केंद्र सरकार ने मातृत्‍व लाभ कार्यक्रम देश भर में लागू किया-(05-JAN-2017) C.A

| Thursday, January 5, 2017
केन्द्रीय महिला और बाल विकास मंत्रालय ने गर्भवती और स्‍तनपान कराने वाली माताओं के लाभ हेतु मातृत्‍व लाभ कार्यक्रम (एमबीपी) आरम्भ किया है. मातृत्‍व लाभ कार्यक्रम को कुपोषण और अल्‍पपोषण की समस्‍याओं से निपटने हेतु अखिल भारतीय स्तर पर विस्तार दिया गया है.
यह योजना राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत सशर्त नकद हस्‍तांतरण योजना के तहत आरम्भ की गई है. देश भर में गर्भवती और स्‍तनपान कराने वाली माताओं को लाभ पहुंचाने हेतु मातृत्‍व लाभ कार्यक्रम आरम्भ किया गया है.
भारत सरकार द्वारा मानव विकास हेतु पोषण के रूप में विशेष तौर पर सर्वाधिक कमजोर समुदायों में प्रत्‍येक महिला की इष्‍टतम पोषण स्थिति को सुनिश्चित करना है. 

मातृत्‍व लाभ कार्यक्रम की आवश्यकता-
  • कुपोषित महिला अधिकतर कम वजन वाले बच्‍चे को जन्‍म देती है.
  • महिला के साथ कुपोषण का प्रारंभ गर्भाशय से होता है. विशेष रूप से इसका प्रभाव महिला के सम्‍पूर्ण जीवन चक्र पर पड़ता है.
  • आर्थिक और सामाजिक दवाब की वजह से बहुत सी महिलाओं को अपनी गर्भावस्‍था के अंतिम दिनों तक परिवार हेतु आजीविका कमानी पड़ती है.
  • मातृत्‍व लाभ कार्यक्रम गर्भावस्‍था और स्‍तनपान दोनों की अवधि के दौरान अधिक महत्‍वपूर्ण है.
  • गर्भवती महिला के पोषण की स्थिति और उसके स्‍वास्‍थ्‍य प्रभावों के साथ-साथ उसके शिशु के स्‍वास्‍थ्‍य और विकास हेतु भी महत्‍वपूर्ण है.
मातृत्‍व लाभ कार्यक्रम के बारे में-
  • केन्द्रीय महिला और बाल विकास मंत्रालय ने राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की धारा 4 (बी) के प्रावधान के तहत गर्भवती और स्‍तनपान कराने वाली महिलाओं को कुपोषण से बचने हेतु सशर्त नकद हस्‍तांतरण योजना मातृत्‍व लाभ कार्यक्रम का गठन किया.
  • मातृत्‍व लाभ योजना के अंतर्गत गर्भवती और स्‍तनपान कराने वाली माताओं को नकद प्रोत्‍साहन प्रदान किया जाता है.
  • मातृत्‍व लाभ योजना के तहत प्रसव पूर्व और पश्‍चात आराम करना स्वास्थ्यके लिए हितकर है.
  • गर्भधारण और स्‍तनपान की अ‍वधि के दौरान महिला के स्‍वास्‍थ्‍य और पोषण की स्थिति में तुलनात्मक सुधार आवश्यक है.
  • नवजात के जन्‍म के छह महीनों के दौरान बच्‍चे को स्‍तनपान कराना बच्‍चे के विकास हेतु अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण है.
  • मातृत्‍व लाभ योजना के तहत गर्भवती और स्‍तनपान कराने वाली माताओं को पहले दो जीवित शिशुओं के जन्‍म हेतु तीन किस्‍तों में 6000 रुपये का नकद प्रोत्‍साहन केंद्र सरकार द्वारा देय है.
  • केंद्र सरकार अथवा राज्‍य सरकार अथवा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में नियमित रूप से रोजगार करने वाली अथवा इसी प्रकार की किसी योजना की पात्र महिलाएं मातृत्‍व लाभ योजना के अंतर्गत लाभ लेने की हकदार नही हैं.  
भुगतान का तरीका-
  • मातृत्‍व लाभ योजना के तहत भुगतान नकद हस्‍तांतरण को डीबीटी मोड में व्‍यक्तिगत बैंक/ डाकघर खाते से जुड़े आधार के माध्‍यम से किया जाने का प्रावधान है.
  • प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा 31 दिसम्‍बर, 2016 को की गयी घोषणा के बाद यह योजना 1 जनवरी 2017 से लागू कर दी गयी है.
  • मातृत्‍व लाभ योजना से करीब 51.70 लाख लाभार्थियों को प्रतिवर्ष लाभ मिलने का अनुमान है.

बार-बार अध्यादेश जारी करना संविधान के साथ 'धोखा': सर्वोच्च न्यायालय-(05-JAN-2017) C.A

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सर्वोच्च न्यायलय ने सरकारों को अध्यादेश जारी करने की शक्ति को सीमित किया है. इसके तहत केन्द्र या राज्य सरकार किसी मामले में बार-बार अध्यादेश जारी नहीं कर सकती. सरकार द्वारा बार-बार अध्यादेश जारी करना संविधान के साथ धोखाधड़ी है.
यह आदेश सर्वोच्च न्यायालय एक याचिका पर सुनवाई के बाद जारी किए. यह फैसला बिहार सरकार द्वारा 1989 से 1992 के मध्य बिहार राज्य सरकार द्वारा 429 निजी संस्कृत विद्यालयों को अधिकार में लेने हेतु जारी श्रृंखलबद्ध अध्यादेशों के खिलाफ दायर याचिका पर आया.

