वरिष्ठ हिंदी साहित्यकार रवींद्र कालिया का 9 जनवरी 2016 को निधन हो गया. वे 78 वर्ष के थे.
लीवर की शिकायत के बाद रवींद्र कालिया को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया था. रवींद्र कालिया ज्ञानपीठ के निदेशक रहे थे.
रवींद्र कालिया का हस्तक्षेप साहित्य के कई क्षेत्रों में रहा. उन्होंने कहानी, उपन्यास, संस्मरण, व्यंग्य और संपादकीय जैसी कई विधाओं में अपने काम से शानदार मिसालें पेश कीं.
लीवर की शिकायत के बाद रवींद्र कालिया को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया था. रवींद्र कालिया ज्ञानपीठ के निदेशक रहे थे.
रवींद्र कालिया का हस्तक्षेप साहित्य के कई क्षेत्रों में रहा. उन्होंने कहानी, उपन्यास, संस्मरण, व्यंग्य और संपादकीय जैसी कई विधाओं में अपने काम से शानदार मिसालें पेश कीं.
• रवींद्र कालिया के कहानी संग्रह में “नौ साल छोटी पत्नी”, “काला रजिस्टर”, “जरा सी रोशनी”, “गरीबी हटाओ”, “उमर तक” और “रवींद्र कालिया की कहानियां” शामिल रहे.
• उपन्यास में “17 रानडे रोड”, “ए बी सी डी” और “खुदा सही सलामत” प्रमुख हैं.
• रवींद्र कालिया के संस्मरणों में गालिब छूटी शराब, रवींद्र कालिया के संस्मरण, कामरेड मोनालिजा और स्मृतियों की जन्मपत्री शामिल हैं.
• इसके अलावा उनके व्यंग्यों में नींद क्यों रात भर नहीं आती और राग मिलावट मालकौंस प्रमुख हैं.
• रवींद्र कालिया ने संपादन के क्षेत्र में भी प्रसिद्धी हासिल की. उन्हें नया ज्ञानोदय का संपादन अपने हाथ में लेकर उसे हिंदी साहित्य जगत के एक अनिवार्य पाठन में बदल दिया. इसके अलावा उन्होंने वागर्थ, गंगा जमुना, वर्ष (अमरकांत पर एकाग्र), मोहन राकेश संचयन, अमरकांत संचयन सहित अनेक पुस्तकों का संपादन भी किया.
• रवींद्र कालिया को कई सम्मान और पुरस्कार भी मिले. इनमें पंजाब सरकार की तरफ से मिला शिरोमणि साहित्य सम्मान, यूपी हिंदी संस्थान की तरफ से लोहिया सम्मान, यूपी हिंदी संस्थान का प्रेमचंद स्मृति सम्मान, एमपी साहित्य अकादमी का पदुमलाल बक्शी सम्मान प्रमुख हैं.
उनके निधन का समाचार सुनकर साहित्य जगत स्तब्ध है. रवींद्र कालिया की पत्नी ममता कालिया का नाम भी साहित्य जगत में सम्मान के साथ लिया जाता है.
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