सार्क देशों के संस्कृति मंत्रियों की तीसरी बैठक में दिल्ली संकल्प को अपनाया गया-(29-SEP-2014) C.A

| Monday, September 29, 2014
सार्क देशों के संस्कृति मंत्रियों की तीसरी बैठक 24 25 सितंबर 2014 को नई दिल्ली में आयोजित की गई. यह बैठक संस्कृति राज्य मंत्री श्रीपद नाइक की अध्यक्षता में हुई.
वर्ष 2014– 2017 की अवधि में सार्क क्षेत्र में सांस्कृतिक संबंधों की रूपरेखा के तौर पर दिल्ली संकल्प को अपनाया गया.
दिल्ली संकल्प
•    वर्ष 2016– 2017 को सार्क सांस्कृतिक विरासत वर्ष घोषित करना. 2015– 2016 के लिए, सार्क की सांस्कृतिक राजधानी बामियान होगी और सार्क सांस्कृतिक राजधानी के तौर पर बामियान का उद्घाटन समारोह अप्रैल 2015 में किया जाएगा.
•    विश्व धरोहर सूची और विरासत स्थलों के अंतरराष्ट्रीय नामांकन के लिए एक क्षेत्रीय सूची का प्रस्ताव तैयार करना.
•    अन्य अंतर्देशीय संबंधों के रूप में समुद्री मार्गों और मानसून के प्रभाव और योगदान की पहचान के लिए.
•    क्षेत्रीय नामांकन के जरिए सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को पुनर्परिभाषित कर बातचीत बढ़ाने के लिए.
•    संस्कृति पर समर्पित सार्क वेबसाइट शुरु कर सार्क संस्कृति को ऑनलाइन बढ़ावा देने के लिए. इसमें दुर्लभ पांडुलिपियों, दुर्लभ पुस्तकों और अमूर्त सांस्कृतिक मूल्य वाले लेख का डिजिटलीकरण पर जोर दिया जाएगा.
•    सार्क क्षेत्र में सांस्कृतिक संस्थानों को मजबूत बनाना, उनके प्रदर्शन के लिए सांस्कृतिक उत्सवों को बढ़ावा देना जो कि सार्क सदस्य देशों में अनूठे हों, और कलाकारों, लेखकों और विद्वानों के लिए सार्थक विनिमय कार्यक्रमों को सक्षम बनाने के लिए.
•    सार्क सांस्कृतिक विरासत समिति (एसएचसी) और सांस्कृतिक संस्थान की स्थापना जो सदस्य देशों में ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण, रखरखाव के साथ उनके डिजिटल मैपिंग के प्रयासों को बढ़ावा देना और साथ ही संग्रहालयों और क्षेत्र के अन्य भंडारों में सांस्कृतिक संपत्ति विकसित करना और उनमें सर्वोत्तम प्रथाओं और मानकों को लागू करना.
•    इलाकों की स्थानीय भाषाओं में लिखे गए साहित्य को बढ़ावा देना और अनुवाद, न सिर्फ अंग्रेजी में बल्कि एक सार्क भाषा से दूसरी सार्क भाषा में सीधे अनुवाद के जरिए उसे विश्व भर के पाठकों तक पहुंचाना, लेखकों को रचनात्मक परियोजनाओं ,अन्य लेखकों के साथ मिलकर काम करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना और अन्य संस्कृतियों के प्रति जानकारी मुहैया कराना.
•    इस वैश्विक संस्कृति के युग में हमारे साझे अतीत की बेहतर समझ और क्षेत्र की सांस्कृतिक भविष्य की कल्पना नए सिरे से करने दोनों ही के लिए लोककथाओं और अन्य मौखिक परंपरा जो स्थानीय आख्यानों और संस्कृतियों के बारे में बताती है, के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देना.
•    सार्क क्षेत्र के विजुअल और परफॉर्मिंग आर्ट के रूपों को विश्व के अन्य हिस्सों तक सांस्कृतिक और भौगोलिक दोनों ही स्तर पर पहुंचाने के लिए प्रोत्साहित कर इन भूमियों को सांस्कृतिक कूटनीति के सतत अभियान के हिस्से के रूप में सजाना ताकि इन स्थलों की तरफ पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके और सार्क पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके.
•    सार्क देशों की जनता की साक्षरता में सुधार के वन मिशनमोड को समर्थन देना और फिर सूदूर इलाकों में पुस्तकालयों की स्थापना कर किताबों और अन्य पठन सामग्रियों तक जनता की पहुंच बनाकर उनके पढ़ने की आदत को प्रोत्साहित करने के लिए.
•    पुरातात्विक महत्व वाले स्थलों और विरासत स्थलों पर उसमें प्रवेश के लिए सामान्य दर निश्चित कर सार्क देशों के आगंतुकों के आग्रह और दिलचस्पी को बढ़ावा देने के लिए. 
सार्क संस्कृति मंत्रियों ने संस्कृति मंत्रियों की चौथी बैठक के लिए बांग्लादेश में मिलना तय किया है.

