चीन ने हाथियों की तेजी से घटती आबादी को बचाने के उद्देश्य
से तस्करी में जब्त किए गए छह टन से अधिक हाथी दांतों को गुंआंग्डोंग प्रांत में 6 जनवरी 2014 को नष्ट कर दिया. जून 2013 के बाद से विश्व में हाथी दांत को नष्ट करने का यह तीसरा मामला है. जून 2013
में फिलिपींस की सरकार ने पांच टन से अधिक जबकि अमेरिकी सरकार ने
नवंबर 2013 में छह टन हांथी दांत नष्ट किए.
चीन का यह कदम अपनी सीमाओं से बाहर वन्यजीवों की सुरक्षा में उठाया गया अस्थायी कदम था.
जनवरी 2013 में चीन ने नौ देशों के कानून प्रवर्तन अधिकारियों के एक अंतरराष्ट्रीय टास्क फोर्स का नेतृत्व किया था जिसका उद्देश्य वन्यजीव अपराधियों के गिरोह को पकड़ना था. एक महीन तक चलने वाले अभियान में 6.5 टन हाथी दांत के साथ अन्य जानवरों के शरीर के हिस्से जब्त किए गए.
मार्च 2013 में हुए एक वैश्विक संरक्षण सम्मेलन में चीन ने अमेरिका के साथ मिलकर जानवरों की 40 प्रजातियों की सुरक्षा स्तर को बढाने के लिए अभियान शुरु किया था. जानवरों की यह 40 प्रजातियों को चीन के लोगों से सबसे ज्यादा खतरा था.
अन्य उपायों में, सीआईटीईएस स्थायी समिति के साथ परामर्श कर चीन ने अपने व्यापक राष्ट्रीय आइवरी एक्शन प्लान लागू करने का निर्णय लिया है. इसके अलावा, चीन ने ऑपरेशन कोबरा के नाम से जाना जाने वाला पहली क्रॉस–कॉन्टिनेंट वाइल्डलाइफ इन्फोर्समेंट एफर्ट का नेतृत्व किया.
हालांकि, चीन वन्य जीवों की बिक्री और व्यापार के लिए कानूनी बाजारों में जाने के खिलाफ है. चीन वर्ष 2008 में अफ्रीकी देशों से खरीदे गए हाथी दांतों में से प्रत्येक वर्ष राज्य द्वारा स्वीकृत हाथी दांत कारीगरों को हाथी दांत आवंटित करता है. कंवेंशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड द्वारा वन्य जीवजंतु और फ्लोरा की लुप्तप्राय प्रजाति (सीआईटीईएस) पर 2012 में किए एक अध्ययन के अनुसार पूर्वी एशिया में चीन ही एक मात्र ऐसा देश है जहां घरेलू आमदनी के साथ हाथी दांत की मांग में बढ़ोतरी हुई है.
कंवेंशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड द्वारा वन्य जीवजंतु और फ्लोरा की लुप्तप्राय प्रजाति (सीआईटीईएस) पर दलों का 16वां सम्मेलन (सीआईटीईएस सीओपी 16)
वन्य जीवों पर खतरों, अवैध शिकार और तस्करी खासतौर पर अफ्रीकी हाथियों की, में लगे लोगों और उनकी आजीविका के बारे में पता लगाने के लिए इसका आयोजन मार्च 2013 में बैंकॉक में किया गया था. हाथियों के अवैध शिकार (एमआईकेई– माइक) पर निगरानी करने वाले सीआईटीईएस प्रोग्राम द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2012 में अफ्रीका में 22000 हाथी अवैध रूप से मारे गए. 42 माइक साइट्स द्वारा 27 अफ्रीकी देशों से संकलित किए आंकडों के अनुसार अफ्रीका में हाथियों का अवैध शिकार का मौजूदा स्तर अभी भी बहुत अधिक है. अगर अवैध शिकार इसी तरह जारी रहा तो जल्द ही ये विलुप्त होने की कगार पर आ जाएंगे. मध्य अफ्रीका में यह स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है. यहां अनुमानित अवैध शिकार महाद्वीपीय औसत दर से दोगुना है.
सीआईटीईएस दलों का मानना है कि पूरे अवैध हाथी दांत कारोबार की श्रृंखला के खिलाफ लक्षित और समयबद्ध कार्रवाई के साथ इसकी आपूर्ति और मांग से भी निपटने की जरूरत है. हाथी दांत व्यापार की श्रृंखला अफ्रीका से उन देशों तक फैल चुकी है जहां इसका व्यापक बाजार है.
