भारत
ने देश में एथेनॉल का उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए फिनलैंड
के साथ एक समझौता किया. यह समझौता नई दिल्ली में 15 अक्टूबर
2013 को किया गया. इस समझौते पर भारत की ओर से पेट्रोलियम
एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री पनाबाका लक्ष्मी और फिनलैंड के यूरोपीय मामलों के
मंत्री अलेक्जेंडर स्टब ने हस्ताक्षर किए.
दोनों देशों के बीच यह समझौता विश्व में स्वच्छ ऊर्जा तकनीक को बढ़ावा देने के क्षेत्र में अपनी तरह का पहला प्रयास है. इसके तहत तेल व गैस उत्पादक ओएनजीसी और फिनिश स्वच्छ ऊर्जा टेक्नोलॉजी कंपनी केम्पोलिस जैव अपशिष्ट पदार्थो से एथेनॉल, बायो केमिकल्स व बायो कोल उत्पादन के लिए पायलट परियोजना स्थापित करेगी. इस परियोजना पर 300 करोड़ रुपये की लागत आएगी.
ओएनजीसी के अध्यक्ष सुधीर वासुदेव ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के तहत सेल्युलोज को एथेनॉल में बदला जाएगा. ऐसी तकनीकी विकसित की गई है जिससे सेल्युलोज की मौजूदगी वाले सभी बेकार पदार्थो को एथेनॉल में तब्दील किया जा सकता है. इससे आयातित ईंधनों पर निर्भरता घटेगी.
भारत की जरूरत
भारत की जरूरत का 75 फीसद एथेनॉल आयात किया जा रहा है, क्योंकि इसका घरेलू स्तर पर ज्यादा उत्पादन नहीं हो पा रहा है. एथेनॉल के कच्चे माल के रूप में गेहूं के डंठलों का प्रयोग किया जाता है.
विदित हो कि सतत विकास सूचकांकों में फिनलैंड दुनिया में शीर्ष पर है.
दोनों देशों के बीच यह समझौता विश्व में स्वच्छ ऊर्जा तकनीक को बढ़ावा देने के क्षेत्र में अपनी तरह का पहला प्रयास है. इसके तहत तेल व गैस उत्पादक ओएनजीसी और फिनिश स्वच्छ ऊर्जा टेक्नोलॉजी कंपनी केम्पोलिस जैव अपशिष्ट पदार्थो से एथेनॉल, बायो केमिकल्स व बायो कोल उत्पादन के लिए पायलट परियोजना स्थापित करेगी. इस परियोजना पर 300 करोड़ रुपये की लागत आएगी.
ओएनजीसी के अध्यक्ष सुधीर वासुदेव ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के तहत सेल्युलोज को एथेनॉल में बदला जाएगा. ऐसी तकनीकी विकसित की गई है जिससे सेल्युलोज की मौजूदगी वाले सभी बेकार पदार्थो को एथेनॉल में तब्दील किया जा सकता है. इससे आयातित ईंधनों पर निर्भरता घटेगी.
भारत की जरूरत
भारत की जरूरत का 75 फीसद एथेनॉल आयात किया जा रहा है, क्योंकि इसका घरेलू स्तर पर ज्यादा उत्पादन नहीं हो पा रहा है. एथेनॉल के कच्चे माल के रूप में गेहूं के डंठलों का प्रयोग किया जाता है.
विदित हो कि सतत विकास सूचकांकों में फिनलैंड दुनिया में शीर्ष पर है.
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