एलायंस एयर ने उड़ान संचालन के लिए एनई परिषद के साथ समझौता किया -(27-SEP-2014) C.A

| Saturday, September 27, 2014

एलायंस एयर ने 24 सितंबर 2014 को उत्तर पूर्व में विमानों के संचालन के लिए उत्तर पूर्व परिषद के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया.
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री अशोक गजपति राजू पुसापति और उत्तर पूर्व क्षेत्र के विकास राज्य मंत्री वी के सिंह की उपस्थिति में किया गया.
समझौता ज्ञापन की मुख्य विशेषताएं
•    एलायंस एयर 31 मार्च 2016 तक ATR 42 टाइप के विमानों के जरिए शिलांग, तेजपुर, लीलाबरी, सिलचर और गुवाहाटी में हवाई सेवाएं मुहैया कराएगा.
•    उत्तर पूर्व परिषद एविएशन टरबाइन फ्यूल, लैंडिंग और रूट नेविगेशन सुविधा शुल्क में रियायत प्राप्त करने में मदद करेगा.
•    परिचालन के वास्तविक लागत की समीक्षा प्रत्येक तीन माह पर प्रस्तावित लागत के आधार पर की जाएगी.
पृष्ठभूमि
एलायंस एयर जनवरी 2013 से व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वायबलिटि गैप फंडिंगवीजीएफ) के तहत उत्तर पूर्व में विमानों का परिचालन कर रहा है. वीजीएफ राजस्व से लागत घटाव( कॉस्ट मानइस रेवेन्यू) सूत्र है जिसे उत्तर पूर्वमें परिचालन घाटे को कवर करने में इस्तेमाल किया जाता है.
एलायंस एयर ने उत्तर पूर्व परिषद को 31 दिसंबर 2012 तक सेवाएं दी. तब तक वह प्रत्येक सप्ताह उत्तर पूर्व में 65 विमानों का परिचालन कर रही थी. जनवरी 2013 में आउटस्टैंडिंग वीजीएफ की वजह से एयरलाइन ने उत्तर पूर्व में अपनी एटीआर संचालन का पुनर्गठन किया था.
एनईसी और एलायंस एयर के बीच फंड को लेकर कुछ मुद्दे थे और शुरुआत में एनईसी ने यह कहकर आउटस्टैंडिंग  बिलों का भुगतान करने से इनकार कर दिया कि एलायंस एयर दिसंबर 2012 में समझौते के खत्म होने के बाद भी विमानों का परिचालन कर रहा था. इसके बाद समझौते को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और तब से कुछ मार्गों पर एटीआर सेवाओँ को  बंद कर दिया गया था.
इस बीच, एलायंस एयर ने ATR विमानों के जरिए कोलकातासिलचर, कोलकातागुवाहाटी और सिलचरइंफाल मार्ग पर परिचालन जारी रखा. साथ ही जुलाई 2013 में कोलकाताशिलांग मार्ग पर सप्ताह में पांच बार साप्ताहिक उड़ानें बहाल कर दी।

बासेल–III मानदंडों को पूरा करने के लिए बैंकों को 26-27 मिलियन अमेरिकी डॉलर की जरूरत होगी– मूडी-(27-SEP-2014) C.A