मुख्य तथ्य-
  • सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार बार-बार अध्यादेश जारी करना लोकतांत्रिक विधायी प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाना है.
  • मुख्यतया जब सरकार अध्यादेशों को विधानमंडल के समक्ष पेश करने से लगातार परहेज करे.
  • यह आदेश सात न्यायाधीशों वाली संवैधानिक पीठ ने 6-1 के बहुमत से पारित किया.
  • सर्वोच्च न्यायालय के आदेश में अध्यादेश फिर से जारी करना संवैधानिक रूप से 'अस्वीकार्य' कहा गया है.
  • न्यायालय के अनुसार यह प्रक्रिया संवैधानिक योजना को नुकसान पहुंचाने वाली है.
  • संवैधानिक योजना में अनुच्छेद 213 और 123 के तहत अध्यादेश बनाने की सीमित शक्ति राष्ट्रपति और राज्यपालों को ही प्रदान की गई है.
  • संसद या विधानसभा के सत्र में न रहने के कारण आपात स्थिति हेतु यह अधिकार प्रदान किए गए हैं
सर्वोच्च न्यायालय का आदेश-
  • संवैधानिक पीठ के सदस्यों में न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड ने न्यायमूर्ति शरद अरविंद बोबडे, न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल, न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित, धनंजय चंद्रचूड और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की ओर से बहुमत का फैसला लिखते हुए स्पष्ट किया कि "किसी अध्यादेश को विधानमंडल के समक्ष पेश करने की जरूरत का अनुपालन करने में विफलता एक गंभीर संवैधानिक उल्लंघन और संवैधानिक प्रक्रिया का दुरूपयोग है."
  • संवैधानिक पीठ के सदस्यों में से असहमति वाले न्यायाधीश चीफ जस्टिस तीरथ सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति एमबी लोकुर का विचार था कि किसी राज्य के राज्यपाल द्वारा किसी अध्यादेश को पुन: जारी करना संविधान के साथ कोई धोखा नहीं है.
  • सर्वोच्च न्यायालय ने 138 पृष्ठ के फैसले में कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राष्ट्रपति और राज्यपाल कानून का समानांतर स्रोत नहीं बन सकते.
  • लोकतंत्र में विधायिका का स्थान सर्वोपरि है.
  • अध्यादेश पर विधायिका का नियंत्रण आवश्यक है.
  • भारत के राष्ट्रपति और राज्यपाल की कार्य विधि मंत्रीपरिषद की सलाह पर आधारित हैं.
अध्यादेश के बारे में-
  • जारी किए गए अध्यादेश को संसद या विधान मंडल में पेश करना अनिवार्य है.
  • यदि संसद के चालू सत्र में इसे प्रस्तुत नहीं किया गया तो सत्र शुरू होने के छह सप्ताह की अवधि के बाद उह स्वत: ही समाप्त हो जाएगा.
  • अध्यादेश को संसद में पेश करने के बाद सदन द्वारा अध्यादेश को अस्वीकार करने पर भी यह निरस्त हो सकता है.

केंद्र सरकार ने पुलिस के लिए आईपीआर प्रवर्तन टूलकिट अभियान का शुभारंभ किया-(05-JAN-2017) C.A

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वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने 4 जनवरी 2017 को पुलिस के लिए आईपीआर प्रवर्तन टूलकिट का शुभारंभ किया. यह टूलकिट देश भर के पुलिस अधिकारियों हेतु खासतौर पर ट्रेडमार्क जालसाजी और कॉपीराइट चोरी जैसे आईपी अपराधों से निपटने में प्रभावी साधन सिद्ध होगी.
इससे संबंधित मुख्य तथ्य:
•    यह आईपी अपराधों के मामले में जब्ती और जांच करने के लिए सामान्य दिशा-निर्देश भी प्रदान करती है.
•    विभिन्न कानूनों के अंतर्गत अपराधों के विवरण के अलावा यह शिकायत दर्ज करने हेतु और जांच एवं जब्ती हेतु एक सूची भी प्रदान करती है.
•    यह टूलकिट देश भर के सभी राज्य पुलिस विभागों को प्रदान की जाएगी और यह उन्हें ट्रेडमार्क तथा कॉपीराइट उल्लंघन से संबंधित मामलों से निपटने में मदद प्रदान करेगी.
•    इस टूलकिट को संयुक्त रूप से आईपीआर संवर्धन और प्रबंधन प्रकोष्ठा (सीआईपीएएम) तथा भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) द्वारा तैयार किया गया है.
•    देश भर में आईपी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए सीआईपीएएम के द्वारा कई उपाय किये गये हैं.
•    राष्ट्रीय आईपीआर नीति आईपीआर के बारे में जागरूकता और आईपीआर का सम्मान रखने को मान्यता देती है, क्योंकि एक स्वस्थ आईपी तंत्र के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है.
•    वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग के तत्वाधान में आईपीआर संवर्धन और प्रबंधन प्रकोष्ठी (सीआईपीएएम) राष्ट्रीय आईपीआर नीति 2016 के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य कर रहा है.
•    सीआईपीएएम छात्रों में आईपीआर जागरूकता अभियान का शुभारंभ करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय ट्रेडमार्क एसोसिएशन के साथ सहयोग कर रहा है.
•    इससे आईपीआर पर एक सृजनात्मक और रचनात्मक संदेश को फैलाने में मदद मिलेगी.
•    प्रवर्तन तंत्र को मजबूत करने के क्रम में, सीआईपीएएल ने आंध्र प्रदेश में पुलिस अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों के सात बैचों का आयोजन किया है.
•    व्यापार गोपनीयता और उद्योग पर इसके प्रभाव से संबंधित विभिन्न पक्षों पर विचार-विमर्श के लिए व्यापार गोपनीयता की सुरक्षा पर सीआईपीएएम के द्वारा भारत-अमरीका कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया.
•    उत्तर प्रदेश में एपीओ और पुलिस अधिकारियों हेतु तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी आयोजन किया है.
•    सीआईपीएएम बौद्धिक संपदा अधिका‍रों के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को भी सुसाध्य बनाने में सक्रिय रूप से कार्यरत है.
•    हाल ही में आईपीआर पर ब्रिटेन और सिंगापुर के साथ दो समझौता ज्ञापन पत्रों पर हस्ताक्षर किये गये.
•    सीआईपीएएम ने बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रवर्तन पर पुलिस और न्यायिक अधिकारियों के प्रशिक्षण को संचालित करने हतु सभी राज्य पुलिस और न्यायिक अकादमियों को भी पत्र लिखा है.

