लंबी दूरी के सतह–से–हवा में मारक क्षमता वाली मिसाइल (एलआरएसएएम), बराक 8’,
जिसे भारत और इजराइल ने मिलकर बनाया है, का
सफल परीक्षण इजराइल में 10 नवंबर 2014 को
किया गया. एलआरएसएएम मिसाइल को इजराइल में ‘बराक 8’ मिसाइल का नाम दिया गया.
‘बराक 8’ मिसाइल ने एक लड़ाकू विमान पर घात लगाकर
हमला किया जो सफल रहा. इस परीक्षण में मिसाइल के नौसेना और जमीन आधारित विभिन्न
प्रकार के तत्वों को भी मान्यता प्रदान की गई इसमें फेज्ड ऐरे रडार, युद्ध प्रबंधन प्रणाली, संचार और इंटरसेप्टर भी
शामिल है.
यह परीक्षण इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (आईएआई) ने डीआरडीओ के
वैज्ञानिकों और भारतीय सैन्य बल के अधिकारियों की उपस्थिति में किया. डीआरडीओ
प्रमुख और रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. अविनाश चंदर आईएआई के अध्यक्ष
जोसफ वाइस और इस्राइली रक्षा बलों के अन्य शीर्ष अधिकारियों के साथ इस परीक्षण में
शामिल थे.
यह सफल परीक्षण दोनों देशों के उन्नत हथियार प्रणालियों के विकसित
करने की दिशा में द्विपक्षीय सहयोग में मील का पत्थर साबित होगी.
डीआरडीओ के अनुसार, बराक 8’ को नौसेना के बेड़े में हाल ही में शामिल किए गए आईएनएस कोलकाता पर लगाया
जाना है, जो कि परीक्षण में होने वाली देरी के कारण अभी तक
बिना हथियार प्रणाली के है. इसे अन्य नौसेना जहाजों पर ही लगाया जा सकता है. इन
जहाजों में हाल ही में नौसेना बेड़े में शामिल आईएनएस कामरोता भी है.
पृष्ठभूमि
भारत और इजराइल ने जनवरी 2007 में
नई पीढ़ी के बराक एसएएम, जिसे बराक II के
नाम से जाना जाता है, को मिलकर विकसित करने के लिए 330
मिलियन अमेरिकी डॉलर का एक समझौता किया था. यह डीआरडीओ, भारतीय नौसेना और इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्री (आईएआई) के बीच एक
त्रिपक्षीय समझौता है. भारतीय सरकार की भाषा में इस मिसाइल को एलआरएसएएम के नाम से
जाना जाता है.
इसे कई प्रकार के हवाई खतरों जैसे एंटी – शिप मिसाइल, विमान, यूएवी और
ड्रोन और सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों, से निपटने के लिए डिजाइन
किया गया है.
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