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वैश्विक स्तर रेटिंग एजेंसी मूडी ने 22 सितंबर 2014 को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बासेल–III मानदंडों को पूरा करने के लिए 26– 37  बिलियन अमेरिकी डॉलर की पूंजी की आवश्यकता होगी.
मूडी की इस रिपोर्ट का नाम इंडियन बैंक्स कुड नीड 26– 37  बिलियन यूएस डॉलर इन एक्सटरनल कैपिटल फॉर बासेल III कंप्लायंस है.
अपनी रिपोर्ट में मूडी ने कहा है कि भारतीय के सार्वजनिक क्षेत्र के 11 बैंकों को बासेल III पूंजी पर्याप्तता मानदंडों को वित्त वर्ष 2019 तक प्राप्त करने के लिए वित्त वर्ष 2015 में अपने बाहरी पूंजी में 26 से 37 बिलियन अमेरिकी डॉलर की जरूरत होगी.
मूडी का यह तथ्य इस अनुमान पर आधारित है कि भारत की जीडीपी में सामान्य सुधार हुआ है और गैरनिष्पादन ऋणों के मौजूदा स्तर में क्रमिक गिरावट हुई है.
रिपोर्ट की मुख्य बातें
•    रुपए के संदर्भ में इन बैंकों को बासेल–III मानदंडों का पूरी तरह से अनुपालन करने के लिए अतिरिक्त 1.5 से 2.2 ट्रिलियन रुपयों की जरूत होगी.
•    आवश्यक पूंजी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा करीब 800– 900 बिलियन रूपये (या 13–15 बिलियन अमेरिकी डॉलर), अधिरिक्त टीयर 1 (AT1) पूंजी के रूप में हो सकता है.
•    मूडी के अनुसार पीएसबी भारतीय बैंकिंग सिस्टम में शुद्ध ऋण का 62 फीसदी प्रदान करते है लेकिन शायद ही वर्तमान न्यूनतम पूंजी जरूरतों को पूरा कर सकें. परिणामस्वरुप पीएसबी को, वर्तमान परिदृष्य में तेजी से पूंजी उगाहने में मुश्किल हो सकती है.
•    रिपोर्ट में कहा गया है कि कमजोर परिसंपत्ति गुणवत्ता के कारण लाभप्रदता और पीएसबी में आंतरिक पूंजी उत्पादन में कमी आई है. परिणामतः उन्हें सरकार द्वारा समयसमय पर पूंजी प्रदान करने पर निर्भर रहना होगा.
•    उल्लेखनीय है कि पीएसयू बैंकों के कम मूल्यांकन के कारण इन्हें इक्विटी बाजार का दोहन करने के बावजूद जरूरी धनराशि जुटाने में मुश्किल होगी.  यहां तक ही हाल ही में शेयरों में आए उछाल भी काम नहीं कर पाएंगे.
बासेल–III मानदंड
बासेल–III ने टीयर 1 पूंजी की न्यूनतम जरूरी पूंजी स्तर को बढ़ाकर 7.0 फीसदी औऱ सामान्य इक्विटी टीयर 1 (सीईटी 1) पूंजी की न्यूनतम जरूरी पूंजी स्तर को बढाकर 5.5 फीसदी कर दिया है. इसके अलावा, बैंकों को लाभांश का भुगतान करने के क्रम में पूंजी संरक्षण बफर को भी प्राप्त करना होगा. ये भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पर प्रमुख ऋण कमजोरी कम पूंजी स्तर के कारण दबाव बनाएंगे.

पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने बंगाल की खाड़ी में गेटवे सबमरीन केबल सिस्टम को मंजूरी दी-(27-SEP-2014) C.A

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पर्यावरण एवं वन मंत्रालय (एमईओएफ) के अधीन विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (ईएसी) ने 24 सितंबर 2014 को बंगाल की खाड़ी में गेटवे सबमरीन केबल सिस्टम को तटीय नियमन क्षेत्र (कोस्टल रेगुलेशन जोनसीआरजेड) क्लीयरेंस दी.
ईएसी ने 100गिगाबिटप्रतिसेकेंड (100 जी) के मुंबई और चेन्नई में बे ऑफ बंगाल गेटवे सबमरीन केबल सिस्टम परियोजना के भारतीय हिस्से को क्लीयरेंस दे दी. हालांकि, ईएसी ने परियोजना के समर्थकों को सीआरजेड क्लीयरेंस शर्तों का सख्ती से पालन करने को कहा है.
वोडाफोन समूह ने मुंबई में केबल लैंडिंग प्वाइंट पर काम शुरु कर दिया है जबकि मुकेश अंबानी के रिलायंस कंपनी का इंफोटेल टेलिकॉम लिमिटेड ने सैन्थोम बीच, चेन्नई पर काम कर रहा है.
बे ऑफ बंगाल गेटवे सबमरीन केबल सिस्टम (बीबीजीसीएस) के बारे में
बे ऑफ बंगाल गेटवे सबमरीन केबल सिस्टम (बीबीजीसीएस) जो कि 8000 किलोमीटर के दायरे में जहाजों का परिचालन करता है, के, बारका (ओमान), फुजीराह (यूएई), मुंबई और चेन्नई (भारत), रतमालन (श्रीलंका), पेनांग (मलेशिया) और सिंगापुर, छह देशों में अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी की मजबूती और विश्वसनीयता को बढ़ाने की उम्मीद है. परियोजना में अल्काटेल ल्यूसेंट, अ यूरोनेक्स्ट और एनवाईएसईसूचीबद्ध कंपनी, वोडाफोन समूह, ओमानटेल, अमीरात दूरसंचार निगम, रिलायंस इंफोकॉम, डायलॉग एंड टेलीकॉम मलेशिया शामिल हैं. यह मई 2013 में शुरु किया गया था और 2014 के आखिर तक इसके पूरा किया जाना निर्धारित है.
यह केबल सिस्टम यूरोप, मध्यपूर्व, मध्य एशिया और सूदूर पूर्व के बीच उच्चगति का ब्रिज बनाएगा। सूदूर पूर्व और ओमान के बारका में कनेक्शन के साथ यूरोप, अफ्रीका और जीसीसी में सबमरीन और स्थलीय कनेक्शन के साथ सिंगापुर प्रमुख केबल हब होगा.

