विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) ने 2 मार्च 2016 को वैश्विक ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदर्शन सूचकांक रिपोर्ट-2016 जारी की जिसमें 126 देशों के आंकड़े मौजूद हैं. भारत इस सूची में 90वें स्थान पर है.
यह वार्षिक सूचकांक में शामिल देशों को ऊर्जा परिवर्तन की चुनौतियों का हल ढूंढने एवं उचित अवसरों की पहचान करने में मदद प्रदान करता है.
इसमें 126 देशों के ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को शामिल किया गया है जो "ऊर्जा त्रिकोण" सामर्थ्य, पर्यावरणीय स्थिरता, सुरक्षा और उपयोग के तीन आयामों की क्षमता पर आधारित है.
डब्ल्यूईएफ ने एक्सेंचर के सहयोग से यह रिपोर्ट तैयार की है जिससे आर्थिक विकास का समर्थन करने एवं लचीला एवं टिकाऊ विकास तैयार करने में मदद मिलती है.
यह वार्षिक सूचकांक में शामिल देशों को ऊर्जा परिवर्तन की चुनौतियों का हल ढूंढने एवं उचित अवसरों की पहचान करने में मदद प्रदान करता है.
इसमें 126 देशों के ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को शामिल किया गया है जो "ऊर्जा त्रिकोण" सामर्थ्य, पर्यावरणीय स्थिरता, सुरक्षा और उपयोग के तीन आयामों की क्षमता पर आधारित है.
डब्ल्यूईएफ ने एक्सेंचर के सहयोग से यह रिपोर्ट तैयार की है जिससे आर्थिक विकास का समर्थन करने एवं लचीला एवं टिकाऊ विकास तैयार करने में मदद मिलती है.
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
• सूची में स्विट्ज़रलैंड का पहला स्थान है, दूसरे स्थान पर नॉर्वे एवं तीसरे स्थान पर स्वीडन शामिल हैं. भारत को 90वां स्थान प्राप्त हुआ.
• पहले 10 स्थानों में शामिल अन्य देश हैं – (4) फ़्रांस, (5) डेनमार्क, (6) ऑस्ट्रिया, (7) स्पेन, (8) कोलंबिया, (9) न्यूज़ीलैण्ड, (10) उरुग्वे.
• ब्रिक्स देशों में ब्राज़ील पहले स्थान पर रहा जिसे 25वां स्थान प्राप्त हुआ इसके बाद रूस (52) भारत (90) एवं चीन (94) शामिल हैं.
• अन्य वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में जर्मनी को 24वां स्थान प्राप्त हुआ जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका 48वें स्थान पर रहा वहीँ जापान का स्थान 50वां रहा.
• रिपोर्ट के अनुसार विश्व में उर्जा का उत्पादन एवं आयात 3200 मिलियन टन तेल के बराबर है. इस आयात में भारत एवं चीन जैसी एशियाई अर्थव्यवस्थाएं मुख्य रूप से शामिल हैं.
• परिणामस्वरूप ईंधन व्यापार संस्थाओं में तेजी से बदलाव देखा गया. वर्ष 2004 में एशिया में विश्व के कुल ईंधन का 20 प्रतिशत आयात किया गया. वर्ष 2014 में यह 35 प्रतिशत हो गया.
भारत के सन्दर्भ में
भारत को 90वें स्थान पर रखते हुए रिपोर्ट के अनुसार भारत में विभिन्न चुनौतियां भी मौजूद हैं जैसे - विकास के लक्ष्य को पूरा करने के लिए ऊर्जा वितरण बढ़ाने एवं ऊर्जा उपयोग का विस्तार करने की आवश्यकता. वर्तमान में पहले की तुलना में विद्युतीकरण बढ़ा है एवं 79 प्रतिशत जनता को आसानी से सुलभ है.
उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए अधिक उर्जा कुशल, कम कार्बन उत्सर्जन एवं अधिक विविधता आवश्यक है.
• सूची में स्विट्ज़रलैंड का पहला स्थान है, दूसरे स्थान पर नॉर्वे एवं तीसरे स्थान पर स्वीडन शामिल हैं. भारत को 90वां स्थान प्राप्त हुआ.
• पहले 10 स्थानों में शामिल अन्य देश हैं – (4) फ़्रांस, (5) डेनमार्क, (6) ऑस्ट्रिया, (7) स्पेन, (8) कोलंबिया, (9) न्यूज़ीलैण्ड, (10) उरुग्वे.
• ब्रिक्स देशों में ब्राज़ील पहले स्थान पर रहा जिसे 25वां स्थान प्राप्त हुआ इसके बाद रूस (52) भारत (90) एवं चीन (94) शामिल हैं.
• अन्य वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में जर्मनी को 24वां स्थान प्राप्त हुआ जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका 48वें स्थान पर रहा वहीँ जापान का स्थान 50वां रहा.
• रिपोर्ट के अनुसार विश्व में उर्जा का उत्पादन एवं आयात 3200 मिलियन टन तेल के बराबर है. इस आयात में भारत एवं चीन जैसी एशियाई अर्थव्यवस्थाएं मुख्य रूप से शामिल हैं.
• परिणामस्वरूप ईंधन व्यापार संस्थाओं में तेजी से बदलाव देखा गया. वर्ष 2004 में एशिया में विश्व के कुल ईंधन का 20 प्रतिशत आयात किया गया. वर्ष 2014 में यह 35 प्रतिशत हो गया.
भारत के सन्दर्भ में
भारत को 90वें स्थान पर रखते हुए रिपोर्ट के अनुसार भारत में विभिन्न चुनौतियां भी मौजूद हैं जैसे - विकास के लक्ष्य को पूरा करने के लिए ऊर्जा वितरण बढ़ाने एवं ऊर्जा उपयोग का विस्तार करने की आवश्यकता. वर्तमान में पहले की तुलना में विद्युतीकरण बढ़ा है एवं 79 प्रतिशत जनता को आसानी से सुलभ है.
उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए अधिक उर्जा कुशल, कम कार्बन उत्सर्जन एवं अधिक विविधता आवश्यक है.
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