सालगावकर एफसी ने पुणे एफसी को हराकर डूरंड कप जीता-(11-NOV-2014) C.A

| Tuesday, November 11, 2014
सलगांवकर एफसी ने 8 नवंबर 2014 को मडगांव में खेले गए फाइनल में पुणे एफसी को 1-0 से हराकर तीसरी बार डूरंड कप का खिताब जीता. सालगावकर की ओर से थांगजाम सरण सिंह ने एकमात्र गोल 21वें मिनट में किया.
सालगावकर ने इससे पहले वर्ष 1999 और वर्ष 2003 में डूरंड कप जीता था. सालगावकर को टूर्नामेंट जीतने पर 25 लाख रूपये का पुरस्कार मिला जबकि पुणे एफसी को 15 लाख रूपये मिले. दो सेमीफाइनलिस्ट टीम बंगलूरू एफसी और स्पोर्टिंग क्लब डी गोवा को पांच-पांच लाख रुपए का पुरस्कार प्रदान किया गया. सालगांवकर ने 11 वर्ष बाद डूरंड कप जीता. सलगांवकर के कोच डेरिक परेरा ने दो बार ट्रॉफी जीती. एक बार उन्होंने बतौर कोच और एक बार बतौर खिलाड़ी उन्होंने ट्रॉफी जीती.
डूरंड कप के बारे में
•    डूरंड कप एशिया का सबसे पुराना और दुनिया में तीसरा सबसे पुराना फुटबॉल टूर्नामेंट है. यह पहली बार वर्ष 1888 में खेला गया था.
•    टूर्नामेंट का नाम तत्कालीन समय के ब्रिटिश भारत के विदेश सदस्य, लंदन में विदेश सचिव सर मोर्टिमर डूरंड के के नाम पर है.
•    पहला डूरंड कप रॉयल स्कॉट्स फ्यूसीलियर्स ने हाईलैंड लाइट इन्फैंट्री को 2-1 से हराकर जीता था.
•    वर्ष 1940 में आयोजन स्थल नई दिल्ली के लिए स्थानांतरित किया गया था और अब यह अम्बेडकर स्टेडियम में आयोजित किया जाता है. वर्ष 1947 में भारत की आजादी के बाद टूर्नामेंट को भारतीय सेना द्वारा आयोजित किया गया.
•    स्वतंत्रता प्राप्ति के पशचात् वर्ष 1950 में पहली बार डूरंड कप हैदराबाद सिटी पुलिस ने मोहन बागान एसी को 1-0 से हराकर जीता था.
•    डूरंड कप का 125वां संस्करण वर्ष 2012 में एयर इंडिया ने डोडसाल मुंबई को 3-2 से हराकर जीता था.
•    डूरंड कप का 126वां संस्करण मोहम्मडन स्पोर्टिंग ने 70 वर्ष बाद ओएनजीसी को 2-1 से हराकर जीता था.
•    डूरंड कप प्रथम विश्व युद्ध (वर्ष 1914-1918), द्वितीय विश्व युद्ध (वर्ष 1945-1939), भारत-चीन युद्ध (1962)  और भारत के विभाजन (वर्ष 1946-49) के दौरान नहीं खेला गया था.
•    सबसे ज्यादा बार डूरंड कप फुटबॉल टूर्नामेंट जीतने का रिकार्ड ईस्ट बंगाल (16) और मोहन बागान (16) के नाम हैं.



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