पाकिस्तान की संसद ने हिंदू विवाह बिल को स्वीकृति प्रदान की-(05-JAN-2017) C.A

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पाकिस्तान की संसद ने बहु-प्रतीक्षित हिंदू विवाह बिल 2016 को स्वीकृति प्रदान कर दी. हिंदू विवाह अधिनियम को पाकिस्तान निवासित हिंदू अल्पसंख्यकों को मानवाधिकार पर बनी सीनेट फंक्शनल कमेटी ने अंतिम स्वीकृति प्रदान की है.
हिंदू विवाह विधेयक 2016 पाकिस्तान की संसद के ऊपरी सदन सीनेट में पारित होने के बाद कानून का रूप ले लेगा. पाकिस्तान में हिंदू विवाह पर कानून अमल में लाया जाएगा. हिंदू विवाह अधिनियम बिल-2016 का उल्लंघन करने पर जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है.
इससे पहले चार माह पूर्व सितंबर में पाकिस्तान की नेशनल असेंबली (उच्च सदन) ने पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं हेतु हिंदू मैरिज बिल-2016 पारित किया.
मुख्य तथ्य-
  • पाकिस्तान के प्रसिद्ध अखबार ‘डॉन’ के अनुसार पिछले 66 वर्षों से पाकिस्तान में निवासित हिंदुओं की शादी रजिस्टर्ड नहीं हो पाती थी. इस बिल के बाद हिंदुओं की शादी पाकिस्तान में पंजीकृत हो सकेंगी.
  • हिंदू विवाह अधिनियम बिल-2016 के अनुसार मुसलमानों के निकाहनामा की तरह ही हिंदुओं को भी शादी के प्रमाण का दस्तावेज प्रदान किया जाएगा.
  • कानूनन इस दस्तावेज का नाम 'शादीपरात' कहा जाएगा. विधेयक के अनुसार तलाकशुदा हिंदुओं को फिर से शादी करने की भी इजाजत मिलेगी.
  • शादी टूटने के मामलों में अदालत में भी अपील की जा सकेगी.
  • इसी कारण यह समुदाय पाकिस्तान में खुद को असुरक्षित महसूस करता था.
  • अब पाकिस्तान की आबादी का 2 फीसदी हिस्सा यानि वहां के हिन्दू बेहतर जीवन जी सकते है.
  • पाकिस्तान में अब तलाक और जबरन धर्म परिवर्तन जैसे मामलों का समाधान भी आसानी से हल किया जा सकता है.
बिल के लाभ-
  • हिंदू विवाह अधिनियम बिल के स्वीकृत होने के बाद पाकिस्तान में निवासित हिंदू लोगों को दूसरी शादी करने की इजाजत भी मिल सकेगी.
  • पाक की मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट सीनेटर नसरीन जलील की अध्यक्षता में सीनेट कमेटी ने बिल पर पूरी चर्चा की.
  • नेशनल असेंबली में अल्पसंख्यक सदस्य डॉ. रमेश कुमार वांकवानी के अनुसार बिल के स्वीकृत होने के बाद उन्हें अब पाकिस्तानी हिंदू कहने में गर्व महसूस होगा.

पांच भारतीय अमेरिकियों ने कांग्रेस सदस्यों के रूप में शपथ ली-(05-JAN-2017) C.A

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five indian americanपांच भारतीय अमेरिकियों ने कांग्रेस के सदस्यों के रूप में शपथ ग्रहण की. अमेरिका की जनसंख्या में भारतीय मूल के लोगों की संख्या मात्र एक फीसदी है.
इस लिहाज से अल्पसंख्यक समुदाय के लिए यह ऐतिहासिक मौका माना जा रहा है. कमला हैरिस ने कैलिफोर्निया की सीनेटर के रूप में शपथ ली.
कमला हैरिस की मां भारत से तथा पिता जमैका से थे. उन्हें अमेरिका के उपराष्ट्रपति जॉए बिडेन ने शपथ दिलाई. वह ऐसी पहली भारतीय अमेरिकी हैं, जो सीनेट में अपनी सेवाएं देंगी.
वे शपथ लेने से पहले कैलिफोर्निया में अटॉर्नी जनरल पद पर थीं. वे सीनेटर बारबरा बॉक्सर की स्थान ली है. चार भारतीय अमेरिकियों ने हाउस चैंबर्स के सदस्यों के रूप में शपथ ली.
हालांकि इनमें कांग्रेस सदस्य एमी बेरा भी थे, जिन्हें लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए चुना गया है. उनके अतिरिक्त शपथ लेने वाले भारतीय अमेरिकियों में सिलिकॉन वैली का प्रतिनिधित्व करने वाले युवा रो खन्ना भी हैं.
कांग्रेस सदस्य राजा कृष्णमूर्ति ने इलिनोइस से चुनाव जीतने के बाद गीता पर हाथ रखकर शपथ ली.
तुलसी गब्बार्ड के बाद राजा कृष्णमूर्ति ऐसे दूसरे अमेरिकी सांसद हैं, जिन्होंने गीता पर हाथ रखकर शपथ ली है.
अमेरिकी कांग्रेस के लिए चुनी गयीं पहली हिंदू तुलसी गब्बार्ड ने लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए शपथ ली. प्रमिला जयपाल अपने लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग जगह बना चुकी हैं.
वे शपथ ग्रहण करने से पहले ही अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पहली भारतीय अमेरिकी महिला बन चुकी हैं

जोवेनेल मोइसे ने हैती में राष्ट्रपति चुनाव जीता-(05-JAN-2017) C.A

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jovenelwinshaitipresidentelectionजोवेनेल पूर्व राष्ट्रपति मिशेल मार्टेली की पार्टी हैतीयन टेट केल पार्टी (पीएचटीके) से संबंध रखते हैं. उन्हें चुनावों में 55.6 प्रतिशत वोटों से बहुमत प्राप्त हुआ. उनके प्रतिद्वंदी जूड सेलेस्टाइन को 19.5 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए. हैती में 20 नवम्बर 2016 को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हुए थे.