सीआईटीईएस स्थायी समिति सीआईटीईस दलों द्वारा अफ्रीका और एशिया के आठ प्रमुख देश राष्ट्रीय आवरी कार्य योजना को तैयार करने में सामूहिक प्रयास करने के पक्ष में हैं. इस कार्ययोजना में हाथी दांत के अवैध व्यापार का सामना करने के लिए सभी आठ प्रमुख देशों के लिए जरूरी उपायों का विवरण दिया गया होगा.
चीन का यह कदम अपनी सीमाओं से बाहर वन्यजीवों की सुरक्षा में उठाया गया अस्थायी कदम था.
जनवरी 2013 में चीन ने नौ देशों के कानून प्रवर्तन अधिकारियों के एक अंतरराष्ट्रीय टास्क फोर्स का नेतृत्व किया था जिसका उद्देश्य वन्यजीव अपराधियों के गिरोह को पकड़ना था. एक महीन तक चलने वाले अभियान में 6.5 टन हाथी दांत के साथ अन्य जानवरों के शरीर के हिस्से जब्त किए गए.
मार्च 2013 में हुए एक वैश्विक संरक्षण सम्मेलन में चीन ने अमेरिका के साथ मिलकर जानवरों की 40 प्रजातियों की सुरक्षा स्तर को बढाने के लिए अभियान शुरु किया था. जानवरों की यह 40 प्रजातियों को चीन के लोगों से सबसे ज्यादा खतरा था.
अन्य उपायों में, सीआईटीईएस स्थायी समिति के साथ परामर्श कर चीन ने अपने व्यापक राष्ट्रीय आइवरी एक्शन प्लान लागू करने का निर्णय लिया है. इसके अलावा, चीन ने ऑपरेशन कोबरा के नाम से जाना जाने वाला पहली क्रॉस–कॉन्टिनेंट वाइल्डलाइफ इन्फोर्समेंट एफर्ट का नेतृत्व किया.
हालांकि, चीन वन्य जीवों की बिक्री और व्यापार के लिए कानूनी बाजारों में जाने के खिलाफ है. चीन वर्ष 2008 में अफ्रीकी देशों से खरीदे गए हाथी दांतों में से प्रत्येक वर्ष राज्य द्वारा स्वीकृत हाथी दांत कारीगरों को हाथी दांत आवंटित करता है. कंवेंशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड द्वारा वन्य जीवजंतु और फ्लोरा की लुप्तप्राय प्रजाति (सीआईटीईएस) पर 2012 में किए एक अध्ययन के अनुसार पूर्वी एशिया में चीन ही एक मात्र ऐसा देश है जहां घरेलू आमदनी के साथ हाथी दांत की मांग में बढ़ोतरी हुई है.
कंवेंशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड द्वारा वन्य जीवजंतु और फ्लोरा की लुप्तप्राय प्रजाति (सीआईटीईएस) पर दलों का 16वां सम्मेलन (सीआईटीईएस सीओपी 16)
वन्य जीवों पर खतरों, अवैध शिकार और तस्करी खासतौर पर अफ्रीकी हाथियों की, में लगे लोगों और उनकी आजीविका के बारे में पता लगाने के लिए इसका आयोजन मार्च 2013 में बैंकॉक में किया गया था. हाथियों के अवैध शिकार (एमआईकेई– माइक) पर निगरानी करने वाले सीआईटीईएस प्रोग्राम द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2012 में अफ्रीका में 22000 हाथी अवैध रूप से मारे गए. 42 माइक साइट्स द्वारा 27 अफ्रीकी देशों से संकलित किए आंकडों के अनुसार अफ्रीका में हाथियों का अवैध शिकार का मौजूदा स्तर अभी भी बहुत अधिक है. अगर अवैध शिकार इसी तरह जारी रहा तो जल्द ही ये विलुप्त होने की कगार पर आ जाएंगे. मध्य अफ्रीका में यह स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है. यहां अनुमानित अवैध शिकार महाद्वीपीय औसत दर से दोगुना है.
सीआईटीईएस दलों का मानना है कि पूरे अवैध हाथी दांत कारोबार की श्रृंखला के खिलाफ लक्षित और समयबद्ध कार्रवाई के साथ इसकी आपूर्ति और मांग से भी निपटने की जरूरत है. हाथी दांत व्यापार की श्रृंखला अफ्रीका से उन देशों तक फैल चुकी है जहां इसका व्यापक बाजार है.
सीआईटीईएस स्थायी समिति सीआईटीईस दलों द्वारा अफ्रीका और एशिया के आठ प्रमुख देश राष्ट्रीय आवरी कार्य योजना को तैयार करने में सामूहिक प्रयास करने के पक्ष में हैं. इस कार्ययोजना में हाथी दांत के अवैध व्यापार का सामना करने के लिए सभी आठ प्रमुख देशों के लिए जरूरी उपायों का विवरण दिया गया होगा.
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