भारत के पहले स्वदेश निर्मित विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रांत का
कोच्चि में 10 जून 2015 को
जलावतरण किया गया.
जहाज़ का संरचनात्मक कार्य पहले ही पूरा हो चुका है एवं दूसरे चरण में जलावतरण के बाद इसमें संरचना सुधार का कार्य किया जायेगा.
विशेषताएं
यह भारत का पहला विमान वाहक पोत है.
इसकी आधारभूत संरचना भारतीय नेवी के डायरेक्टरेट ऑफ़ नेवल डिज़ाइन द्वारा कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड की सहायता से (सीएसएल) तैयार की गयी.
जहाज़ का संरचनात्मक कार्य पहले ही पूरा हो चुका है एवं दूसरे चरण में जलावतरण के बाद इसमें संरचना सुधार का कार्य किया जायेगा.
विशेषताएं
यह भारत का पहला विमान वाहक पोत है.
इसकी आधारभूत संरचना भारतीय नेवी के डायरेक्टरेट ऑफ़ नेवल डिज़ाइन द्वारा कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड की सहायता से (सीएसएल) तैयार की गयी.
इसका वज़न 40,000 मीट्रिक टन, लम्बाई 260 मीटर तथा चौड़ाई 60 मीटर है.
इसमें दो हवाई पट्टियां बनाई गयी हैं. इसमें स्टोबर विमानों की उड़ान तथा हेलीकाप्टरों के लिए सुगम चालन की व्यवस्था भी मौजूद है. यह वर्ष 2017 में बेसिन परीक्षणों के गुजरेगा तथा वर्ष 2018 में भारतीय नेवी में शामिल होगा.
इस पोत के भारतीय नेवी में शामिल होने के बाद भारत विश्व के चार देशों संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस के उस विशिष्ट समूह में शामिल होगा जिनके पास इस तरह के पोत मौजूद हैं.
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