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नेपाल के साथ ग्रिड कनेक्टिविटी के समझौते को मंजूरी दी-(27-SEP-2014) C.A

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की 24 सितंबर 2014 को हुई बैठक में इलेक्ट्रिक पावर ग्रिड, सीमा पार ट्रांसमिशन इंटरकनेक्शन और ग्रिड कनेक्टिविटी पर भारतनेपाल समझौते को मंजूरी दी गई.
यह मंजूरी दोनों देशों के बीच सीमा पार बिजली ट्रांसमिशन ग्रिड कनेक्टिविटी और बिजली व्यापार की सुविधा प्रदान करेगा.
यह समझौता परस्पर स्वीकार्य शर्तों पर भविष्य में नेपाल में पनबिजली संयंत्रों से उत्पन्न अतिरिक्त बिजली का भारतीय संस्थाओं द्वारा आयात के लिए रूपरेखा भी प्रदान करेगा.
फिलहाल हर वर्ष नेपाल भारत से 200 मेगावाट बिजली आयात करता है. इसके अलावा, नए सीमा पार ट्रांसमिशन लाइनों के निर्माण (इसका निर्माण कार्य जारी है), अगले दो वर्षों में ट्रांसमिशन की क्षमता को दुगना कर देगा.
पृष्ठभूमि
बिजली व्यापार को मंजूरी अगस्त 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेपाल दौरे के दौरान किए गए फैसलों के आलोक में दिया गया था. मोदी के दौरे के दौरान यह फैसला किया गया था कि बिजली व्यापार समझौता को 45 दिनों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा.

चीन में लियाओ राजवंश से संबद्ध प्राचीन खानाबदोश शिविर का पता चला-(27-SEP-2014) C.A

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चीन के पुरातत्वविदों ने 24 सितंबर 2014 को उत्तरपूर्वी जीलिन प्रांत में प्राचीन खानाबदोश शिविर की खोज की. अनुमानतः इस शिविर का इस्तेमाल लियाओ साम्राज्य (907 ई. – 1125 ई.)  के सम्राट इस्तेमाल करते थे. 
हालांकि, पुरातत्वविदों ने शिविर के वास्तिवक आकार का खुलासा अभी नहीं किया है लेकिन माना जा रहा है कि यह चीन में पाया गया अब तक का सबसे बड़ा शिविर है.
जीलिंग प्रांस के सांस्कृतिक विरासत प्रमुख जिन झूडोंग की योजना इस शिविर को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने की है.
शिविर के बारे में निष्कर्ष
पाए गए शिविर में कुल चार हिस्से हैं. तीन किलोमीटर चौड़ा सबसे बड़ा हिस्सा पूरे शिविर के आकार का करीब एकतिहाई है. इसमें शिविर के लगाने के लिए करीब 900 स्थान हैं.
यह प्राचीन शिविर स्थल खानाबदोश खितन के शासनकाल में प्रशासनिक केंद्र के तौर पर काम करता था हालांकि शहर की राजधानी चीन में आंतरिक मंगोलिया (इनर मंगोलिया) थी. लियाओ साम्राज्य के सम्राटों के पास आम तौर पर चार शिविर हुआ करते थे जहां वे चार अलगअलग मौसम में रहा करते थे. बसंत और ग्रीष्म ऋतु में वे उत्तर दिशा वाले शिविर में चले जाते थे जबकि शरद और शीत ऋतुओं में वे दक्षिण दिशा वाले शिविर में रहते थे.
पृष्ठभूमि
साल 2009 में, वसंत ऋतु के शिविर के खंडहर की खोज की गई थी औऱ अगस्त 2014 से वहां पुरातात्विक खुदाई शुरु है. तब से, पुरात्तविदों ने टाइलें, बर्तन, चीनी मिट्टी के बर्तन, तांबे के सिक्के और बुद्ध की प्रतिमाओं समेत 100 से अधिक सांस्कृतिक अवशेषों की खोज की है.

मेक इन इंडिया: एक नई मुहिम और उसकी चुनौतियां-(27-SEP-2014) C.A

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेक इन इंडिया’ (MAKE IN INDIA) अर्थात भारत में निर्माणयोजना की शुरुआत नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 25 सितंबर 2014 को की. इस कार्यक्रम में देश के उद्योगपतियों के साथ ही विदेशी कंपनियों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए.
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेक इन इंडियायोजना  के साथ ही 'मेक इन इंडिया' की वेबसाइट makeinindia.com और उसका लोगोभी लॉन्च किया.
मेक इन इंडिया का उद्देश्य  
मेक इन इंडिया का उद्देश्य देश को वैश्विक विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) का हब बनाना एवं बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करने के अलावा व्यापार तथा आर्थिक वृद्धि को गति देना है.
 
