इसकी 75 प्रतिशत लागत केंद्र द्वारा और 25 प्रतिशत राज्यों द्वारा वहां की जाएगी. यह सुनिश्चित करने के लिए कि मिशन के लाभ उचित समय पर लाभार्थियों तक पहुँचें, निधि के प्रवाह की कड़ाई से निगरानी की जाएगी.
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