ईरान ने बताया है कि अंतरिम परमाणु करार पर विश्व के छह
प्रमुख देश इस बात पर सहमत हो गए हैं कि करार 20 जनवरी 2014
से प्रभावी होगा. सफल मध्यस्थता के बाद जिनेवा वार्ता में सफल
मध्यस्थता के बाद ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को शुरू करने पर राजी कर लिया
गया. ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने बताया है कि ईरान और अमेरिका ने इस
समझौते को लागू करने के लिए सहमत हो गए हैं. समझौते के अनुसार छह माह की इस अवधि
में सीमित प्रतिबंधों के बदले ईरान अपने कार्यक्रम का कुछ हिस्सा धीरे– धीरे कम करेगा.
अमेरिका उन प्रतिबंधों पर सीमित नरमी प्रदान करेगा जो तेल पर निर्भर ईरान की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहा है.
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर 24 नवंबर 2013 को जिनेवा में पी 5+1 यानि अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन के साथ जर्मनी और ईरान ने समझौते के सफल कार्यान्वयन पर बातचीत की.
अंतरिम समझौते के मुताबिक ईरान को प्रतिबंधों में राहत के बदले छह माह में अपनी परमाणु गतिविधियों पर अंकुश लगाकर यूरेनियम संवर्धन को पांच प्रतिशत करना होगा.
तेहरान भी अपने यूरेनियम के संचित भंडार को कम कर आधा करेगा और बाकी को ईंधन बनाने के लिए परिवर्तित करेगा.
समझौता वैश्विक सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए है.
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंकुश लगाने में सफल समझौता अमेरिका द्वारा यूरोप में मिसाइल–रोधी ढाल (एंटी– मिसाइल शिल्ड) बनाने की जरूरत को खत्म कर देगा. मिसाइल– रोधी ढाल जो 2020 तक पूरा होना है, वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है.
रूस मिसाइल सुरक्षा प्रणाली का जोरदार विरोध करता है क्योंकि इससे शीत युद्ध के बाद के सामरिक संतुलन और उसकी खुद की सुरक्षा कमजोर हो सकती है.
0 comments:
Post a Comment