पेंशन कोष नियामक और विकास प्राधिकरण विधेयक, 2011 लोकसभा में पारित (05-sep-2013) current affair

| Thursday, September 5, 2013
पेंशन कोष नियामक और विकास प्राधिकरण विधेयक, 2011 लोकसभा में पारित - लोकसभा ने पेंशन कोष नियामक तथा विकास प्राधिकरण विधेयक-2011 को 4 सितम्बर 2013 को पारित कर दिया. इससे पहले इसे 24 मार्च 2011 को संवैधानिक नियामक संस्था पेंशन कोष नियामक तथा विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) बनाने हेतु लोकसभा में पेश किया गया था. यह विधेयक नई पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के नियमन का अधिकार पीएफआरडीए को देता है. लोकसभा में एक विधेयक के पक्ष में 174 और विपक्ष में 33 वोट पड़े.
पेंशन कोष नियामक और विकास प्राधिकरण विधेयक, 2011 का उद्देश्य
इस विधेयक के जरिये पेंशन निधि विनियामक एवं विकास प्राधिकरण को पेंशन के मामलें में वैधानिक अधिकार प्राप्त होना है. फिलहाल इसका दर्जा गैर वैधानिक है. नई पेंशन प्रणाली धन अर्जन के साथ धन बचत के सिद्धांत पर आधारित है. यह विशेष रूप से अवकाश प्राप्ति हेतु है और उनके लिए जिनकी नियमित आय है.
विधेयक में शामिल कुछ प्रमुख प्रस्ताव
न्यूनतम निश्चित लाभ की इच्छा रखने वाले उपभोक्ताओं को प्राधिकरण द्वारा अधिसूचित न्यूनतम निश्चित लाभ योजनाओं में अपने धन के निवेश का विकल्प होना है.
उपभोक्ताओं को व्यक्तिगत पेंशन खाते से धन की निकासी की सशर्त अनुमति दी जानी है. इन शर्तों में धन निकासी का उद्देश्य, सीमा तथा तेजी शामिल है.
पेंशन क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा 26 प्रतिशत या बीमा क्षेत्र के लिए ऐसा स्वीकृत प्रतिशत जो भी अधिक हो.
पेंशन फंड मैनेजरों में से कम से कम एक सार्वजनिक क्षेत्र से होना है.
पीएफआरडीए कानून के तहत नियम बनाने जैसे महत्त्वपूर्ण मामलों पर पीएफआरडीए को सलाह देने के लिए एक पेंशन सलाहकार समिति स्थापित की जानी है, जिसमें सभी हितधारकों का प्रतिनिधित्व होना है.
विधेयक में उपभोक्ताओं को अपने धन का निवेश करने के व्यापक विकल्प दिए जाने है. 
इनमें सरकारी बॉण्ड में निवेश का विकल्प तथा उनकी जोखिम क्षमता के अनुरूप अन्य कोष में निवेश का विकल्प भी होना है.
नई पेंशन प्रणाली 1 जनवरी 2004 को सेवा में प्रवेश करने वाले केंद्र सरकार के सभी कर्मचारियों (सशस्त्र सेनाओं को छोड़ कर) के लिए अनिवार्य बनाई गई है.




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