मुख्य बिंदु

•    उन्होंने जीतने के बाद भाषण में भ्रष्टाचार से लड़ने तथा देश में राष्ट्रीय एकता का संचार करने का वचन दिया.

•    जोवेनेल के जीतने के बाद अन्य प्रत्याशियों ने उनपर धोखाधड़ी का आरोप लगाया.

•    अन्य प्रत्याशी मारयीस नार्सिस ने 9 प्रतिशत वोटों के साथ चौथा स्थान हासिल किया जबकि जीन चार्ल्स ने 11 प्रतिशत वोटों के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया.

•    इलेक्टोरल ट्रिब्यूनल ने उनकी जीत पर घोषणा की कि इसमें कोई घोटाला नहीं है तथा किसी प्रकार की धोखाधड़ी नही हुई.

यह निर्णय उस समय आया है जब कैरिबियन देश कुछ समय पहले आये चक्रवाती तूफ़ान मैथ्यू से हुए भारी नुकसान से उबर रहा है. इस तूफ़ान में 1000 से अधिक लोग मारे गये थे तथा एक लाख से भी अधिक लोगों को अपना घर छोड़कर विस्थापित होना पड़ा.

जोवेनेल मोइसे

•    48 वर्षीय जोवेनेल एक केला निर्यात कम्पनी चलाते हैं जिसे वे ग्रामीण विकास का मॉडल समझते हैं.

•    उन्होंने अपने चुनावी प्रचार के दौरान स्वयं को ‘बनाना मैन’ कहा था.

•    उन्हें पूर्व राष्ट्रपति मिशेल मार्टेली की पार्टी हैतीयन टेट केल पार्टी द्वारा प्रत्याशी चुना गया.

फ़िनलैंड ने बेरोजगारों को बेसिक सैलरी देने की घोषणा की-(05-JAN-2017) C.A

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फ़िनलैंड ने अपने बेरोजगार नागरिकों को प्रतिमाह बेसिक सैलरी देने की घोषणा की. सरकार ने यह कदम देश में गरीबी तथा बेरोजगारी कम करने के लिए उठाया. प्रत्येक बेरोजगार नागरिक को सरकार की ओर से 560 यूरो दिए जायेंगे.

मुख्य बिंदु

•    यह पहल दो वर्ष के लिए आरंभ की गयी है जिसमें लगभग 2000 लोगों का चयन किया गया है.

•    इस संबंध में 1 जनवरी 2017 से ट्रायल आरंभ किया गया.

•    चुनिंदा नागरिकों को प्रत्येक माह 560 यूरो प्रदान किये जायेंगे जिसे वे अपनी इच्छानुसार खर्च कर सकेंगे.

•    चुनिंदा नागरिकों को रोज़गार प्राप्त होने के बाद भी यह राशि मिलती रहेगी.

•    अधिकारिक डाटा के अनुसार प्राइवेट सेक्टर में कार्यरत लोगों की प्रति व्यक्ति मासिक आय 3500 यूरो है.
योजना का उद्देश्य 

•    इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश से गरीबी तथा बेरोजगारी समाप्त करना है.

•    इस योजना से लोगों में आभाव की भावना भी कम की जाएगी.

•    वर्तमान में फ़िनलैंड में एक बेरोजगार व्यक्ति इस भय से कम आय का रोज़गार नहीं अपनाता क्योंकि उसे सरकार से मिलने वाले लाभ को खोने का डर रहता है.

यदि सरकारी भत्तों के स्थान पर बेसिक सैलरी दी जाये तो लोग और भी काम करने के लिए प्रेरित होंगे क्योंकि उन्हें पता होगा कि उन्हें घर बैठे कोई दूसरा भत्ता नहीं मिलेगा. इस योजना के चलते फ़िनलैंड की सरकार यह अपेक्षा कर रही है कि अब रोज़गार तलाश करेगी जिससे सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा.

फ़िनलैंड की जनता द्वारा कमाई करने से सरकार को 49.1 बिलियन यूरो अर्थात 3 लाख 58 हज़ार करोड़ रुपये की कमाई राजस्व से हो जाएगी.

भारत ने सैफ महिला चैंपियनशिप ख़िताब जीता-(05-JAN-2017) C.A

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भारतीय टीम द्वारा यह ख़िताब लगातार चौथी बार जीता गया.

फाइनल मुकाबले में भारत के लिए दंगमी ग्रेस द्वारा 12वें मिनट में पहला गोल किया गया. दूसरे हाफ में भारत की सस्मिता मलिक एवं इंदुमती द्वारा एक-एक गोल किये गये. 

सैफ महिला चैंपियनशिप

•    इसे दक्षिण एशिया फुटबॉल संघ महिला कप के नाम से भी जाना जाता है.

•    यह महिला फुटबॉल टीम हेतु बनाया गया एक मुख्य एसोसिएशन है.

•    इसका आयोजन दक्षिण एशिया फुटबॉल संघ द्वारा किया जाता है.

•    प्रतियोगिता में दक्षिण एशिया देशों की फुटबॉल टीमें भाग लेती हैं.

•    इन टीमों में भारत, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान तथा श्रीलंका शामिल हैं.

•    यह प्रतियोगिता प्रत्येक दो वर्ष बाद आयोजित की जाती है.

•    अब तक भारत ने हर बार नेपाल को फाइनल में हराकर ख़िताब जीता, वर्ष 2016 में पहली बार भारत ने बांग्लादेश को हराकर ख़िताब जीता था.

•    वर्ष 2016 का सैफ चैंपियनशिप इन खेलों का चौथा मुकाबला था. अब तक भारत ने सभी मुकाबले जीते हैं.