एफडीआई (FDI) की नई परिभाषा 
प्रधानमंत्री ने एक ओर जहां उद्यमियों को यह भरोसा दिलाया कि उनका पैसा डूबने नहीं पाएगा वहीं आम जनता को भी यह यकीन दिलाया कि इस अभियान के मूल में उसका ही कल्याण है. उन्होंने कहा कि सरकार बदलने के साथ ही भारत में कारोबारी माहौल बदल चुका है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर विदेशी पूंजी निवेश अर्थात एफडीआई (FDI) की नई परिभाषा देते हुए जिस तरह से यह कहा कि भारतीयों के लिए इसका मतलब होना चाहिए फर्स्ट डेवलप इंडिया’ (पहले भारत का विकास). उससे उन्होंने न केवल देश-दुनिया के समक्ष अपनी प्राथमिकता स्पष्ट कर दी, बल्कि उद्यमियों को भी यह साफ संकेत दे दिया कि वस्तुत: वह (प्रधानमंत्री) चाहते क्या हैं?

प्रधानमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि उद्योगों का भला तभी होगा जब वे यह देखेंगे कि आम आदमी की क्रय शक्ति कैसे बढ़े? 

रोजगार सृजन 
प्रधानमंत्री ने मेक इन इंडिया अभियान को रोजगार सृजन से भी जोड़ा. उन्होंने कहा कि देश में रोजगार बढ़ाने के लिए कौशल विकास पर भी पूरा ध्यान है. सरकार यह काम पीपीपी मॉडल पर करना चाहती है. इससे आमदनी व उत्पादों की मांग बढ़ेगी. मैन्यूफैक्चरिंग विकास दर बढ़ेगी. यही चक्र आर्थिक विकास को गति देगा. हमारे पास 3डी (डेमोक्रेसी, डेमोग्राफी और डिमांड) की शक्ति है. यह ऐसी ताकत है जो हर निवेशक को भारत ला सकती है.

ग्लोबल विजन के साथ प्रगति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की लुक ईस्ट नीति के साथ साथ लिंक वेस्ट का मंत्र भी दिया. उन्होंने कहा कि इन दोनों को जोड़कर हम (वैश्विक सोच) ग्लोबल विजन के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं. ज्ञातव्य है कि मेक इन इंडिया अभियान की शुरुआत करके प्रधानमंत्री अमेरिका की यात्रा पर गए. 
बुनियादी ढांचा को दुरुस्त किया जाएगा

सरकार देश में बुनियादी ढांचा दुरुस्त करने के साथ डिजिटल नेटवर्क भी बना रही है ताकि देश को मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाने में मदद मिले.
 
आटोमोबाइल्स से एग्रो प्रोडक्ट्स, हार्ड वेयर से साफ्टवेयर, सेटेलाइट्स से सबमरीन्स, टेलीविजन्स से टेलीकाम, फार्मा से बायोटेक, पेपर से पावरप्लांट्स, रोड से बिजनेस, हाउसेस से स्मार्ट सिटीज, फ्रेंडशिप से पार्टनरशिप,प्रॉफिट से प्रोग्रेस. जो भी आप बनाना चाहें: मेक इन इंडिया.
  
प्रधानमंत्री ने मेक इन इंडिया की सफलता के लिए निम्नलिखित बातें भी सुझाई: 
सरकार का मंत्र, हर देशवासी पर भरोसा. 
लुक ईस्ट के साथ लिंक वेस्ट पर जोर.
सेल्फ सर्टिफिकेशन से शुरु हुआ बदलाव.  
मध्यवर्ग की परचेजिंग पावर बढ़ाने को रोजगार सृजन जरूरी. 
कौशल विकास होगा रोजगार सृजन में मददगार. 
स्किल डेवलपमेंट के लिए पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल का प्रयोग. 
रोजगार सृजन की दिशा में कदम है मेक इन इंडिया.
देश के पास 3डी (डेमोक्रेसी, डेमोग्राफी और डिमांड) की ताकत. 
ईजी और इफेक्टिव गवर्नेस पर जोर. 
वेस्ट से वेल्थ सृजन पर काम करे उद्योग जगत. 
कार्यक्रम की सफलता के लिए राज्यों के साथ तालमेल.
चुनौतियां 
निश्चित रूप से मेक इन इंडिया अभियान ने उद्योग-व्यापार जगत के साथ ही आम जनता को भी आकर्षित किया है परन्तु इसके सामने कई चुनौतियां भी हैं.
 
