ईरान में 29 फरवरी 2016 को 2016 के संसदीय चुनाव के परिणाम घोषित किये गये. इस दौरान 290 सीटों के लिए चुनाव हुए जिसमें बहुमत प्राप्त करने के लिए 146 सीटों पर जीत आवश्यक थी.
ऐसा माना जा रहा था कि चुनाव में कट्टरपंथियों और सुधारवादी पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला होगा. चुनाव नतीजे आने के बाद किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला. ईरान में वर्ष 2015 के परमाणु समझौते के बाद एवं अन्तरराष्ट्रीय प्रतिबन्ध हटाए जाने के बाद 26 फरवरी 2016 को चुनाव आयोजित किये गये.
नतीजों के बाद रूहानी के सुधारवादी और नरमपंथी सहयोगियों एवं निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच सीटों का बंटवारा किया गया. लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि राष्ट्रपति वही होगा जिसके समर्थक सबसे अधिक होंगे एवं बहुमत बनाने में सफल होगा. नरमपंथी एवं नरमपंथी परम्परावादियों को सबसे अधिक मत मिले हैं तथा वे मिलकर सरकार बना सकते हैं.
सुधारवादी और कट्टरपंथियों के बीच, कट्टरपंथियों ने 88 सदस्यीय असेंबली ऑफ़ एक्सपर्ट्स में अपनी सीटों को खो दिया.
इन परिणामों के आने एवं गठबंधन द्वारा सरकार बनने से विश्व में ईरान छवि सुधरेगी. इससे देश के परमाणु कार्यक्रमों में भी बदलाव लाये जा सकेंगे. गौरतलब है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम की अमेरिकी राजनितिकों द्वारा कड़ी आलोचना की गयी थी.
नतीजों के बाद रूहानी के सुधारवादी और नरमपंथी सहयोगियों एवं निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच सीटों का बंटवारा किया गया. लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि राष्ट्रपति वही होगा जिसके समर्थक सबसे अधिक होंगे एवं बहुमत बनाने में सफल होगा. नरमपंथी एवं नरमपंथी परम्परावादियों को सबसे अधिक मत मिले हैं तथा वे मिलकर सरकार बना सकते हैं.
सुधारवादी और कट्टरपंथियों के बीच, कट्टरपंथियों ने 88 सदस्यीय असेंबली ऑफ़ एक्सपर्ट्स में अपनी सीटों को खो दिया.
इन परिणामों के आने एवं गठबंधन द्वारा सरकार बनने से विश्व में ईरान छवि सुधरेगी. इससे देश के परमाणु कार्यक्रमों में भी बदलाव लाये जा सकेंगे. गौरतलब है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम की अमेरिकी राजनितिकों द्वारा कड़ी आलोचना की गयी थी.
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