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दक्षिण एशिया फुटबॉल संघ

•    इसकी स्थापना वर्ष 1997 में की गयी.

•    भूटान ने वर्ष 2000 में तथा अफगानिस्तान ने 2005 में सैफ में भागीदारी आरंभ की.

•    फरवरी 2015 में अफगानिस्तान ने सेंट्रल एशियन फुटबॉल एसोसिएशन के साथ जुड़ने पर स्वयं को सैफ से पृथक कर लिया.

धोनी ने एकदिवसीय और ट्वेंटी-20 क्रिकेट कप्तानी से इस्तीफ़ा दिया-(05-JAN-2017) C.A

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Mahendra Singh Dhoniमहेंद्र सिंह धोनी ने 4 जनवरी 2017 को एकदिवसीय और ट्वेंटी 20 क्रिकेट में भारतीय टीम की कप्तानी से इस्तीफा दिया. वे टेस्ट टीम की कप्तानी पहले ही छोड़ चुके हैं.

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा जारी जानकारी के अनुसार धोनी ने क्रिकेट के दोनों फॉर्मेट की कप्तानी छोड़ने का फैसला लिया लेकिन वे इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली वनडे और टी-20 श्रृंखला में विकेटकीपर-बल्लेीबाज के तौर पर चयन के लिए उपलब्ध  रहेंगे.

बीसीसीआई के सीईओ राहुल जौहरी ने बयान जारी कर कहा, “हर भारतीय क्रिकेट फैन तरह मैं एमएस धोनी को क्रिकेट के सारे फॉर्मेट में उनके योगदान के लिए शुक्रिया अदा करता हूं. उनके नेतृत्व में भारतीय टीम ने नई बुलंदियों को छुआ, भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम इतिहास में उनका नाम हमेशा दर्ज हो गया.”
महेंद्र सिंह धोनी

•    एम एस धोनी का जन्म 7 जुलाई 1981 को झारखंड के रांची में हुआ.

•    धोनी ने दिसंबर 2004 में बांग्लादेश के खिलाफ खेलते हुए एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों में पदार्पण किया.

•    उन्होंने दिसंबर 2005 में श्रीलंका के खिलाफ खेलते हुए अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैच में पदार्पण किया.

•    धोनी ने 283 वन-डे मैच खेले जिनमें उनका औसत 50.89 रहा तथा उन्होंने 9110 रन बनाए. इसमें 9 शतक और 61 अर्धशतक शामिल थे.

•    धोनी को उनकी आक्रामक बल्लेबाजी तथा हेलिकॉप्टर शॉट के लिए जाना जाता है.

•    उनकी कप्तानी में भारत ने 28 वर्ष बाद वर्ष 2007 में आईसीसी ट्वेंटी-20 विश्व कप जीता.

•    इसके अतिरिक्त उनकी कप्तानी के दौरान भारत ने 2007-08 कॉमनवेल्थ बैंक सीरीज, 2007-2008 में सीबी सीरीज़ और बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी जैसे विभिन्न मुकाबले भी जीते.

•    उन्हें वर्ष 2009 में देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पदम् श्री से सम्मानित किया गया.

•    वर्ष 2008 में उन्हें देश का सर्वोच्च खेल पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार दिया गया.

सोमदेव देववर्मन ने पेशेवर टेनिस से संन्यास लेने की घोषणा की-(05-JAN-2017) C.A

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भारत के स्टार एकल खिलाड़ी सोमदेव देववर्मन ने 1 जनवरी 2017 को पेशेवर टेनिस से संन्यास लेने की घोषणा की. सोमदेव देववर्मन ने वर्ष 2008 में टेनिस में पदार्पण किया था, तब से वे भारत के स्टार सिंगल्स खिलाड़ी थे. उनका करियर वर्ष 2012 में कंधे में बार-बार वापसी करने वाली चोट से थम गया.
सोमदेव देववर्मन ने दो एटीपी टूर वर्ष 2009 चेन्नई ओपन में बतौर वाइल्डकार्ड और वर्ष 2011 दक्षिण अफ्रीका ओपन के फाइनल में पहुंचे थे.
सोमदेव देववर्मन के बारे में:
•    सोमदेव देववर्मन का जन्म 13 फरवरी 1985 को हुआ था.
•    उन्हें वर्ष 2011 में देश के दूसरे सर्वोच्च खेल सम्मान अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
•    भारत की डेविस कप टीम के नियमित सदस्य सोमदेव देववर्मन 14 मुकाबलों में खेल चुके हैं.
•    उन्होंने वर्ष 2010 में भारत को विश्व ग्रुप में पहुंचाने में अहम भूमिका अदा की थी.
•    उन्होंने वर्ष 2010 में दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स और चीन के ग्वांग्झू में हुए एशियन गेम्स में सिंगल्स में स्वर्ण पदक जीते.
•    उनका वर्ष 2008 में एनसीएए पुरूष टेनिस चैंपियनशिप में बनाया गया जीत-हार का 44-1 रिकार्ड अभी तक कायम है.
•    उन्होंने एशियन गेम्स की डबल्स स्पर्धा में स्वर्ण पदक और टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीता.
•    उन्होंने 14 रबर में भारत का प्रतिनिधित्व किया.
टेनिस के बारे में:
•    टेनिस खेल 2 टीमों के बीच गेंद से खेले जाने वाला एक खेल है जिसमें एकल मुकाबले में कुल 2 खिलाडी या युगल मुकाबले में 4 खिलाड़ी होते हैं.
•    टेनिस के बल्ले को टेनिस रैकट और मैदान को टेनिस कोर्ट कहते है.
•    टेनिस की शुरूआत फ्रांस में मध्य काल मे हुई मानी जाती है.
•     उस समय यह खेल इन-डोर अर्थात् छत के नीचे हुआ करता था

भारतीय फर्म द्वारा कार्बन अवशोषण में सफलता प्राप्त की गयी-(05-JAN-2017) C.A

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तूतीकोरन स्थित भारत की एक फर्म द्वारा कार्बन अवशोषण में पूर्ण सफलता प्राप्त की गयी. औद्योगिक इकाईयों से होने वाला कार्बन उत्सर्जन मनुष्य स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है.