पहली चुनौती राज्य सरकारों की ओर से वैसी ही प्रतिबद्धता जताने की है जैसी केंद्रीय सत्ता की ओर से खुद प्रधानमंत्री ने आगे बढ़कर जताई है. इसके अलावा पुराने पड़ चुके कानूनों और खासकर श्रम कानूनों को बदलने की, उद्योगों की जरूरत के हिसाब से हुनरमंद युवाओं को तैयार करने की, देश में अधिकारों के संदर्भ में जैसी चेतना है वैसी चेतना कर्तव्यों के प्रति न होना की, अनुशासन के प्रति समर्पण और जवाबदेही के अभाव की हैं.
 
साथ ही उद्योगपतियों की रातों-रात मुनाफा हासिल करने की सोच जिसके चलते ही क्रोनी कैपिटलिज्म जैसे शब्द चलन में आए. यह एक बड़ी चुनौती है. 
चूंकि मेक इन इंडिया के जरिये राष्ट्र निर्माण का लक्ष्य एक पवित्र साध्य है इसलिए किसी भी स्तर पर अनुचित साधनों के लिए कोई गुंजाइश नहीं रहनी चाहिए.

केंद्र सरकार ने गंगा नदी के कायाकल्प हेतु सर्वोच्च न्यायालय में कार्य-योजना प्रस्तुत की-(27-SEP-2014) C.A

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केंद्र सरकार ने गंगा नदी के कायाकल्प हेतु सर्वोच्च न्यायालय में 22 सितंबर 2014 को कार्य योजना प्रस्तुत की. सरकार ने इस संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लघु, मध्यम और दीर्घकालिक उपायों की एक कार्य-योजना प्रस्तुत की. न्यायालय में प्रस्तुत यह कार्य-योजना 18 वर्ष की अवधि का है.
कार्य योजना की संक्षिप्त रूपरेखा
कार्य योजना के अपने हलफनामे में सरकार ने गंगा के चरणबद्ध कायाकल्प की परिकल्पना की है. इसमें समय रेखा को शर्तों में विभाजित किया गया है और वह शर्तें हैं;
लघु अवधि - तीन वर्ष की अवधि.
मध्यम अवधि - अगले पांच वर्षों की अवधि.
दीर्घकालिक - अगले दस वर्ष और उससे अधिक की अवधि.
प्रस्तुत कार्य योजना के तहत जल संसाधन एवं नदी विकास मंत्रालय ने सबसे पहले घाटों के विकास के लिए सात नदी तटों- केदारनाथ, हरिद्वार, वाराणसी, कानपुर, इलाहाबाद, पटना और दिल्ली को चुना है. मध्यम अवधि में, शहरी विकास मंत्रालय ने गंदे नालों के बुनियादी ढांचे के आवृत्त क्षेत्र का विस्तार करने के लिए 118 शहरी बस्तियों को चुना है. मध्यम अवधि के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कुल लागत 51000 करोड़ रुपए निर्धारित की गई है.
विदित हो कि 13 अगस्त 2014 को सर्वोच्च न्यायालय ने गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार से एक चरणबद्ध कार्य योजना प्रस्तुत करने के लिए कहा था.

एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक ने बच्चों को स्वतंत्र रूप से बैंक खातों को संचालित करने की अनुमति-(27-SEP-2014) C.A

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भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और भारतीय औद्योगिक ऋण और निवेश निगम बैंक (आईसीआईसीआई) ने बच्चों को स्वतंत्र रूप से बैंक खातों को संचालित करने की अनुमति 24 सितंबर 2014 को दी.
वह बच्चे, बैंक खाता समान रूप से संचालित कर सकते हैं जो 10 वर्ष से ऊपर के हैं और 10 वर्ष से ऊपर के सभी बच्चों के लिए उपलब्ध हैं. है.
एसबीआई के नए खाते अपनी तरह का पहला कदम है. अब, आईसीआईसीआई बैंक ने स्मार्ट स्टार्सखाता शुरू किया है और फेडरल बैंक लिमिटेड नाबालिगों के लिए युवा चैंपियन खाता खोलने जा रहा है.
इसके अलावा, आईसीआईसीआई बैंक नाबालिग संचालित खातों के लिए सालाना 50,000 रुपये की एक डेबिट लेनदेन सीमा लाएगा.  अब तक खाता एक अभिभावक की सहमति से संचालित किया जाता है, जिसकी  वार्षिक सीमा 2 लाख रुपए तक बढ़ा दी गई है.
बैंक फोटो डेबिट कार्ड और मोबाइल बैंकिंग और नेट बैंकिंग सहित, नाबालिगों को अधिकांश बैंकिंग सेवाएं दे रहे हैं. ये खाते युवाओं के बीच बचत व्यवहार विकसित करने के लिए मई 2014 भारतीय रिजर्व बैंक की अनुमति से खोले गए. इस योजना में नाबालिगों को किसी भी ओवरड्राफ्ट या ऋण की सुविधा नहीं दी जानी थी.

