सीएमबी: कैश मैनेजमेंट बिल्स (Cash
Management Bills)
केंद्र सरकार ने कैश मैनेजमेंट बिल्स (Cash Management Bills, CMBs) के द्वारा बाजार से 10000 करोड़ रुपये 10 नवंबर 2014 को जुटाए. केंद्र सरकार की ओर से आरबीआई ने 42 दिन की कैश मैनेजमेंट बिल्स (CMB) नीलामी का आयोजन किया था और सरकारी खजाने के लिए ब्याज पर 1.75 प्रतिशत अंक बचाया.
केंद्र सरकार ने कैश मैनेजमेंट बिल्स (Cash Management Bills, CMBs) के द्वारा बाजार से 10000 करोड़ रुपये 10 नवंबर 2014 को जुटाए. केंद्र सरकार की ओर से आरबीआई ने 42 दिन की कैश मैनेजमेंट बिल्स (CMB) नीलामी का आयोजन किया था और सरकारी खजाने के लिए ब्याज पर 1.75 प्रतिशत अंक बचाया.
राजकोष पर जब अल्पकालिक तरलता का संतुलन बिगड़ता है तब कैश मैनेजमेंट
बिल्स (CMB) का इस्तेमाल किया जाता है.
सरकार ने कैश मैनेजमेंट बिल्स (Cash Management Bills) का प्रयोग क्यों किया
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के वेज एंड मीन्स एडवांस ( अर्थोपाय अग्रिम– WMA) के तहत, सरकार रेपो दर में अल्पकालिक नकदी की कमी को पूरा करने के लिए मार्च 2015 तक 20000 करोड़ रुपये उधार ले सकती है. अगर सरकार इस सीमा से अधिक का उधार लेती है, तो सरकार को वर्तमान रेपो दर 10% पर दो प्रतिशत प्वाइंट उपर की दर से ब्याज देना होगा. हालांकि, अगर सरकार कैश मैनेजमेंट बिल्स (CMB) के जरिए धन का प्रयोग करती है, तो आमतौर पर उसे कम ब्याद दर चुकानी होती है.
कैश मैनेजमेंट बिल्स (Cash Management Bills)
भारत सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक के साथ परामर्श कर सरकार के अस्थायी बेमेल नकद प्रवाह को पूरा करने के लिए एक नए अल्पकालिक उपकरण– कैश मैनेजमेंट बिल्स जारी करना का फैसला किया था.
कैश मैनेजमेंट बिल्स गैर–मानकीकृत रियायती उपकरण है जो कि 91 दिनों से कम की अवधि वाले परिपक्वताओं के लिए जारी किए गए हैं.
कैश मैनेजमेंट बिल्स में ट्रेजरी बिल्स के सामान्य गुण होंगे.
कैश मैनेजमेंट बिल्स में निम्नलिखित विशेषताएं होती हैं
क) अवधि, अधिसूचित राशि और प्रस्तावित कैश मैनेजमेंट बिल्स के जारी करने की तारीख सरकार के अस्थायी नकद जरूरतों पर निर्भर होगा. हालांकि, प्रस्तावित बिलों की अवधि 91 दिनों से कम की होगी.
ख) प्रस्तावित बिल नीलामी के जरिए अंकित मूल्य के लिए रियायत पर जारी किए जाएंगे, जैसा कि राजकोष बिलों (ट्रेजरी बिल्स) में होता है.
ग) प्रस्तावित बिलों की नीलामी की घोषणा भारतीय रिजर्व बैंक अलग से जारी प्रेस विज्ञप्ति के जरिए करेगी. यह प्रेस विज्ञप्ति नीलामी से एक दिन पहले जारी की जा सकती है.
घ) नीलामी का निपटान T+1 आधार पर होगा.
ङ) ट्रेजरी बिलों के लिए गैर– प्रतिस्पर्धात्मक बोली योजना को कैश मैनेजमेंट बिल्स तक नहीं बढ़ाया जाएगा.
च) प्रस्तावित बिल्स व्यापार योग्य होगा और तैयार वायदा सुविधा (रेडी फॉरवार्ड फैसिलीटी) का पात्र होगा. प्रस्तावित बिल्स में निवेश बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 24 के तहत एसएलआर प्रयोजन के लिए बैंकों द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश की पात्रता के रूप में माना जाएगा.
सरकार ने कैश मैनेजमेंट बिल्स (Cash Management Bills) का प्रयोग क्यों किया
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के वेज एंड मीन्स एडवांस ( अर्थोपाय अग्रिम– WMA) के तहत, सरकार रेपो दर में अल्पकालिक नकदी की कमी को पूरा करने के लिए मार्च 2015 तक 20000 करोड़ रुपये उधार ले सकती है. अगर सरकार इस सीमा से अधिक का उधार लेती है, तो सरकार को वर्तमान रेपो दर 10% पर दो प्रतिशत प्वाइंट उपर की दर से ब्याज देना होगा. हालांकि, अगर सरकार कैश मैनेजमेंट बिल्स (CMB) के जरिए धन का प्रयोग करती है, तो आमतौर पर उसे कम ब्याद दर चुकानी होती है.
कैश मैनेजमेंट बिल्स (Cash Management Bills)
भारत सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक के साथ परामर्श कर सरकार के अस्थायी बेमेल नकद प्रवाह को पूरा करने के लिए एक नए अल्पकालिक उपकरण– कैश मैनेजमेंट बिल्स जारी करना का फैसला किया था.
कैश मैनेजमेंट बिल्स गैर–मानकीकृत रियायती उपकरण है जो कि 91 दिनों से कम की अवधि वाले परिपक्वताओं के लिए जारी किए गए हैं.
कैश मैनेजमेंट बिल्स में ट्रेजरी बिल्स के सामान्य गुण होंगे.
कैश मैनेजमेंट बिल्स में निम्नलिखित विशेषताएं होती हैं
क) अवधि, अधिसूचित राशि और प्रस्तावित कैश मैनेजमेंट बिल्स के जारी करने की तारीख सरकार के अस्थायी नकद जरूरतों पर निर्भर होगा. हालांकि, प्रस्तावित बिलों की अवधि 91 दिनों से कम की होगी.
ख) प्रस्तावित बिल नीलामी के जरिए अंकित मूल्य के लिए रियायत पर जारी किए जाएंगे, जैसा कि राजकोष बिलों (ट्रेजरी बिल्स) में होता है.
ग) प्रस्तावित बिलों की नीलामी की घोषणा भारतीय रिजर्व बैंक अलग से जारी प्रेस विज्ञप्ति के जरिए करेगी. यह प्रेस विज्ञप्ति नीलामी से एक दिन पहले जारी की जा सकती है.
घ) नीलामी का निपटान T+1 आधार पर होगा.
ङ) ट्रेजरी बिलों के लिए गैर– प्रतिस्पर्धात्मक बोली योजना को कैश मैनेजमेंट बिल्स तक नहीं बढ़ाया जाएगा.
च) प्रस्तावित बिल्स व्यापार योग्य होगा और तैयार वायदा सुविधा (रेडी फॉरवार्ड फैसिलीटी) का पात्र होगा. प्रस्तावित बिल्स में निवेश बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 24 के तहत एसएलआर प्रयोजन के लिए बैंकों द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश की पात्रता के रूप में माना जाएगा.
0 comments:
Post a Comment