तूतीकोरन औद्योगिक बंदरगाह पर मौजूद तूतीकोरन अल्काली केमिकल्स द्वारा अपने ही कोयला आधारित बॉयलर से होने वाले कार्बन उत्सर्जन का पूर्ण अवशोषण करके उसे बेकिंग पाउडर बनाया गया.

इस तकनीक के लिए सरकार से किसी प्रकार की सहायता नहीं दी जाती लेकिन इससे प्रदेश के सैंकड़ों लोगों को लाभ होगा. 

मुख्य बिंदु


•    तूतीकोरन फर्म के अनुसार इस औद्योगिक ईकाई में प्रतिवर्ष 60 हज़ार टन उत्सर्जित कार्बन को अवशोषित करके बेकिंग पाउडर बनाया जाता है.

•    फर्म को इस तकनीक के लिए विश्व भर से आवेदन प्राप्त हो रहे हैं.

•    कार्बन उत्सर्जन के लिए विश्व भर में भूमिगत चट्टानों में कार्बन उत्सर्जन करने के लिए विचार चल रहा है लेकिन इसका उपयोग बेकिंग सोडा बनाकर किया जाना इस क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करता है. 

•    औद्योगिक पैमाने पर इस कदम के महत्व को इस बात से समझा जा सकता है कि अमेरिका और फ्रांस की औद्योगिक ईकाईयो ने भी इस पद्धति को जानने में इच्छा जाहिर की है.

•     औद्योगिक ईकाई के प्रबंध निदेशक रामचंद्रन गोपालन के अनुसार उनके प्लांट से हवा और पानी में शून्य कार्बन उत्सर्जन किया जा रहा है.

कार्बन उत्सर्जन में भारत की स्थिति

कार्बन उत्सर्जन में भारत चौथे स्थान पर आता है.विश्व बैंक के वर्ष 2011 के आंकड़ों के अनुसार चीन, अमेरिका, यूरोपियन यूनियन, भारत, रूस, जापान एवं कनाडा विश्व के सबसे अधिक कार्बन उत्सर्जन करने वाले देश हैं. भारत द्वारा प्रतिवर्ष 1.67 मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन किया जाता है.

राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड ने केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को मंजूरी प्रदान की-(05-JAN-2017) C.A

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राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड ने केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को मंजूरी प्रदान कर दी है. केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती के अनुसार परियोजना के मार्ग में अंतिम रुकावट समाप्त होने के बाद इसके निर्माण कार्य हेतु वित्तीय प्रबंधन को अंतिम रूप प्रदान किया जाएगा.

केन-बेतवा नदी जोडो परियोजना के बारे में-
  • केन-बेतवा नदी जोडो परियोजना में 230 किलोमीटर लंबी नहर, बैराज और बांधो की श्रृंखला होगी.
  • नहर, बैराज और बांधो की श्रृंखला ही केन और बेतवा नदियों को जोड़ने का काम करेगी.
  • परियोजना से लगभग 10 गावों के 6388 नागरिक भी जलाशय से डूब के कारण प्रभावित हो सकते हैं.
  • 28 गांव के 13499 ग्रामीण मकोडिया जलाशय में डूब के कारण प्रभावित होंगे जिन्हें दूसरे स्थानों पर बसाना होगा.
  • परियोजना से दोनों राज्यों के सत्रह लाख निवासियों को पीने का पानी और सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा.
  • परियोजना से मध्य प्रदेश में 3.5 लाख हेक्टेयर और उत्तर प्रदेश (बुंदेलखंड) की 14000 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की जा सकेगी.
  • परियोजना से दोनों प्रदेश के छः जिलों में मध्य प्रदेश के छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, रायसेन, और विदिशा तथा उत्तरप्रदेश के महोबा, झांसी, और बांदा जिलों को लाभ मिलेगा.
  • परियोजना से इन जिलों में सिंचाई, पानी की सप्लाई और बिजली व्यवस्था में सुधार होगा.
  • परियोजना के अंतर्गत मकोडिया और धौधन बांध के निर्माण के बाद के 77 मीटर ऊंची पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ निवास स्थान की 5803 हेक्टेयर जमीन के भी जलमग्न होने का अंदेशा है.
  • प्रस्तावित केन बेतवा नदी जोडो परियोजना जलाशय के डूब क्षेत्र में छतरपुर जिले के 12 गांव प्रभावित होंगे. जिसमें पांच आंशिक रूप से और 7 गांव पूर्ण रूप से प्रभावित होंगे.
केन बेतवा नदी जोडो परियोजना का महत्व-
  • केन बेतवा नदी जोडो परियोजना को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि यदि यह प्रयोग सफल होता है तो देश की विभिन्न नदियों को आपस में जोड़ने वाली 30 अन्य योजनाओं को भी साकार रूप दिया जा सकेगा.
  • इस परियोजना से देश के दो प्रदेश उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश को लाभ मिलेगा.
डीपीआर के अनुसार उत्तरप्रदेश को केन नदी का अतिरिक्त पानी देने के बाद मध्यप्रदेश में पानी की समस्या नहीं होगी, क्योंकि बेतवा की ऊपरी धारा से उतने ही पानी की आपूर्ति मध्यप्रदेश को स्वत: हो जाएगी.
परियोजना के दूसरे चरण में मध्यप्रदेश चार बांध बनाकर रायसेन और विदिशा जिलों में भी सिंचाई का इंतजाम करेगा.
केन बेतवा नदी पर अन्य प्रस्तावित योजनाएं-
  • यहां दो बिजली संयंत्र भी बनाने का प्रस्ताव है.
  • परियोजना के तहत 220 किलोमीटर लम्बी नहर भी निकालने की बात कही गई है जो मध्यप्रदेश के छतरपुर, टीकमगढ़ और उत्तरप्रदेश के महोबा, झांसी व अन्य जिलों से होकर गुजरेगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तिरूपति में 104वें भारतीय विज्ञान कांग्रेस सम्मेलन का उद्घाटन किया-(05-JAN-2017) C.A

