केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने ऊर्जा मंत्रालय की ऊर्जा प्रणाली
विकास निधि को चालू करने और निधियों को इस्तेमाल करने के संबंध में योजना बनाने
के प्रस्ताव को 2 जनवरी 2013 को मंजूरी
दी. यह निधि केन्द्रीय विद्युत नियामक आयोग ऊर्जा प्रणाली विकास निधि में दी गई
प्रक्रियाओं के आधार पर प्रयोग की जानी है.
ऊर्जा प्रणाली विकास निधि को निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए प्रयोग किया जाना है:-
• रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण आवश्यक पारेषण प्रणाली तैयार करना, जो लोड डिस्पैच केन्द्रों की रिपोर्ट पर आधारित होगी. इससे अंतर्राज्यीय पारेषण प्रणालियों से संकुलन कम करने में मदद मिलेगी.
• ग्रिड में वोल्टेज में सुधार के लिए शंट कैपिसेटर, कंपनसेटर और अन्य ऊर्जा जेनरेटरों को लगाया जाएगा.
• पायलट परियोजनाओं और विशेष सुरक्षा एवं मानक योजनाओं को चलाया जाएगा.
• संकुलन कम करने के लिए पारेषण और वितरण प्रणालियों को दुरुस्त किया जाएगा और उन्हें उन्नत बनाया जाएगा.
• तकनीकी अध्ययन और क्षमता निर्माण सहित उपरोक्त लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए अन्य योजना/परियोजना तैयार की जाएगी.
ऊर्जा प्रणाली विकास निधि तीन महीनों के अंदर (मार्च 2014) चालू की जानी है.
ऊर्जा प्रणाली विकास निधि को निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए प्रयोग किया जाना है:-
• रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण आवश्यक पारेषण प्रणाली तैयार करना, जो लोड डिस्पैच केन्द्रों की रिपोर्ट पर आधारित होगी. इससे अंतर्राज्यीय पारेषण प्रणालियों से संकुलन कम करने में मदद मिलेगी.
• ग्रिड में वोल्टेज में सुधार के लिए शंट कैपिसेटर, कंपनसेटर और अन्य ऊर्जा जेनरेटरों को लगाया जाएगा.
• पायलट परियोजनाओं और विशेष सुरक्षा एवं मानक योजनाओं को चलाया जाएगा.
• संकुलन कम करने के लिए पारेषण और वितरण प्रणालियों को दुरुस्त किया जाएगा और उन्हें उन्नत बनाया जाएगा.
• तकनीकी अध्ययन और क्षमता निर्माण सहित उपरोक्त लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए अन्य योजना/परियोजना तैयार की जाएगी.
ऊर्जा प्रणाली विकास निधि तीन महीनों के अंदर (मार्च 2014) चालू की जानी है.
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