भारत ने पारे के इस्तेमाल पर रोक संबंधी ‘मीनामाटा संधि’ पर हस्ताक्षर किया-(27-SEP-2014) C.A

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भारत ने पारे के इस्तेमाल पर रोक संबंधी मीनामाटा संधिपर 25 सितंबर 2014 को हस्ताक्षर  किया. इस संधि के तहत देश में पारे के इस्तेमाल पर रोक लगेगी. केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने अमेरिका यात्रा के दौरान इस संधि पर हस्ताक्षर किए.
मीनामाटा संधिसे संबंधित मुख्य तथ्य
मीनामाटा संधि के तहत दुनिया भर में पारे का उपयोग बंद करने का प्रस्ताव है. इस संधि के लागू होने पर अगले दस वर्षों में देश पारा मुक्त हो जाएगा. मानवीय स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पारे के विपरीत असर पड़ता है इसलिए भारत ने इसके इस्तेमाल पर रोक संबंधी मीनामाटा संधि पर हस्ताक्षर किए.
इस संधि का नाम मीनामाटा जापान के एक शहर के नाम पर पड़ा. टोक्यो से करीब 1000 किलोमीटर दूर स्थित मीनामाटा में वर्ष 1950 के दशक में एक कंपनी से पारे के रिसाव के चलते लोगों को लाइलाज बीमारी हो गई. वर्ष 1956 में वैज्ञानिकों ने इस बीमारी को मीनामाटानाम दिया. इसके बाद से ही दुनिया भर में पारे के इस्तेमाल को रोकने के लिए अभियान छिड़ा. 100 से अधिक देश मीनामाटा संधि पर अब तक हस्ताक्षर कर चुके हैं. इस संधि का प्रारंभ 10 अक्टूबर 2013 को हुई. मीनामाटा संधि पर हस्ताक्षर करने वाले देशों पर इसके प्रावधान कानूनी रूप से लागू होते हैं.
पारा से संबंधित मुख्य तथ्य
पारा बेहद जहरीला पदार्थ होता है, लेकिन इसका इस्तेमाल स्वास्थ्य उत्पादों के साथ-साथ बिजली उपकरण बनाने और धार्मिक कार्यो में होता है. भारत में करीब 3000 औद्योगिक उत्पादों में पारे का इस्तेमाल होता है. इनमें थर्मामीटर, रंग, कॉस्मेटिक्स, सीएफएल, इलेक्टिक स्विच और खाद प्रमुख हैं.

केंद्र सरकार ने बराक मिसाइल के 1000 करोड़ के सौदे को मंजूरी दी-(27-SEP-2014) C.A

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केंद्र सरकार ने बराक मिसाइल के 1000 करोड़ के सौदे को 25 सितंबर 2014 को मंजूरी दी. यह सौदा इस्राइल के साथ की गई. सुरक्षा पर कैबिनेट की केंद्रीय समिति ने इस्राइल एयर डिफेंस से मिसाइल खरीदने को मंजूरी दी.
रक्षा सौदों में भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद सीबीआई जांच के कारण पिछले पांच वर्षों से इस मिसाइल की खरीदारी का सौदा लंबित था. इन बराक मिसाइलों को नौसेना के विमान के साथ रखा जाएगा, जो कि दुश्मनों के विमान या मिसाइल को लक्ष्य बना पाने में सक्षम होंगे. इन मिसाइलों को दो युद्धपोत आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विराट पर तैनात किया जाएगा, जिनपर वर्तमान मंय कोई एयर डिफेंस नहीं है.

क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और स्टीव वॉ 'ब्रेडमैन ऑनरीज' 2014 के लिए चयनित-(26-SEP-2014) C.A