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री वेंकेटेश्वर विश्वविद्यालय में पांच दिवसीय भारतीय विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन किया. इस भारतीय विज्ञान कांग्रेस का थीम है: राष्ट्रीय विकास के वास्ते विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नोबेल शांति पुरस्कार विजेताओं समेत मशहूर वैज्ञानिकों की सभा को संबोधित किया. प्रधानमंत्री बनने के बाद यह दूसरा मौका होगा जब नरेन्द्र मोदी तिरुपति बालाजी मंदिर में आएंगे.
इसके पहले वे पिछले वर्ष 22 अक्टूबर को मंदिर आए थे. पहली बार 1983 में यहां 70 भारतीय विज्ञान कांग्रेस हुई थी. इस साल यह 104 वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस है.
तिरूपति दूसरी बार भारतीय विज्ञान कांग्रेस की मेजबारी कर रहा है.
104वें भारतीय विज्ञान कांग्रेस सम्मेलन से संबंधित मुख्य तथ्य:
•    देशभर के 14,000 वैज्ञानिकों एवं विद्वानों के अतिरिक्त अमेरिका, इस्राइल, जापान, फ्रांस और बांग्लादेश जैसे विभिन्न देशों के छह नोबेल पुरस्कार विजेता भी इसमें भाग लेंगे.
•    नोबेल पुरस्कार विजेताओं को प्रधानमंत्री द्वारा स्वर्ण पदक प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा.
•    नरेन्द्र मोदी विश्वविद्यलाय में नोबेल पुरस्कार विजेताओं, गणमान्य अतिथियों, मशहूर भारतीय वैज्ञानिकों एवं शीर्ष अधिकारियों समेत 50 लोगों के साथ संक्षिप्त संवाद भी करेंगे.
भारतीय विज्ञान कांग्रेस के बारे में:
•    भारतीय विज्ञान कांग्रेस भारतीय वैज्ञानिकों की शीर्ष संस्था है.
•    इसकी स्थापना सन् 1914 में हुई थी.
•    इसका मुख्यालय कोलकाता, पश्चिम बंगाल में है.
•    प्रतिवर्ष जनवरी के प्रथम सप्ताह में इसका सम्मेलन होता है.
•    इसकी स्थापना का उद्देश्य भारत में विज्ञान को बढ़ावा देने के लिये किया गया था.
•    लगभग 30000 से अधिक वैज्ञानिक भारतीय विज्ञान कांग्रेस एसोसिएशन के सदस्य हैं.

डीआरडीओ ने परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मिसाइल अग्नि-4 का सफल परीक्षण किया-(05-JAN-2017) C.A

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डीआरडीओ (डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन) ने 02 जनवरी 2017 को बालासोर से अग्नि-4 मिसाइल का सफल परीक्षण किया. परमाणु क्षमता से संपन्न स्ट्रैटजिक मिसाइल अग्नि-4 की मारक क्षमता 4 हजार किमी है.

मिसाइल अग्नि-4 एटमी हथियार भी ले जाने में सक्षम है. इससे पहले 27 दिसंबर 2016 को अब्दुल कलाम आईलैंड से 5 हजार किमी रेंज वाली अग्नि-5 का भी सफल परीक्षण किया गया. इसका परीक्षण ओडिशा के बालासोर तट पर किया गया. यह मिसाइल अग्नि-4 चीन की राजधानी बीजिंग तक लक्ष्य भेद सकती है. 

मुख्य तथ्य-
  • पूर्व में इस मिसाइल की मारक क्षमता 3500 किमी तक थी.
  • मिसाइल अग्नि-4 सतह से सतह तक मार करने में सक्षम है.
  • भारत इंटरकॉन्टीनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल आईसीबीएम /(ICBM) बनाने वाला पांचवा देश है.
  • भारत से पहले अमेरिका, रूस, फ्रांस और चीन इस तरह की मिसाइल विकसित कर चुके हैं.
  • इस अग्नि-4 मिसाइल को रोड मोबाइल लॉन्चर से प्रक्षेपित किया जा सकता है.
  • अग्नि-4 मिसाइल में सटीक लक्ष्य साधने हेतु रिंग लेजर गायरो बेस्ड इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (RINS), माइक्रो नेविगेशन सिस्टम (MNS) लगाए गए हैं.
  • मिसाइल अग्नि-4 1000 टन तक वॉरहेड ले जाने में सक्षम है.
  • सॉलिड फ्यूल से चलने वाली मिसाइल अग्नि-4 में दो इंजन प्रत्यारोपित किए गए हैं. इसकी लंबाई 20 मीटर और लॉन्च वेट 17 टन है.
  • मिसाइल अग्नि-4 उड़ान के दौरान आने वाले अवरोधों को स्वत: ठीक एवं दिशा निर्देशित कर सकती हैं.
भारत और पाक की एटमी मिसाइलें-
  • भारत और पाकिस्तान दोनों देशों की मिसाइल टेक्नोलॉजी में बड़ा अंतर है.
  • भारत 5000 किलोमीटर तक वार करने वाली परमाणु मिसाइल अग्नि-5 तैयार कर चुका है.
  • भारत में 10 हजार किलोमीटर तक मारक क्षमता वाली मिसाइल टेक्नोलॉजी भी विकसित की जा रही है.
  • पाकिस्तान की मिसाइल टेक्नोलॉजी अभी शाहीन-3 तक ही सीमित है. इसकी रेंज 2750 किमी तक है.
  • पाकिस्तान तैमूर इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइल टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है जिसकी क्षमता अग्नि-5 के समक्ष होगी. यानी पाकिस्तान अभी भारत से एक कदम पीछे है.
  • शाहीन 3 को लेकर पाकिस्तान आर्मी का दावा है कि यह पूरे भारत में कहीं भी निशाना लगाने में सक्षम है.
  • पाकिस्तान आर्मी के अमुसार शाहीन 3 पूर्व में म्यांमार, पश्चिम में इजरायल और उत्तर में कजाखिस्तान तक एटमी हथियार से हमला कर सकती है.
  • दिल्ली से बीजिंग तक की दूरी 3,807 किलोमीटर है. मिसाइल अग्नि-4 की मारक क्षमता 4000 किलोमीटर की दूरी तक है. अब चीन की राजधानी बीजिंग भी अग्नि- 4 के दायरे में है.
अग्नि रेंज की मिसाइल की बढती मार्क क्षमता-
  • अग्नि 1- 700 किमी
  • अग्नि 2- 2000 किमी
  • अग्नि 3- 2500-3500 किमी
  • अग्नि-4- 4000 किमी
  • अग्नि 5- 5000 किमी

