केरल राज्य के सभी मंदिरों ने 16 जुलाई 2016 को रामायण माह मनाना शुरु किया. मलयालम में इसे रामायण मासम कहते हैं. केरल के मंदिरों में रामायण माह– कारक्कीदकम, मलयालयम कैलेंडर का आखिरी महीना केरल में रामायण माह के रूप में मनाया जाता है.
इस माह के दौरान राज्य भर के घरों और मंदिरों में 30 दिनों तक थुंजथ एज्हुथाचन द्वारा रचित आध्यात्म रामायण कीलीप्पाट्टू का पाठ किया जाता है. एज्हुथाचन को मलयालम साहित्य का पिता माना जाता है.
महाकाव्य रामायण का पाठ महीने के पहले दिन से शुरु होता है और महीने के आखिरी दिन को पूरा होता है. घर के बड़े सदस्यों द्वारा पर्तिदिन शाम को रामायण का पाठ पारंपरिक दीप नीलावीलाक्कु के जलाने के बाद किया जाता है.
रामायण माह के दौरान राज्य भर में रामायण पर आधारित कई प्रकार की प्रतियोगिताएं एवं सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं. यह अनूठा रिवाज राज्य में सदियों से चला आ रहा है.
कारक्कीदकम:
कारक्कीदकम (जुलाई– अगस्त), मलयालम कैलेंडर का आखिरी महीना होता है और इसे बारिश और कमी (पंजाम्मासोम) का महीना माना जाता है. यह मॉनसून के साथ आने वाली विभिन्न कठिनाइयों से जूझने के साथ परिवारों में सौभाग्य एवं समृद्धि के साथ आध्यात्मिक शक्ति का संचार करता है.
कारक्कीदकम के बाद चिंगम का महीना आता है जिसमें मलयाली लोग ओणम का रंगारंग त्यौहार मनाते हैं.
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