10 फरवरी: नेशनल डीवॉर्मिंग डे
केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने 9 फरवरी 2016 को हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम कें नेशनल डीवॉर्मिंग डे का शुभारंभ किया.
नवजात शिशुओं और स्कूली बच्चों को परजीवी कृमि संक्रमण से संरक्षित करने के लिए और इसके प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए प्रत्येक वर्ष 10 फरवरी को नेशनल डीवॉर्मिंग डे के रूप में मनाया जाता है.
सर्वप्रथम इस दिवस का आयोजन वर्ष 2015 में केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा किया गया था. जिसके अनतर्गत 11 राज्यों/संघ शासित प्रदेश के 277 जिलों के 1 से 19 वर्ष आयु के बच्चों को कवर किया गया था.
इस दिन सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों और आंगनवाड़ी केन्द्रोंस में बच्चों को डीवॉर्मिग गोलियां (Albendazole tablets) का वितरण किया जाता है. 1 से 2 साल के बच्चों को आधी खुराक दी जाती है जबकि 2-19 वर्ष के बच्चों को पूरी खुराक दी जाती है.
यह डीवॉर्मिग गोलियां चबाने योग्य होती हैं.
सर्वप्रथम इस दिवस का आयोजन वर्ष 2015 में केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा किया गया था. जिसके अनतर्गत 11 राज्यों/संघ शासित प्रदेश के 277 जिलों के 1 से 19 वर्ष आयु के बच्चों को कवर किया गया था.
इस दिन सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों और आंगनवाड़ी केन्द्रोंस में बच्चों को डीवॉर्मिग गोलियां (Albendazole tablets) का वितरण किया जाता है. 1 से 2 साल के बच्चों को आधी खुराक दी जाती है जबकि 2-19 वर्ष के बच्चों को पूरी खुराक दी जाती है.
यह डीवॉर्मिग गोलियां चबाने योग्य होती हैं.
इस दिवस का आयोजन संयुक्त रूप से मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा किया जाता है.
इसके अतिरिक्त केन्द्रीय पंचायती राज मंत्रालय, आदिवासी मामलों का मंत्रालय, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय और शहरी विकास मंत्रालय भी इस दिवस के अन्य आयोजक हैं.
यह संक्रमण मुख्य रूप से Soil Transmitted Helminths (एसटीएच) अर्थात पेट के परजीवी से होता है. यह परजीवी पेट में पाए जाते हैं यह खुले में शौच से संक्रमित हुई मृदा को छूने आदि से बच्चों की आतों में पहुँच कर अंडे देते हैं और बच्चों के पोषण को अपने विकास में प्रयोग करते हैं. अंततः यह क्रिया कुपोषण, अनेमिया, मानसिक रोग और कुष्ठ रोग जैसी बीमारियों को जन्म देती है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विश्व में सबसे ज्यादा एसटीएच भारत में हैं जिसके कारण 1 से 14 वर्ष के 220 मिलियन बच्चों के स्वास्थ्य को खतरा है.
केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने 9 फरवरी 2016 को तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले में नेशनल डीवॉर्मिंग कैम्पेन का शुभारम्भ भी किया.
इसके अतिरिक्त केन्द्रीय पंचायती राज मंत्रालय, आदिवासी मामलों का मंत्रालय, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय और शहरी विकास मंत्रालय भी इस दिवस के अन्य आयोजक हैं.
यह संक्रमण मुख्य रूप से Soil Transmitted Helminths (एसटीएच) अर्थात पेट के परजीवी से होता है. यह परजीवी पेट में पाए जाते हैं यह खुले में शौच से संक्रमित हुई मृदा को छूने आदि से बच्चों की आतों में पहुँच कर अंडे देते हैं और बच्चों के पोषण को अपने विकास में प्रयोग करते हैं. अंततः यह क्रिया कुपोषण, अनेमिया, मानसिक रोग और कुष्ठ रोग जैसी बीमारियों को जन्म देती है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विश्व में सबसे ज्यादा एसटीएच भारत में हैं जिसके कारण 1 से 14 वर्ष के 220 मिलियन बच्चों के स्वास्थ्य को खतरा है.
केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने 9 फरवरी 2016 को तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले में नेशनल डीवॉर्मिंग कैम्पेन का शुभारम्भ भी किया.
इस कैम्पेन के अंतर्गत बच्चों को स्कूल और आंगनवाड़ी स्तर पर डीवॉर्मिग गोलियां का वितरण किया जाएगा. इसके अतिरिक्त बच्चों को नाखून काटने , हाथ धोने, अपने पैरों को अच्छे से ढकने और स्वच्छता बनाए रखने के लिए शौचालय का उपयोग करने के लिए शिक्षित किया जाएगा.
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