| Friday, September 26, 2014

क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और ऑस्ट्रेलिया के स्टीव वॉ को ब्रेडमैन ऑनरीज 2014 में चुना गया. इसकी घोषणा  ब्रैडमैन फाउंडेशन द्वारा की गई. सचिन तेंदुलकर और ऑस्ट्रेलिया के स्टीव वॉ को सिडनी में 29 अक्टूबर 2014 को ब्रैडमैन फाउंडेशन के गाला डिनर में सम्मानित किया जाएगा.
इसकी घोषणा 22 सितबंर 2014 को ब्रैडमैन फाउंडेशन द्वारा की गई थी. सचिन तेंदुलकर को ब्रैडमैन ऑनरीज में इसलिए चयनित किया गया उन्होंने क्रिकेट के इतिहास में किसी भी अन्य क्रिकेटर से अधिक टेस्ट रन बनाए हैं और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 24 वर्षों का योगदान किया.
सर डोनाल्ड ब्रेडमैन, तेंदुलकर के खेलने की तकनीक को अपने खेल की शैली के सबसे निकट मानते थे. स्टीव वॉ को ऑस्ट्रेलिया के सबसे सफल कप्तान और ब्रेडमैन की तरह साहस, सम्मान और दृढ़ संकल्प प्रतीक के रुप में चयन किया गया.
ब्रेडमैन ऑनरीज के बारे में 
ब्रैडमैन फाउंडेशन, एक गैर लाभकारी संगठन हैं जो सर डोनाल्ड ब्रेडमैन के सहयोग से वर्ष 1987 में स्थापित किया गया था. यह फाउंडेशन खेल समुदाय के भीतर मूल्यवान सांस्कृतिक और खेल की ताकत के रूप में क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया था.
सर डोनाल्ड ब्रेडमैन के सम्मान में हर दो वर्ष में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में महत्वपूर्ण योगदान के लिए ब्रेडमैन ऑनरीज का चयन किया जाता है. यह पुरस्कार विशेष रूप से क्रिकेट में साहस, सम्मान, ईमानदारी, विनम्रता और दृढ़ संकल्प सहित सर डोनाल्ड के व्यक्त मूल्यों को प्रतिबिंबित करने के संबंध में जारी किए गए.

मलयालम फिल्म निर्माता एमटी वासुदेवन नायर केरल सरकार के जे.सी. डैनियल पुरस्कार 2013 के लिए चयनित-(26-SEP-2014) C.A

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प्रसिद्ध लेखक और फिल्म निर्माता मदाथिल थएकुट्टू (एमटी) वासुदेवन नायर को वर्ष 2013 के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट के लिए जे.सी. डैनियल पुरस्कार के लिए 23 सितंबर 2014 को चुना गया. केरल सरकार द्वारा दिया गया पुरस्कार मलयालम फिल्म उद्योग के समग्र योगदान को मान्यता देते हैं.
उन्हें यह पुरस्कार केरल के तिरुवनंतपुरम में कानाकाकुन्नू पैलेस में 17 अक्टूबर 2014 को एक समारोह में प्रदान किया जाएगा. एमटी वासुदेवन नायर को लेखक और मलयालम विश्वविद्यालय के कुलपति के जयकुमार की अध्यक्षता वाली जूरी ने इस पुरस्कार के लिए चुना था.

मदाथिल थएकुट्टू वासुदेवन नायर 
•    एमटी वासुदेवन नायर का वर्ष 1965 में मूरापेन्नू फिल्म के साथ पटकथा लेखक के रूप में कैरियर शुरू हुआ. 
•    उनके पहले उपन्यास नालुकेट्टू (विरासत) ने वर्ष 1958 में केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार जीता. 
•    एमटी वासुदेवन नायर को मलयालम साहित्य में समग्र योगदान के लिए वर्ष 1995 में ज्ञानपीठ पुरस्कार जीता. 
•    वर्ष 2005 में पद्म भूषण पुरस्कार प्राप्त किया. 
•    एमटी वासुदेवन ने अब तक सात फिल्मों का निर्देशन किया और लगभग 54 फिल्मों के लिए पटकथा लिखी है. 
•    एमटी वासुदेवन ने अपने कैरियर में सर्वश्रेष्ठ पटकथा के लिए चार बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीता. 
•    एमटी वासुदेवन ने निर्देशक के रूप में अपनी पहली फिल्म के लिए वर्ष 1974 में सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार जीता.
जे.सी. डैनियल पुरस्कार 
•    केरल सरकार ने सांस्कृतिक मामलों के विभाग के अधीन वर्ष 1992 में जेसी डेनियल के सम्मान में इस पुरस्कार की स्थापना की. 
•    डैनियल को वर्ष 1928 में वागाथाकुमारन में उत्पादन, निर्देशन, लेखन, फोटोग्राफी, संपादन और अभिनय के लिए मलयालम सिनेमा के जनक का माना जाता था. यह केरल में बनाई गई पहली फिल्म थी. 
•    यह पुरस्कार केरल राज्य फिल्म पुरस्कार का एक हिस्सा है और जीवनभर की उपलब्धियों और मलयालम सिनेमा में उत्कृष्ट योगदान के सम्मान में प्रदान किया जाता है.
•    इस पुरस्कार में 1 लाख रुपए का नकद पुरस्कार, प्रतिमा और एक प्रशस्ति पत्र शामिल हैं. 
•    वर्ष 1992 में पहला जे.सी. डैनियल पुरस्कार निर्माता ते वासुदेवन को प्रदान किया गया था.