प्रथम स्वदेशी परमाणुचालित पनडुब्बी अरिहंत का परमाणु रिएक्टर सक्रिय( 10 august 2013)-current affairs

| Wednesday, September 4, 2013
प्रथम स्वदेशी परमाणुचालित पनडुब्बी अरिहंत का परमाणु रिएक्टर सक्रिय - भारत में ही निर्मित देश की प्रथम स्वदेशी परमाणुचालित पनडुब्बी आईएनएस-अरिहंत पर लगा परमाणु रिएक्टर 10 अगस्त 2013 को सक्रिय कर दिया गया. इसी के साथ भारत परमाणु क्षमता से लैस पनडुब्बी बनाने वाला दुनिया का छठा देश बना गया. इसके पहले अमेरिका, चीन, फ्रांस, रूस और ब्रिटेन ही अब तक परमाणु पनडुब्बी का निर्माण कर सके हैं. 
 
 
इसी के साथ अब भारत जमीन, आसमान और जल की सतह के बाद अब समुद्र के भीतर से भी परमाणु वार करने की क्षमता से लैस हो जायेगा. मिनी रिएक्टर को भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र ने विकसित किया है. अरिहंत से छोड़ी जाने वाली परमाणु मिसाइल के-15 पूरी तरह विकसित कर ली गई है. इस मिसाइल की रेंज 700 किलोमीटर है. 

डीआरडीओ ने अरिहंत पर तैनात करने के लिए मध्यम दूरी का परमाणु प्रक्षेपास्त्र बीओ-5 भी तैयार किया है. इसका आखिरी परीक्षण 27 जनवरी 2013 को विशाखापटनम के तट पर किया गया था. परमाणु पनडुब्बी भारत को गहरे समुद्र में जाने की क्षमता प्राप्त करने में मददगार होगी. इसे लंबे समय तक सतह पर आने की जरूरत भी नहीं होगी. परंपरागत डीजल- इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को सेल चार्ज करने के लिए समय-समय पर सतह पर आना पड़ता है.

नौसेना और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के सूत्रों ने बताया कि आईएनएस अरिहंत का 83 मेगावाट रिएक्टर तमाम परीक्षणों के दौर से गुजरने के बाद सफलतापूर्वक चालू हो गया है. 

समुद्र में उतारे जाने के बाद आईएनएस-अरिहंत के संचालन संबंधी परीक्षण होंगे जो 18 महीने तक चलेंगे. 

अरिहंत का जलावतरण 
आईएनएस-अरिहंत का जलावतरण प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और रक्षा मंत्री एके एंटनी की उपस्थित में कारगिल युद्ध की 10वीं वर्षगांठ के अवसर पर 26 जुलाई 2009 को किया गया था. परंपरा के अनुसार जलावतरण की रस्म महिला द्वारा पूरी की जाती है और इसका पालन करते हुए प्रधानमंत्री की पत्नी गुरशरण कौर ने इसका जलावतरण किया था.

विदित हो कि नौसेना की सेवा में शामिल होने के बाद यह भारत की दूसरी परमाणु पनडुब्बी होगी. इसके पहले रूस से लीज पर ली गई परमाणु पनडुब्बी आईएनएस-चक्र नौसेना में शामिल है. 

इस उपलब्धि से गौरवान्वित प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और रक्षा मंत्री एके एंटनी ने रक्षा वैज्ञानिकों को बधाई दी.

परमाणु पनडुब्बी का निर्माण 
भारतीय नौसेना पोत (आईएनएस) अरिहंत परमाणु शक्ति चालित भारत की प्रथम पनडुब्बी है. इस 6000 टन के पोत का निर्माण उन्नत प्रौद्योगिकी पोत (ATV) परियोजना के अंतर्गत पोत निर्माण केंद्र विशाखापत्तनम में 2.9 अरब डॉलर की लागत से किया गया है.

परमाणु पनडुब्बी क्या है
डीजल-बिजली से चलने वाली पनडुब्बियों में आक्सीजन छोड़ने या बैटरियों को रिचार्ज करने बार-बार सतह पर आना पड़ता है. जबकि परमाणु क्षमता वाली पनडुब्बी से असीमित समय तक सागर के अगाध बक्ष स्थल को रौंदा जा सकता है. इसमें स्थापित परमाणु रिएक्टर से तैयार ऊर्जा ईंधन के रूप में अनवरत मिलती रहती है.  

अन्य तथ्य 
अरिहंत भारत में ही बनाई और डिजाइन की गई पहली परमाणु पनडुब्बी है.
यह 12 परमाणु मिसाइल के-15 ले जाने में सक्षम है. 
परमाणु पनडुब्बी भारत की रक्षा क्षमताओं में एक तीसरा आयाम जोड़ेगी. इसके पहले वह केवल हवा और ज़मीन से ही बैलिस्टिक मिसाइलें छोड़ने में सक्षम था.
रूस में बनी और एक अरब डॉलर की कीमत वाली पनडुब्बी आईएनएस चक्र को वर्ष 2012 में  अगले 10 साल के लिए समुद्र में उतारा गया था.
भारत 1991 तक रूसी पनडुब्बियों का संचालन करता था.
भारत और रूस पिछले काफी लंबे समय से सहयोगी हैं. रूस भारतीय सेना के 70 फीसद साजो-सामान की आपूर्ति करता है.




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