अग्नि-5 की जद में आधी दुनिया
  • अमेरिका को छोड़कर पूरा एशिया, अफ्रीका और यूरोप भारत की मिसाइल अग्नि-5के दायरे में होगा.
  • भारत की इस सर्वाधिक ताकतवर मिसाइल की रेंज में पूरा पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इराक, ईरान और करीब आधा यूरोप आता है.
  • अग्नि-5 चीन, रूस, मलेशिया, इंडोनशिया और फिलीपींस तक लक्ष्य पर निशाना लगाने में सक्षम है.
  • मध्यम-दूरी तक वार करने में सक्षम पृथ्वी और धनुष मिसाइलों के अतिरिक्त एसएफसी (SFC) ने भारतीय बेड़े में अग्नि-1, अग्नि-2 और अग्नि-3 मिसाइलों को भी शामिल किया.

सरकार ने मलेरिया उन्मूलन हेतु ओडिशा के 8 हजार गांवों में दमन अभियान आरम्भ करने की घोषणा की-(05-JAN-2017) C.A

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ओडिशा राज्य सरकार ने मलेरिया उन्मूलन हेतु प्रदेश के आठ सुदूरवर्ती जिलों में दमन नामक अभियान आरम्भ करने की घोषणा की है. सरकार के इस फैसले से 79 ब्लाक के आठ हजार गांवों के लोगों को मलेरिया उन्मूलन अभियान ‘दमन’ का लाभ मिलेगा.
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मलेरिया से मुक्ति हेतु अनोखे अभियान के तहत आठ हजार गांवों में ‘दमन’ आरम्भ करने की स्वीकृति राज्य सरकार द्वारा प्रदान की गयी है.
अभियान के बारे में- 
मलेरिया उन्मूलन अभियान के प्रथम चरण में गजपति, कालाहांडी, कोरापट, मलकानगिरि, नबरंगपुर, नुआपाडा और रायगड़ सुदूरवर्ती जिले शामिल हैं.
इन्ही जिलों में 10 से अधिक मलेरिया पीड़ितों के मामले सामने आए हैं.
प्रथम चरण के अभियान से 80 लाख लोग लाभान्वित होंगे. 
ओडिशा राज्य सरकार ने इस पंचवर्षीय अभियान हेतु 120 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है.
शुरुआत में इस अभियान पर 25 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.

प्रक्रिया- 
अभियान के तहत लोगों को जागरूक किया जाएगा.
उनकी जांच की जाएगी और उनका उपचार किया जाएगा.
इसके तहत दवा भी उपलब्ध कराई जाएगी.
अभियान के तहत लोगों को 44 लाख मच्छरदानी भी उपलब्ध कराई जाएगी.

सरकार का लक्ष्य- 
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार भारत में मलेरिया की वजह से हर साल बाईस हजार लोगों की मौत होती है
आकड़ों के अनुसार दो करोड़ लोग इसकी चपेट में आते हैं.
भारत के विभीन राज्यों के आदिवासी क्षेत्रों में मलेरिया बीते पांच सालों से तीन से छह फीसद की रफ्तार से बढ़ रहा है.
फेल्सिपेरम मलेरिया की अधिकता की वजह से दूर-दराज गांवों में स्थिति अत्यंत गंभीर हुई है.
मलेरिया के जीवाणु खत्म होंने के बाद भी पुन: विकसित हो जाते हैं.

मलेरिया के जीवाणु दुनिया भर में हर साल पच्चीस से पचपन करोड़ लोगों पर हमला करके आठ से नौ लाख लोगों की जान ले लेते है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में हर साल मलेरिया से करीब पच्चीस लाख लोग प्रभावित होते हैं.
जिनमें हर साल एक हजार लोगों की मौत हो जाती है.
आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखंड और ओड़ीशा जैसे राज्यों में सबसे अधिक मलेरिया का प्रभाव बीते बीस वर्ष से देखने को मिल रहा है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अगले पंद्रह से अट्ठारह साल तक फंड तिगुना करने के बाद ही भारत मलेरिया पर नियंत्रण पाया जा सकता है.
केंद्र सरकार ने वर्ष 2030 तक भारत को मलेरिया मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है.

ओड़िसा के हालात-
30 अक्टूबर 2016 तक ओडिशा में मलेरिया के कारण 69 व्यक्तियों की मृत्यु हुई. यह आंकड़े अन्य राज्यों की तुलना में भारत में सबसे अधिक है.
ओड़िसा में 30 अक्टूबर 2016 तक कुल 3.71 लाख लोगों का मलेरिया हेतु सकारात्मक परीक्षण किया है, जो भारत में किसी भी राज्य के लिए सर्वाधिक है.
वर्ष 2015-2016 में ओड़िसा के जिलों में चलाए गए मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम में लगभग 60 फीसदी मामलों में से 56 प्रतिशत मामलों में पीड़ित मृत्यु के शिकार हुए.